इस सब के बीच, मन मौन के इन क्षणों में कई तरह के झंझावातों और ज्वारभाटों से होकर गुजर रहा था। जब वह आई तो कितने देर तक दोनों के बीच कोई नहीं था पर खामोशी ने इस एकांत पर अपना सर्वाधिकार बहुत देर तक सुरक्षित कर रखा। वह भी खामोश थी और मैं भी। मन के अंदर उठे ज्वारभाटे की लहर प्रबल थी और रह रह कर मन के चटटान पर अपनी कोमल थपेड़ों से उसे तोड़ने का प्रयास कर रही थी। देह की भाषा थपेड़ा बन सामने आया। मन के किसी कोने में देह अपनी भाषा बुलंद कर रहा था और हमदोनों इसको समझ अंदर से खुश हो रहे थे और डर रहे थे। उसके चेहरे पर छाई खामोशी को तोड़ने का उपक्रम करता हुआ पसीना झलक आया और मेरी खामोशी के एकाधिपत्य को सांसों का रफतार तोड़ रही थी। उस क्षण मन के ज्वारभाटे ने इस तरह शब्दों का रूप ले कविता में ढल गई.............
मौन अधर की भाषा
मन ही जाने
मन ही समझे
मौन अधर की भाषा,
न शब्द
न कोष
मन ही बूझे
मौन अधर की परिभाषा।
कभी आंसू बन यह छलके
कभी सूर्ख पलकों से झलके
कभी चेहरे पर पढ़ लेता मन
मौन अधर की अभिलाषा।
मन में कई तरह के विचार एक झण में आये और गुजर गए। गांव में प्रेम की पूर्णाहुति देह पर होती थी और पूर्णाहुति का यह क्षण मेरे आगे बांह फैलाए खड़ा था। इस सबके बीच द्वंद जारी थी जिसमें मन की कसौटी पर पवित्र-प्रेम, नैतिकता-अनैतिकता सहित कई तरह के चीजों को कसी जा रही थी।
खैर,
भगवान, भगवान, करते हुए बच्चे को चुप कराने का उपक्रम करते हुए रीना अपने भतीजे से कह रही थी
‘‘फुफा बउआ फुफा’’
और बच्चा मेरा मंुह देखने लगाता। मैं भी उसे कभी गोद में लेता तो कभी कंधे पर बैठा कर घुमाता ताकि वह चुप रहे।
और बच्चा मेरा मंुह देखने लगाता। मैं भी उसे कभी गोद में लेता तो कभी कंधे पर बैठा कर घुमाता ताकि वह चुप रहे।
जैसे तैसे सिरायबली वहां से गई और फुआ भी वापस नहीं आई थी, जान में जान आई।
इस सब के बीच महसूस किया कि जितना मैं डर गया था उतना रीना नहीं डरी थी, उसके चेहरे पर एक अजीब सा आत्मविश्वास थी और वह बस इतना ही कह रही थी कि
‘‘ की होतइए, आय नै तो कल ई सामने तो आइबे करतै, तब डरे की बात है’’
मेरे लिए यह संबल की बात थी। रीना हमेशा से अपने प्रेम को उजागर करना चाहती थी, लोग जान जांय तब सब ठीक हो जाएगा।.......
शेष अगले किश्त में, बने रहिए....
मन ही जाने
प्रत्युत्तर देंहटाएंमन ही समझे
मौन अधर की भाषा,
न शब्द
न कोष
मन ही बूझे
मौन अधर की परिभाषा।
क्या खूब कविता रची आपने!
सुन्दर.
मनमोहक.
संक्षिप्त किस्त कि कसर इस भावपूर्ण कविता ने पूरी कर दी!
जारी रहिये.
बिल्कुल बने रहें अगले किस्त तक और उसकी आगे भी ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंरोचक जो कहानी चल रही है। :)
न शब्द
प्रत्युत्तर देंहटाएंन कोष
मन ही बूझे
मौन अधर की परिभाषा।
bahut khoob
भाषा ...परिभाषा ...अभिलाषा ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर लिखा है ...!!
bhut hi khubsurat shabdo ke samayjan kiya hai apne...
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छी रचना ...ऊपर जो लिखा है पूरा नहीं पढ़ पाए ..अनुसरण करें गैजेट ने ढक रखा है ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut chhipa liya
प्रत्युत्तर देंहटाएंयह मुखरित मौन कोई कोई ही समझ पाता ...छोटी सी लव स्टोरी को खूबसूरती से बयाँ कर रहे हैं...
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