27 फ़रवरी 2010

क्या आपको पता है कि आतंकबाद क्या है.........

बड़ी खुशी हुई यह जानकर की पाकिस्तानी विदेश सचिव ने स्वीकार कर लिया कि आतंकवाद के जनक वहीं हैं। चौंकिए नहीं। सच में स्वीकार कर लिया। पाकिस्तानी विदेश सचिव ने साफ कहा कि भारत मुझे आतंकबाद पर लेक्चर न दे मुझे पता है कि आतंकबाद क्या है। विदेश सचिव सलमान बशीर ने भारत के विदेश सचिव निरूपम राव से साफ साफ इसकी स्वीकारोक्ती कर ली। हां अब यह बात भले ही दिगर है कि उनकी स्वीकारोक्ती को भी हम नहीं समझ रहें है और बार बार उन्हें अपने यहां बुला कर समझाने का प्रयास करते है कि भाई जो तुम करवा रहे हो वह आतंकवाद है। 
विदेश सचिव महोदय ने कहा कि लेक्चर न दें हमें पता है। पता कैसे नहीं होगा। आतंकवाद को पालना, प्रशिक्षित करना और फिर आतंक पैदा करने के लिए उसका इस्तेमाल करने वालों को जितना पता होगा भला उतना भारत कैसे जानेगा। सो बशीर साहब ने साफ कहा कि बात करनी हो तो कश्मीर पर करो आतंकबाद में क्या रखा है। आतंकबाद को पालने पोसने में अरबों खर्च करने वालों को समझाना बेबकुफी ही है। मुझे सूचना मिली है कि यह बात जैसे ही अमेरिका के मुखीया ओबामा को कही गई कि पाकिस्तान कह रहा है कि उसे पता है कि आतंकबाद क्या है तो वे चौंके नहीं और बोले यह तो हमें भी पता है तभी तो अरबों डालर का खर्चा हम पाकिस्तान को दे रहें है। हम यह भी चाहते है कि भारत को पाकिस्तान से सिखना चाहिए कि आतंकबाद क्या है और इसलिए बारबार जोर देकर बार्ता की बात कहतें  है।
सबको पता है कि पाकिस्तान को पता है कि आतंकवाद क्या है बस यह बात अपने मनमोहन सिंह को पता नहीं है, सोनीया गांधी को भी पता नहीं है या फिर इनको भी पता है! तभी तो कसाब के उपर प्रति दिन 15 लाख खर्च कर ये मेहमान बनाए हुए है और  संसद पर हमला करने वाले को फांसी की सजा होने पर भी ये उनको मेहमान बनाए हुए है, तभी तो आजमगढ़ जाकर हमारे दिग्गी राजा कहते है कि गिरफ्तार युवक आतंकबादी नहीं, तो क्या बाटला हाउस में मरने वाले इंस्पेक्टर ने तो खुदकुशी की थी, ``देश के लिए मरना आज खुदकुशी ही है´´ लगता है कि सबको पता है कि आतंकबाद क्या है बस नहीं जानते तो आतंकबादी धटनाओं में मरने वाले..............







25 फ़रवरी 2010

किसानों के लिए बने बजट. मंहगाई से भी कोई खुश है!

