30 मई 2011

बिहार के पदाधिकारी भ्रष्टाचार के पोशक, देखिए नजरा।


कल फिर एक एनजीओ के द्वारा करोड़ों रू. की ठगी की बात को सामने लाने में संधर्ष करना पड़ा, कड़ा सधर्ष। इससे पहले के पोस्ट में एनजीओ के कारनामों का विवरण है। हुआ यूं की एक मित्र के माध्यम से यह जानकारी मिली की महिलाओं से रूपया लेकर पालनवाड़ी केन्द्र खोलबाने वाली संस्था के आगे बहुत सी महिला जमा है और महिलाओं को आठ माह से वेतन नहीं दिया गया जिससे वे नराज है। इंडियन फारमर टरस्ट के नाम से संचालित इस संस्था के बारे में मैं पहले से ही जानता था और दो तीन बार उसकी संदिग्ध गतिविधियों की रिर्पोट भी प्रकाशित कर चुका हूं। सो मैं वहां पहूंचा और रिर्पोट बनाने लगा  इसी बीच संचालक आया और मुझे न्यूज बनाने से रोकने लगा पर मैं निर्भीक होकर न्यूज बनाता रहा। संचालक के द्वारा अपने आदमी को बुलाया जा रहा था ताकि हमको रोका जा सके इसकी सूचना मैं तत्काल थानाध्यक्ष को दी और फिर एसपी को भी इस बात की सूचना दी की एक एनजीओं के द्वारा किस तरह महिलओं को ठगा गया पर एसपी ने साफ कह दिया कि इसमें पुलिस का कोई रोल नहीं। फिर मैंने डीएम से बात की जिसके बाद उनके द्वारा तत्काल कदम उठाया गया और दो धंटे बाद मौंके पर थानाध्यक्ष पहूंचे। थानाध्यक्ष ने पहूंचते ही ठगी की शिकार महिलाओं को हतोत्साहित करना प्रारंभ कर दिया। थानाध्यक्ष महिलाओं को साफ साफ कह रहा था कि हमसे पूछ कर पैसा दिया और आज जब भाग गया है तो हल्ला कर रहे हो। साथ वह महिलओं को ही जेल भेज देने की धमकी देने लगा। थानाध्यक्ष के इस कदम के बाद महिलाऐं वहां से भाग गई पर एक दो ने साहस किया और वहीं खड़ी रही। मैं थानाध्यक्ष से उलक्ष गया। 

इसके बाद एडीएम सहित दो तीन अन्य पदाधिकारी आये और मामले की जांच करने लगे। पदाधिकारी के सामने महिलाओं को सारी घटना बता दी और एक दो ने लिख कर भी दे दिया। फिर एनजीओं के कार्यालय को सील कर दिया गया। इसके बाद हमलोग चले गए। बाद में थानाध्यक्ष ने उस महिला को जिसने लिखित शिकायत की जेल जाने की धमकी देकर वहां से भगा दिया और इस घटना की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। एडीएम ने खुद फोन कर दरोगा की करतूत के लिए अफसोस जाहिर की पर कार्यवाई डीएम साहब करेगें ऐसा कहा।

चुंकी इस खुलासे मंे बडे़ अधिकारी के फंसने की बात सामने आ रही है सो सभी मैनेज करने में लगे है।

उधर इस खुलासे के बाद संचालकों के एक समर्थक ने दबी जुबान में वहीं कहा की डर नहीं लगता है बहुत खतरनाक और पहूंच बाला आदमी है तुमको क्या मिलेगा यह सब करके। अरे कमाने दिजिए, जात भाई ही तो है। साथ ही उसने यह भी कहा कि अंजाम बुरा भी हो सकता है। मैं वहीं साफ कर दिया कि इन सब बातों की परवाह नहीं करता।

