‘‘अरे बबलुआ अरे यहां सुन’’ स्कूल से लौटते वक्त एक कड़कदार आवाज में मेरे कानों में पड़ी और मैं सहम कर उस ओर देखने लग गया। यह रीना के बड़े भाई नवीन दा की आवाज थी और मैं सहमते हुए उनके पास चला गया तभी एक जोरदार झन्नाटा में मेरे कानों मे गुंजने लगी और लगा जैस मंदिर में हजारों घंटी एक साथ बजने लगी हो। मेेरे मंुह में पान की गिलोरी थी और वह जैसे इस झन्नाटे से प्रफुल्लित हो गई हो और वह में सफेद रंग के शर्ट पर आ गिरी और उसे छिटेदार कर दिया।
‘‘बहुत हीरो हो गेलही हैंे रे‘‘ मेरे मन मे रीना के पास मेरा प्रेम पत्र पकड़ा जाना या फिर किसी के द्वारा इसके बारे में उनको बता दिया जाना जैसे आशंकाऐं धूमने लगी। नवीन दा पटना मे रहते थे और कभी कभी अपने घर आते थे। इस झन्नाटेदार तमाचे के बीच मैं इसका कारण तलाश ही रहा था कि तभी वह सामने आ गया।
‘‘हीरो हो गेलही हे रे, पढ़े ले जा ही की पान खा के हीरो गिरी करे ले’’
बहुत राहत हुई। उनके इतना बोलते ही यह स्पष्ट हो गया कि यह मामला दूसरा है। मैंने झट पान की गिलोरी अपने मुंह से फंेकी और चुपचाप खड़ा रहा। मेरे आंखों में आंसू डबडबा आये और कुछ देरे तक नवीन दा का भाषण चलता रहा है।
‘उंह जिंस और उजर शर्ट, लाट साहब बनके स्कूल जा हखिन, खाक पढ़वो।’’ और फिर कुछ सवाल भी पुछे जिसका जबाब नहीं दे सका।
मैं रोता हुआ घर आया। फूआ ने पूछा ‘‘की होलउ रे’’ मैं ने सबकुछ बता दिया। फिर शुरू हो गया गदर। फूआ रीना के घर जाकर उसकी मां से इस बात की शिकायत दर्ज करायी और खूब खरी खोंटी सुनाई।
फुआ-फुुफ्फा को बाल बच्चा नहीं था और वे अपने बेटे से बढ़ का मुझे मानते थे। मैं दो साल की उमर से इसी गांव मं रह रहा था और अपना घर साल मे एक आध बार ही जाता था। सो फूआ का गदर चलू था ‘‘पढ़तै की नै इ देखे वाला दोसरका के होबै हइ, बुतरू के मंुह पर पांचों अंगूरी छाप देनखिन, जरिको ममता नै है’’ मैं आकर आइने मे देखा सचमुच मेरे गाल पर उनके उंगलियंो के निशान उग आये थे और लगा जैस उससे खून निकल आएगा। रीना भी अपनी मां के बगल मंे थी फिर मुझे लेकर जाकर मेरे गाल पर उगे उंगलियों के निशान को दिखाया गया। रीना की मां कुछ बोल पाती तभी रीना ने टोक दिया ‘‘ठीके तो मारलखिन, पढ़ेले जा हो तब पान खाके धुमते रहो हो और स्कूलवा से भाग के सिनेमा देखेले जा हो’’ रीना ने अपने भाई का ही पक्ष लिया और मैं तिलमिला गया। स्कूल से भाग कर सिनेमा देखने की बात भी उसने कह दी। मैं भी गुस्से में था, बोला ‘‘ जादे मामा बनमही, तों ही देखली , सिनेमा जाहिऐ, कहिना गिलिए है सिनेमा देखेले।’’ पर रीना को तो सब पता था किसके साथ और कब सिनेमा गया। इस बात का जिक्र स्वाभाविक रूप से प्रेम पत्रों में करता था। आखीर तीन चार पन्नों को भरना जो होता था। खूब हंगमा हुआ। बहस हुई। रीना की मां ने भी समझाया ‘‘पढ़वो नै बउआ तब अपने जिनगी ने बरबाद होतो दोसरका के की लेभो, तोरे ले ने मारलको’’।
इस हंगामे का परिणाम यह हुआ कि रीना और हमारी लड़ाई शुरू हो गई। कई दिनों तक बात चित नहीं हुई। मैं छत पर जाता तो वह नीचे चली जाती और मैं नीचे होता तो वह छत पर होती। मतलब साफ था वह अपने भाई के इस कदम के साथ थी और मुझे गलत मान रही है। खैर इस सब का परिणाम यह हुआ की मैंने पान खाना छोड़ दिया। ‘‘ हां एक दिन रीना के छोटे भाई की जमकर धूनाई कर दी। वह माध का महीना था और मैं खेत देखने जा रहा था तभी रीना का छोटा भाई मेरे खेत से बूंट ‘‘चना’’ उखारता धरा गया। फिर क्या था मैं अपना बदला सधा लिया और संयोग से मेरे हाथ में बांस की करांची थी जिससे सटाक सटाक उसको हौंक दिया। कई जगह उसके शरीर पर इसके दाग उखड़ आये और फिर मैं शाम तक घर नहीं गया। जानता था आज मेरे घर पर हंगामा होगा। सो सूरज के छुपने के बाद घर गया वह भी उसके उखाड़े गये चने के साथ कुछ और चना उखाड़ कर उसमें साथ कर लिया ताकि उसकी छोटी चोरी को बड़ा साबित कर सकूं। घर आया तो फूआ की भारी डांट खानी पड़ी पर मेरी तरकीब काम कर गई। मैं अपने साथ लाए चने को सबूत के साथ पेश कर दिया और बात खत्म। मगर नही बात तो और बिगड़ गई। रीना और नाराज हो गई और मैं भी गुस्से में । दो तीन माह तक कोई संपर्क नहीं। पर प्रेम की आग जो जल रही थी वह कहां बुझने वाली। एक दिन भी यदि दोनों में से किसी का भी एक झलक नहीं मिल जाए तो अजीब सी बेचैनी होती थी और उस बेचैनी को खत्म करने के लिए एक झलक पाना जरूरी होता। बात चलती रही, दिन गुजरते रहे।
शेष अगले किश्त में, बने रहिए।
यह छोटी सी लव स्टोरी तो बहुत बड़ी लग रही है देखना है आगे क्या होता है ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सही जा रही है मय तकरार...आगे इन्तजार है कि पहले रीना मानी कि आप :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपका लिखा पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.मगही में लिखी बातें, बचपन में ननिहाल में बिताये दिनों कि याद ताज़ा कर गईं. लगा कि "नवीन दा" कोई पहचाने से हैं- ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंक्या आपका मरांची हथिदह से कोई ताल्लुक है?