गांव और किसानों के लिए कभी भारत का बजट बनेगा? कहने को तो कहते है कि भारत कृषि प्रधान देश है पर यहां बजट में प्रधानता हमेशा से बड़े व्यापारियों को दिया जाता है। कोई आवज उठाऐगा? गांव और किसानों की बदहाली आज भी चरम पर है बात सिर्फ लिखने की नहीं है, मैं इससे रोज रूबरू होता हूं। किसानों की हालत का जायजा सरकारी आंकड़ों के हिसाब से चाहे जो हो पर जमीनी सच्चाई कुछ और है। किसानों को मिलने वाला किसान के्रडिट कार्ड का ऋण वास्तविक किसानों को आज भी नहीं मिल रहा है। अरबों की राशि कृषि ऋण का माफ हुआ पर वह ऋण किसानों का था ही नहीं। वह दलालों और तेज तर्रार लोगों की झोली में चला गया। उर्वरक की कालाबाजारी जारी है। उर्वरक किसानों को 30 से 60 प्रतिशत मंहगे मिलते है। सुखा राहत के तौर पर किसानों के लिए सरकार के  द्वारा डीजल अनुदान दिया गया पर यह भी किसान के बजाय मुखीया और पंचायत सेवक की झोली में चला गया। किसान आज भी अपने खेतों में उपजाए गए अनाज का वास्तविक मुल्य नहीं ले पाते। किसानों के अनाज खरीदने के लिए एफसीआई का गोदाम है पर गोदाम में किसान कभी भी अनाज नहीं बेच पाते। वहां भी व्यापारियों को ही प्राथमिकता दी जाती है और जितना अनाज खरीदा जाता है वह फर्जी किसानों के नाम पर और सरकार के अनुदान को अफसर और व्यापारी मिलकर अपनी झोली मे रख लेते है। 
       मंहगाई को लेकर आज भले हाय तौबा हो रही है पर इससे किसानों का भला भी हो सकता है । वस्र्ते किसानों को अनाज का वास्तबिक मुल्य मिल जाए। किसानों को अनाज कम किमत पर बेचनी पड़ती है ताकि उसकी अगली फसल लगायी जा सके और वही अनाज व्यापारियों के गोदामों में जाने के बाद मंहगे हो जाते है। आज जब  किसानों के खेत में आलू उपज रही है तो उसकी कीमत 18 रू0 प्रति पांच किलो है पर आज से एक माह पूर्व यही  आलू 18 रू0 प्रति एक किलों क्यों बिका। मंहगाई की बजह से कहीं के किसानों में खुशहाली भी। इस साल जिन किसानों ने ईख की खेती की उनको भरपूर मुनाफा हुआ और पांच रू0 प्रति किलो बिकने वाला मिठ्ठा किसानों ने 40 रू0 प्रतिकिलो बेचा। इन किसानों के बेटी की शादी इस साल धूमधाम से हो रही है। 
सवाल कई है पर सबसे बड़ा सवाल रही कि क्या किसानों के हित की बात करने वाला आज कोई नहीं है। वोट बैंक राजनीति को लेकर धर्म और जाति के आधार पर नीतियां बनायी जाती है पर किसान से बड़ा वोट बैंक कौन है।