उधर चैनलों मंे यह खबर अभी नहीं चलाई गई क्योंकि किसी अधिकारी ने बयान नहीं दिया। जिलाधिकारी रविवार होने की वजह से आवास पर किसी से नहीं मिले वहीं चैनल ने साफ कहा कि घोटाला कितना भी बड़ा हो अधिकारी का बयान चाहिए।


पर आज सभी अखबारों ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की है।


देखिए आज बयान मिल पाता है या नहीं मिलने पर घोटाले की खबर मर जाती है।

पर मैं इस अभियान को जारी रखा है और अंतिम दम तक इस महाठगी के खिलाफ लड़ूगा। 

इसी कड़ी में बीती रात महाठग की निजी डायरी मेरे हाथ लग गई है जिसमें इस बात जिक्र है कि शाखा कहां कहां है और किसने कितना रूपया दिया और दलाल का नाम भी बगल मंे इंगित है । अब देखिए आगे यह डायरी क्या क्या रंग लाती है यह आज पता चलेगा। 

पता नहीं क्यों इस तरह की बात जब सामने आती है तो एक अलग तरह का जुनून पैदा हो जाता है लड़ने का, कल से ही  बेचैनी से ही लगी हुई है। देखिए यह जुनून कब तक बची रहती है।

29 मई 2011

शेखपुरा जिला के बरबीघा से संचालित एक एनजीओ इंडीयन फार्मर टरस्ट ने 15 करोड़ से अधिक की राशि का महाघोटाला किया।


अन्तर्रराष्टीय स्तर पर एनजीओं ने की महाठगी।

नटबरलाल एनजीओ संचालक।
स्थानीय पुलिस जानकारी के बाद भी चुपी साधे रही।

शेखपुरा जिला के बरबीघा से संचालित एक एनजीओ इंडीयन फार्मर टरस्ट ने 15 करोड़ से अधिक की राशि का महाघोटाला किया।

पालनवाड़ी के नाम पर बसुला 10000 से 25000 प्रति व्यक्ति।

करोड़ों लेकर फरार हुआ एनजीओं।

यहां से पूरे बिहार एवं नेपाल में संचालित होता था करोबार।

पदाधिकारी भी आकर भाग लेते थे इसके कार्यक्रम।

सिविल सर्जन, बिडिओं और जिला शिक्षा पदाधिकारी के आने से लोगों में जगा भरोसा।े

नेताओं की भी थी सह।

एक एक गांव में एक दर्जन से अधिक केन्द्र खोलो।

विधवा और विकलांग को भी नहीं बख्सा।

12 साल की छात्रा को भी बनाया शिक्षका और खोलबाया केन्द्र।


कर्ज लेकर और जेबरात बेच कर महिलाओं ने दिये पैसे।


यह एक शातिर दिमाग एनजीआंे संचालक के द्वारा की  गई महाठ्रगी का मामला है जिसके द्वारा पूरे बिहार से नेपाल तक करोड़ों रूपयों की ठगी कर ली गई है। इस नटवरलाल एनजीओं संचालक ने पहले तो इंडीन फार्मर टरस्ट का बोर्ड लगवाया। फिर समारोह में अधिकारियों को बुला कर लोगों को प्रभावित करने के लिए कंबल भी बांटे। इस एनजीओ का संचालन सतीश कुमार नामक मास्टर मांइड करता था जिसका सहकर्मी था संजीव कुमार, सतीश कुमार विधार्थी, विजय कुमार  आदि।

सतीश कुमार नवादा जिला के समाय का निवासी है वहीं स्थानीय कार्यालय संचालक संजीव कुमार यहीं के खोजागाछी गांव का रहने वाला है।

एनजीओं संचालक एम्बेस्डर कार से पहले गांव में जाता था और एम्बेस्डर के आगे लाल रंग का नेम प्लेट लगा रहता था जिसपर एनजीओं का नाम रहता था जिससे लोगों को यह आभास हो कि यह सरकारी है

