15 जून 2011

बिहार में अघोषित आपातकाल है? मैं कहता हूं आंखन देखी......

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बिहार में अघोषित रूप से आपातकाल लगा हुआ है और मैं ऐसा खिंज कर या फिर गुस्से में आकर नहीं कह रहा बल्कि जो इन दो खुली आंखों से देखता वह हमेशा उद्वेलित करता है। कई घटनाऐं है जिसमें कुछ वानगी मैं यहां रखना चाहूंगा। पहली घटना फारविसगंज की जहां एक एसपी के सामने पुलिस के जवान ने नृशंस रूप से राक्षसी प्रवृति का परिचय देते हुए एक युवक की हत्या इस लिए कर दिया कि वह प्रदर्शन कर रहा था पर इस घटना के बाद सरकार का जो पक्ष रहा वह पुलिस के पक्ष मंे रहा और छोटे अधिकारियों की गर्दन नाप कर हमेशा की तरह इस घटना की भी लीपा पोती कर दी गई।

दूसरी एक बड़ी घटना नीतीश कुमार के गृह जिला नालान्दा की है जहां तीन युवकों को अपराधियों मोटरसाईकिल सहित जला कर दिन दहाड़े मार दिया वहीं प्रशासन के द्वारा पहले यह कोशिश की जाती रही कि मामल सड़क दुर्धटना को लगे पर बाद में मीडिया के पहल पर मामला सामने आया तो पुलिस गलथेथरी करती नजर आई।

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अब मैं अपने अनुभव की बात कहता है। दो ताजी पुलिस करतूत। पहली यह कि बरबीघा के सामाचक में महेन्द्र पंडित के द्वारा एक बृद्व महिला का घर ढाह दिया गया और यह सब हुआ पुलिस कें ईशारे पर। हुआ यूं कि पुलिस के पास महेन्द्र कोर्ट की डीग्री लेकर आया कि जिस जमीन पर बुढ़ी महिला रहती है वह उसकी है उसे खाली करा दिया जाय। कानून के अनुसार खाली कराने मंे लंबा समय लगेगा और पुलिस ने मोटी रकम लेकर महेन्द्र को स्वतः ही घर खाली करा लेने की बात कह दी और फिर बुढ़ी महिला का पुरा घर ढाह दिया गया। सामान को सड़क पर फेंक दिया गया। उसकी बहु की गोद में पांच दिन का बच्चा था जिसे खिंच कर बाहर कर दिया गया और वह घूप में रह रही है।

दूसरी घटना अहियापुर की सोनी कुमारी एक महिला सुबह सात बजे यह फरीयद लेकर थाना आती है कि उसका पति दूसरी शादी कर रहा है कृप्या इसे रोका जाय और शाम तीन बजे तक किसी ने उसे इंटरटेन नहीं किया। शाम में पहले पुलिस उस पर समझौता का दबाब बनाया और जब वह नहीं मानी तो थाने से उसे भगा दिया गया।

इस तरह की घटनाऐ प्रति दिन घटती है जिससे हमेशा इस बात का संदेश जाता है कि बिहार मंे नौकरशाह और पुलिस मिलकर अपनी निरंकुश सत्ता चला रही है जिसमें जनता की आवाज नहीं सुनी जाती। पुलिस ने तो एक नायाब तरीका खोज लिया है कमाई का पहले पीड़ित का केश दर्ज करो फिर नामजद लोगों से मोटी रकम लेकर उसका केश उससे भी पहले दर्ज कर लो।

जनप्रतिनिधियों में आम नेताओं का तो कहीं कोई सुनता ही नहीं और सारी ताकत एको अहं द्वितीयांे नास्ति की तर्ज पर केन्द्रित हो गयी है जिसका परिणाम है कि विघायक भी किसी आम पीड़ित के लिए इंसाफ नहीं कर पाता, उसकी कोई सुनता ही नहीं?

भ्रष्टाचार चरम पर है और मुख्यमंत्री के जनता दरबार से जब पत्र थानेदार के पास जांच के लिए आता है तो वह पिड़ीत को बुला कर कहता है देख लिया न, कोई फायदा हुआ जब सब कुछ मुझे ही करना है तो वहां जाने से क्या फायदा। पर ढीढोरा ऐसा पीटा जा रहा है जैसे बिहार किसी दूसरे ग्रह की कोई जगह है जिसमें सबकुछ नायाब हो रहा है।

यहां यह बात भी सही है कि इस सब के बाद भी बिहार बदल रहा है पर इस बदलाव में जिस फर्मुले का प्रयोग किया जा रहा है उसका दुस्परिणाम अब सामने आने लगा है और यह सब देख कर लगता है जहां जनता की आवाज सुनने वाला कोई नहीं उसे आपातकाल नही ंतो क्या कहेगें?