धन्यवाद्
वैसे भी जबतक प्यार में रूठने मनाने का सिलसिला नही हो तो मजा कहॉ आता है। यही एक चीज तो है जिससे प्यार और गहरा होता है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छा लगा पढ़कर ....प्रवाहमयी लिख रहे हैं..... आगे का इंतजार है....
प्रत्युत्तर देंहटाएंचलो अब एक बार आ ही गए हैं तो पूरी फिल्म देखनी ही पडेगी लेकिन छोटी सी लव स्टारी तो काफी लंबी हो रही है।
प्रत्युत्तर देंहटाएं@ सुनील जी, अतुल जी पधारने के लिए धन्यवाद । वैसे छोटी सी लव स्टोरी लंबी तो होगी ही सरजी, 22 सालों की कहानी को शब्दों में समेटना है और आप लोगोें कें हौसले से ही हो पा रहा है ।
प्रत्युत्तर देंहटाएं@ समीर जी,, आपकों इंतजार करा रहा हूं यह मेरे लिए बड़ी बात है। सादर की आप की नजरेइनायत है।
@रवि जी, मरांची और हाथिदह से मेरा कोई खास संपर्क तो नहीं है पर बगल में है और आना जाना होता ही है। पधारने के लिए धन्यवाद।
@मोनिका जी,, पढ़कर आपको अच्छा लगा जानकर हर्ष हुआ। धन्यवाद की इंतजार करेगीं...
प्लीज इसका टाइटिल बदलके एक बड़ी सी लव स्टोरी कर दें।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवैसे स्टोरी में दम है।
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ब्लॉगवाणी: ब्लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।
अरुण भैया, प्रणाम.
प्रत्युत्तर देंहटाएंनेटवर्क समस्या के कारन तनिक बाद में आ पैलियो. माफ़ करिहा.
चौथाक्का कड़ी पढ़ के त मियाज गर्दा- गर्दा हो गेलो.
सच्चे, ई कहनियाँ बड़ी नीमन से आगे बढ़ रलो ह. मन खुश हो जा रलो ह पढ़ के. एकदम विस्तार से लेले जा.
बड़ी बढ़िया दस्तावेज इहे बहाने तैयार हो रलो ह. कंजूसी करे के तनको जरुरत नय हको.
हाँ, रीना के लेके संस्पेंस लगातार बढ़ते जा रहलो ह. उनकर तोरा से गुस्सा बेजायं नय हको. ऊ सहिये रास्ता पर हखुन.
अब भला पान खाल कौनो बढ़िया काम है की? ई बात पर उनकर बड़का भईया माल्खुन, त तों उनकर छोटका भाई के धो देल्हो. ई त और ख़राब काम भेलो.
अब ऊ गुस्सा नय करथून त और की करथून .. ? वईसे उनकर गोस्सा भी पीछे से तोरा प्रति गहरा प्यार के ही दरसा रहलो ह.
ई निश्छल आ मासूम प्यार पर त तों बधाई के हक़दार हखो.
धन्यवाद आ प्रणाम सहित,
जारी रखा....
Your writing capicity is same to third writing of gret writer PREMCHAD .
प्रत्युत्तर देंहटाएंSHEIKHPURA TIMS KE BARE ME KAHNA HY KI-------Midiya jagat me aap ki es pahal ka swagat hy.bhagban aapko sakti de.Sachmuch aap hamare prerna ke sarot bante ja rahe hay.एक सराहनीय कदम
प्रत्युत्तर देंहटाएंउठाया गया.---(SATISH KUMAR BARBIGHA) ईमानदारी और मूल्यों की पूंजी ले, सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ मीडिया में AAP AYE HY
लव स्टोरी तो बढ़िया हो ही पर सबसे ज्यादा मजा अईलो हमरा शेखपुरा साइड वाला मगही सुन के... मिजाज खुश हो गेलो.... खूब बढ़िया.. अगला किश्त के इंतज़ार करवो...
प्रत्युत्तर देंहटाएंwe are waiting for fifth installment of story
प्रत्युत्तर देंहटाएंखूब बढ़िया....आगे का इंतजार है
प्रत्युत्तर देंहटाएंपाँचवीं किश पढने से पहले पिछली किश्तें भी पढी। रोचक कहानी आभार।
प्रत्युत्तर देंहटाएंह्ह्म्म..
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