25 मई 2011

कन्या भ्रुण हत्या ----यह तो नायाब तरीका है?


जिसको देखों वही दूसरे को कोस रहा है। कोई नेताओं को तो कोई भ्रष्ट अधिकारियों को। आज एक संस्था ने कन्या भ्रुण हत्या का सर्वो दिया जिसके अनुसार जिसके पास एक बेटी है वह तब तक भ्रुण हत्या करवाता रहता है जब तक बेटा नहीं हो...

सवाल यह नहीं है कि समाज में यह सब क्यों हो रहा है। मेरे मन तो जो सवाल अन्ना के समय से ही उठ रहा है वह 

यह है कि जितने लोग दूसरे को कोस रहे है क्या उतने लोग भी ईमानदारी से ईमानदार है?

जो लोग कन्या भ्रुण हत्या को लेकर बारबार सवाल उठा रहें है उनमें से कितने है जो दहेज नहीं लेगे.....? या नहीं लिये होगें?

नेताओं को लेकर हमेशा सवाल खड़ा करने वाले समाज में हम अपनी तरफ क्यों नहीं देखते?

ताजा उदाहरण बाबा रामदेव की अनशन का है....बाबा जी अनशन करेगें पर उनके स्वाभिमान संध से जुड़े जिन तीन लोगों को मैं जानता हूं उनमें से एक चिकित्सका के पास प्रति दिन एक एक दर्जन भ्रुण हत्या होती है, दूसरे अब्बल दर्जे का करप्ट पत्रकार है और तीसरा भ्रष्ट बकील ? 

जय हो

दूसरे को बुरा कह कर हम अच्छा हो जाएगें...........यह तो नायाब तरीका है?

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