एनजीओ संचालक सतीष कुमार मातृ कल्याण और शिशु पालन बाड़ी के नाम से सेंटर खोलने की बात कह कर 10000 से 25000 रू. बसुल करता था। एक एक टोले में एक दर्जन लोगों का सेंटर खोल दिया जाता था जिसमें 40 शिशुओं को पढ़ाने की बात कही जाती थी। साथ ही महिलाओं को यह आश्वासन दिया जाता था कि पहले दो माह के लिए 500 रू. प्रति माह, फिर 2000 रू. प्रतिमाह तथा फिर परीक्षा में पास होने के बाद 10000 रू. प्रतिमाह बेतन दिया जाएगा। इस झांसे में आकर महिलाओं ने कर्ज लेकर या फिर जेबरात बेचकर नजराना दिया और केन्द्र भी खोल दिया गया। शुरूआत मंे बाजार बनाने के लिए कुछ लोगों को एक महिना का बेतन 500 या 1000 दिया भी गया जिससे लोगों को भरोसा और भी पुख्ता हो गया और महिलाओं ने अपने सगे संबधियों को इससे जोड़ दिया और देखते ही देखतेे पूरे बिहार मे इसका नेटवर्क फैल गया।

वेतन नहीं मिला तो महिलओं को हुआ ठगी का एहसास

पिछले आठ माह से जब महिलओं को निर्धारित बेतन नहीं दिया गया तब जाकर महिलाअें को ठगे जाने का एहसास हुआ। मौके पर मौजूद बरबीघा थाना क्षेत्र के नरसिंहपुर निवासी कांति देवी, रजोरा निवासी प्रियंका कुमारी, कन्हौली निवासी रेणू देवी,  गंगटी निवासी सुभाष पासवान, शेखपुरा थाना के मुरारपुर निवासी साधना देवी, मुख्यमंत्री के नाम लिखे आवेदन में इसकी शिकायत की है तथा वहीं पुलिस को भी लिखित रूप में इसकी शिकायत की है।

बच्चों और विधवाओं को भी नहीं बख्शा


सर्वा पंचायत के रजौरा गांव में नवमीं की छात्रा प्रियंका को बना दिया सेविका। वहीं नगर पंचायत के सामाचक मोहल्ले में बबीता 15 साल को भी सेविका बहाल कर दिया।

वहीं विधवाओं ने आसरे के तौर पर इसकी ओर देखा और जेवरात बेच कर पैसा दिया उन्हें भी आज पछताना पड़ रहा है।


शातिर संचालक ने महिलाओं को पैसा लेने का किसी भी प्रकार का रीसीभिंग नहीं दिया और महिलओं से यह भी लिखबा कर ले लिया कि मैं निःशुल्क और निःस्वार्थ भाव से सेविका पद पर कार्य करूगी।

महिलओं से स्टाम्प पेड पर भी शपथ ले लिया गया।

इस तरह से एनजीओं का महाठग अभियान चलता और फिर कई माह बीत जाने पर जब बेतन नहीं मिला तब महिलाऐं कार्यालय आई तो वहां से लगातार उन्हें बहाने बना कर लौटा दिया जाने लगा। जब इसकी सूचना राष्टीय सहारा को लगी तो वह वहां पहूंची तब महिलओं ने अपना दुखड़ा सुनाया।


दरोगा जी ने महिलाओं को ही हड़काया।

बाद में जब इसकी महाठगी की सूचना स्थानीय थाना को दी गई तो थानाध्यक्ष दो धंटे बाद धटनास्थल पर पहूंचे और महिलओं को ही डराने घमकाने लगे की क्यों पैसा दिया और साफ कहा कि इस मामले में पुलिस कुछ नहीं कर सकती। यहां तक की थानाध्यक्ष एस एस सिंह ने बाद में जिन महिलओं ने आवेदन दिया उसे भी यह समझाते रहे क्यों कानूनी लफडे और पुलिस के चक्कर में फंसते हो।