11 जून 2011

एटावावाद में आतंकवादियों का सम्मेलन सम्पन्न?



कार्टून - बामुलाहिजा ब्लॉग से साभार 


टेरर वर्ल्ड में आज कल जिस खबर की चर्चा ब्रेकिंग न्यूज की तरह हो रही है वह ओसामा विन लादेन के पाक की मिली भगत से मारे जाने की नहीं बल्कि कसाब पर भारत सरकार के प्रति दिन 15 लाख रूपया खर्चने तथा दिग्गी के ओसामा जी संबोधन की है।

इस सबंधं में असुत्रों से मिल रही सूचना के अनुसार दुनिया भर के टेररिस्टों की एक बैठक एटावाबाद के ओसामा हाउस में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से भारत सरकार की आतंकियों के मेहमानबाजी करने तथा बाबाओं को खदेड़ खदेड़ का पीटने की भूरी भूरी प्रसंसा की गई। साथ ही साथ सोनीया मैडम के डपोरशंखी डुगडुगी (दिग्गी) की जिह्वा पर बैठकर ओसामा जी ओसामा जी उचारने को लेकर धन्यवाद ज्ञापित किया गया। साथ ही अन्ना की अन्ट सन्ट और बाबा की बकबक पर दमनचक्र चलाने के लिए मन (सोनी) मोहन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा गया कि इस प्रकार के कालाधन और भ्रष्टचार पर अंकुश लगा देने से हमलोगों का कारोबार चौपट हो जाएगा एवं बड़े नेताओं, नौकरशाहों तथा व्यापरियों के ‘‘खून की कमाई’’ लुट जाएगी। 

अन्त में अपने अध्यक्षीय संबोधन में दाउद भाई ने कहा कि अमेरकी ड्रोन हमलों से बचने तथा बाकि जिंदगी ‘‘शांति के साथ’’ बिताने के लिए वह इंडिया में सरेन्डर करेगा तथा सभी लोगों को भी ऐसा ही करना चाहिए। इस समझौते के अनुसार इस कार्य के लिए समय समय पर फतवा जारी करना होगा। बस।
वहीं अलजवाहरी के एक सवाल के जबाब में भाई ने कहा कि उनके लिए एक सेमिनार ‘‘ सम्प्रदायिकता से देश को खतरा’’  का आयोजन दिल्ली के मंतर मैदान में करा देते है शर्त यही होगी की वहां भाजपा और आर एस एस को गरियाना होगा । भाई ने बताया कि गिलानी का दिल्ली वाला सेमिनार उसी ने मैडम से बतिया कर मैनेज करवाया था।

अन्त में सर्व सम्मति से अमेरिका से पंगा नहीं लेते हुए दुनिया में आतंक फैलाने का निर्णय लिया गया एवं अमेरिका के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए पाक के माध्यम से हथियार उपल्बध कराने के लिए धन्यवाद दिया एवं निर्णय लिया गया कि भारत के सरेन्डर करने की जानकारी हर किसी को ईमेल, एसएमएस, मोबाइल सहित अन्य माध्यमों से देना है और जिनके नाम की प्राथमिकी उधर के थाने में दर्ज नहीं है उनके नाम की प्राथमिक थाने मंे दर्ज कराने के लिए प्रति आतंकी 500 रू. का नजराना अग्रिम जमा कराना होगा।

06 जून 2011

मुझे ऐसा क्यों लगता है।


रामलीला मैदान में
देख कर रावण लीला
मुझे ऐसा क्यो लगने लगा
जैसे
मैंने ही अपने हाथ में लेकर डंडा
चला दिया हो शहीद की उस बीबी पर
जिसने अपने पति के प्राण देश पर न्योछावर कर भी
रूकना नहीं सीखा
और
आ गई रामलीला मैदान
प्रतिकार करने ?

और मैं घर में टीवी से चिपका
दिन भर
सबकुछ
देखता रहा
बस...

मुझे ऐसा क्यों लगता है कि जिस हाथ ने उसके कपड़े फाड़े
वह मेरे ही हाथ थे
जिससे
प्रजातंत्र का राजा
आज अजानबाहु बन गया है?

पर
वह देह
जिसे ढकने के लिए
विधवा
दूसरों से मांग रही थी एक कमीज
वह तो
भारत मां की देह थी?

मुझे ऐसा क्यों लगता है
जैसे
बाबा की आवाज मुझे शर्मींदा कर रही है
और जब अन्ना निराश होते है
तो आत्मग्लानी से मेरा मन भर जाता है..

मुझे ऐसा क्यों लगता है
जैसे
लहू मेरे ही हाथ में लगी है
और मैं
रगड़ रगड़
साफ कर रहा हूं
पर
यह तो धुलता ही नहीं

पर यह क्या
कैसा है इस लहू कर रंग
.
.
तिरंगा....