जिलाधिकारी की पहल पर हुई कार्यवाई। कार्यालय हुआ सील।

बाद में इसकी सूचना  जिलाधिकारी को दी गर्इ्र तो उन्होने तत्काल कार्यवाइ्र करते हुए पदाधिकारी को धटनास्थल पर भेज कर कार्यालय को सील करवाया तथा महिलओ का बयान दर्ज किया। मौके पर पहूंचे एडीएम महेन्द्र सिंह ने महिलओं से अकेले में बात कर सबका बयान लिया वहीं मौके पर पहूंची सीडीपीओ ओनम ने कहा कि पहले भी उनके द्वारा इसकी शिकायत की गई है। वहीं बीडीओं राम यशराम ने बताया कि पंचायत समिति की बैठक में प्रस्ताव पारीत कर इस संस्था से बचने की अपील लोगों से की गई थी।

सिविल सर्जन और डीईओ के आने से लोगों मंे जमा भरोसा

संस्था के समारोह में सिविल सर्जन सीपी गुप्ता तथा डीइओ के आने से लोगों में भरोसा जगी और लोगांे ने छूट कर पैसा लगा। संस्था कें कार्यालय में इन अधिकारियों की बड़ी बड़ी तस्वीर भी लगा कर रखी गई थी।


पुलिस ने नहीं की कार्यवाई।

इस सारे मामले में स्थानीय पदाधिकारियों की मिली भगत साफ सामने आती है और इससे पूर्व भी राष्टीय सहारा ने एक मात्र इस खबर को कई बार प्रकाशित किया पर पदाधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया। कुछ पहले ही कुछ महिलओं ने थाने मंे लिखित रूप से शिकायत की कि इस तरह से उन्हें ठगा गया है पर पुलिस ने कार्यवाई नहीं की और माहिलओं को भी भगा दिया।

कहां कहां से केन्द्र

नाम         गांव         थाना      जिला राशि
सुधा कुमारी अकौना धोसी     जहानाबाद 8000
रूबी कुमारी सकरावां         अस्थावां     नालान्दा 7000
संजना कुमारी हरगांवां अस्थावां     नालान्दा 6500
विभा देवी        सामाचक         बरबीघा     शेखपुरा 7000
रेखा देवी        बेलवव बरबीघा     शेखपुरा 7000
ताराप्रविन        अकबरपुर अकबरपुर          नवादा 7000
लुसी कुमार काजीचक बाढ़          पटना 8000
पल्लवी कुमारी पियारे पुर सरमेरा नालन्दा 6000
संगीता देवी गोविन्द्र पुर फतुहा पटना 12000
अनीता कुमारी घोसैठ पिड़ी बाजार लक्खिसराय 4000
रिक्कू कुमारी गुलाबचक हिल्सा नालन्दा 5000

25 मई 2011

कन्या भ्रुण हत्या ----यह तो नायाब तरीका है?


जिसको देखों वही दूसरे को कोस रहा है। कोई नेताओं को तो कोई भ्रष्ट अधिकारियों को। आज एक संस्था ने कन्या भ्रुण हत्या का सर्वो दिया जिसके अनुसार जिसके पास एक बेटी है वह तब तक भ्रुण हत्या करवाता रहता है जब तक बेटा नहीं हो...

सवाल यह नहीं है कि समाज में यह सब क्यों हो रहा है। मेरे मन तो जो सवाल अन्ना के समय से ही उठ रहा है वह 

यह है कि जितने लोग दूसरे को कोस रहे है क्या उतने लोग भी ईमानदारी से ईमानदार है?

जो लोग कन्या भ्रुण हत्या को लेकर बारबार सवाल उठा रहें है उनमें से कितने है जो दहेज नहीं लेगे.....? या नहीं लिये होगें?

नेताओं को लेकर हमेशा सवाल खड़ा करने वाले समाज में हम अपनी तरफ क्यों नहीं देखते?

ताजा उदाहरण बाबा रामदेव की अनशन का है....बाबा जी अनशन करेगें पर उनके स्वाभिमान संध से जुड़े जिन तीन लोगों को मैं जानता हूं उनमें से एक चिकित्सका के पास प्रति दिन एक एक दर्जन भ्रुण हत्या होती है, दूसरे अब्बल दर्जे का करप्ट पत्रकार है और तीसरा भ्रष्ट बकील ? 

जय हो

दूसरे को बुरा कह कर हम अच्छा हो जाएगें...........यह तो नायाब तरीका है?

04 मई 2011

लादेन भारत में होता तो उसकी भी ठाठ होती उर्फ दिग्गदर्शी दिग्गी राजा।


भारत विश्व को शांति का संदेश देने वाला देश है और अमेरिका को उंगली कर दुनिया को थर्राने वाला ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद एक बार फिर से यह बात साबित हो गई। भारत सरकार के मुखीया के सर्वप्रिय नेता दिग्गी राजा ने एक बार फिर से शांति का संदेश दे दिया। दिग्गी राजा ने पाकिस्तान में  घुस  कर ओसामा के मारे जाने और लाश को संमुद्र में दफना दिये जाने का विरोध करते हुए कहा कि दुनिया को देखना चाहिए कि यह अमेरिका की दादागिरी है? मनवाधिकार का उल्लंधन है। चलो जब अमेरिका के डर से कोई खोंख भी नहीं रहा, कोई तो "बाप के लाल!" ने ऐसा हिम्मत किया।

हां दुनिया का कोई देश लादेन की शव को अपनी जमीन पर दफनाने यदि नहीं देता तो दिग्गी के घर में काफी जगह थी और वहीं उसकी समाधी बना का दिग्गी एक वोट बैंक के लॉकर बन जाते।

अब भला बताइए। यह भी कोई बात हुई, पाकिस्तान में घुंस कर लादेन को मार गिराया और समुंद्र में दफन कर दिया। भारत में यदि लादेन होता तो आमेरिका की औकात होती कि उसे मार गिराता? हां एक बात लादेन को करनी पड़ती, वह यह कि चुनाव के समय फतबा जारी कर कांग्रेस को वोट देना का, बस बन गई थी बात। पर लादेन की बुद्धि यहां तेल लेने चली गई। अजि यहां खुले आम मुंबई हमले में लोगों को मारने वाला कसाब और संसद पर हमला करने वाला अफजल दामादी ठाठ से रह रहा है तो भला बताइए लादेन की ठाठ कैसी होती?

अपना देश भी अपना है प्यारे? यहां बाटला हाउस में आतंकियों को मारने में शहीद होने पर इंस्पेक्टर को श्रद्धांजली देने के बजाया इस सवाल को लेकर हंगामा होने लगा कि मरने वाला आतंकी नहीं था सच भी है, यह सच भी हो सकता है आखिर दिग्य विजय होने के मायने भी तो कुछ होने चाहिऐं। अपने दिग्गी राजा दिग्गदर्शी भी है। एक बार नहीं कई बार यह बात साबित हो गई। करकरे को कसाब ने नहीं मारा और जितने भी सबूत है वह सब बेकार यह तो सिर्फ अंर्तयामी दिग्गी राजा जानते है कि करकरे का संधीयों ने मारा है। जय हो।

सो भईया लादेन यदि भारत में होता तो उसकी भी ठाठ होती और अपनी भी आखिर हम धर्मनिरपेक्ष देश है और धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या तो सोनिया मैडम ही बेहतर कर सकती है..... जय हो..

नोट- ‘‘बाप का लाल होना’’ मुहावरे का व्याख्या पाठक स्वंय करें। और यदि कोई विद्वतजन हो तो इसे वाक्य में बदले, बदले में उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा।

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर अरुण साथी ताजिया को अपने कंधे पर उठाए मेरे ग्रामीण युवक बबलू मांझी रात भर जागकर नगर में घूमता रहा। ...