19 फ़रवरी 2010

मुसहर के बच्चे भी पढ़ें, प्रयास कर रहा है एक किशोर

छोटे प्रयास से भी समाज में एक सार्थक बदलाव लाया जा सकता है वशर्ते सही मंशा के साथ साथ चनात्मकता और लगन हो। समाज को कुछ देने की एक छोटी सी कोशिश दिख गई एक दलित वस्ती में जहां एक मानदेय पर नियुक्त टोला सेवक लगन, प्यार और परिश्रम से बच्चों को पढ़ता है। यह जगह है बरबीघा प्रखण्ड का कुतुचक मुसहरी। यहां कोई पदाधिकारी आना भी पसन्द नहीं करेगें क्योंकि यहां एक ऐसा विद्यालय है जहां बच्चों गन्दे, मैले-कुचैले कपड़े और नंग-धड़ग पढ़ना लिखना सीख रहे हैं। यहां महादलितों के बच्चो को पढ़ाने या यूं कहें के पढ़ाई के प्रति महादलितों के बच्चों को जगरूक करने का सार्थक और सकारात्मक पहल की जा रही है। एक तरफ नगर पंचायत के डीएवी मध्य विद्यालय में 16 शिक्षक है तथा पांच कमरे में यहां कक्षा आठ तक पढ़ाई होती पर कभी भी इस विद्यालय में सभी कक्षाओं में शिक्षक नज़र नहीं आते। ऐसा ही नजारा दिखा गुरूवार जब विद्यालय के महज एक कक्षा में शिक्षक थे बाकि कक्षाओं में बच्चे हंगांमा करते दिखे तो दूसरी तरफ कुतुचक मुसहर टोली के उत्थान केन्द्र में करीब दो दर्जन के आस पास बच्चों को नामांकन है और यहां शिक्षण का कार्य करते है शैलेन्द्र मांझी जो इसी गांव का एक किशोर है। शैलेन्द्र मांझी रोज बच्चों को घरों से निकाल कर उसे खुले आसमान के नीचे फटे पुराने बेरों पर बिठाता है और बड़े प्यार से बच्चों को पढ़ता है। शैलेन्द्र मांझी के द्वारा यह काम प्रति दिन नियमित रूप से किया जाता है और इसी का परिणाम है कि दो दर्जन के आस पास बच्चे यहां बैठकर पढ़ना लिखना सीखते है। किसी बच्चें के पास सीलेट नहीं है तो किसी के पास किताब नहीं, पर फिर भी अभाव में ही यह काम किया जा रहा है। बच्चों में भी पढ़ने की ललक यहां देखी जाती है। इस उत्थान केन्द्र पर जाने के बाद सभी बच्चे पहले सहम जाते है और उन्हें लगता है कि पता नहीं कौन जांचने वाला आ गया और तभी आस पास के घरों से महिलाऐं निकल आती है तथा बिना पूछे ही सफाई देने लगती है कि यहां रोज पढ़ाई होती है और बच्चे पढ़ना लिखना सीख रहे है। महिलाओं को लगता है कि पता नहीं कोई स्कूल बन्द कराने वाला न आ जायें। मुसहर जाति की इन महिलाओं को भी लगता है कि उनका भी बच्चा पढ़े और इसीलिए उनमें भी एक ललक नज़र आती है। खास बात यह कि शैलेन्द्र मांझी इस विद्यालय के बारे में कुछ बता भी नहीं पाता पर उसी हैण्डराइटींग देख दंग रह जाना पड़ता है साफ और स्पष्ट। वह अपने मुसहर समाज में एक मात्र पढ़ा लिखा लड़का है और चाहता है कि उसका भी समाज आगे बढ़े और इसी को लेकर वह एक छोटा सा प्रयास कर रहा है सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से। सर्वशिक्षा अभियान के तहत भले ही लोग रूपयों का बारा न्यारा करने में लगे हो पर कहीं कोई शैलेन्द्र मांझी है जो इस अंधेरे में भी चिराग जला रहा है और किशोर शैलेन्द्र मांझी उन शिक्षको को लजा देने के लिए काफी है जिन्हें सरकार के द्वारा 20000 रू0 वेतन तो दिया जाता है पर वह कभी कक्षा में पढ़ाई कराते नज़र नहीं आते।

17 फ़रवरी 2010

दृष्टिहीनता नहीं रोक सकी सपनों की उड़ान

``खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तहरीर से पहले, खुदा बन्दों से खुद पुछे
बता तेरी रजा क्या है´´ 'शायर के इस उक्ती का चरितार्थ करता है दृष्टिहीन
युवक रामाषीश। दृष्टिहीन युवक रामाषीश दृष्टिहीन हो कर भी समाज के लिए
प्रेरणाश्रोत बना हुआ है और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जजबा रखता है।
खासकर अपने दृष्टिहीन समाज के लिए। दृष्टिहीन रामाषीश शेखपुरा जिला के
घाटकुसुम्भा प्रखण्ड के डीह कुसुम्भा गांव का निवासी है तथा पुरैना मध्य
विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत है। उनकी नियुक्ति विकलांगों के
मिले आरक्षण के आधार पर किया गया था। शुद्व हिन्दी में उच्चारण करने वाले
रामाषीश बतातें है कि उनका बचपन गांव में ही गरीबी से संधर्ष करते हुए
बीता है और उन्होंने अपनी पढ़ाई ब्रेल लिपि के द्वारा पटना के बलाइण्ड
विद्यालय से मैट्रिक तथा दिल्ली के रानी झंासी विद्यालय पहारगंज से इण्टर
की पुरी की है तथा अपने समाज के लोगों को भी शिक्षित करना चाहतें है।
रामाषीश ब्रेल लिपि के द्वारा रामायण, महाभारत, कुरान और बाइबिल का भी
अध्ययन किया है तथा वे रामायण की चौपाई का पाठ भी करतें है। रामाषीश जिले
में दृष्टिहीनों के लिए आवासीय विद्यालय की मांग जिलाधिकारी से करते हुए
कहते हैं कि वे अपने दृष्टिहीन समाज के लोगों के लिए कुछ करना चाहतें है
और यदि उन्हें सुविधा मिले तो ऐसा कर सकतें है। उनके अनुसार अंधा होना
भले ही कमजोरी है पर वे किसी से कम नहीं है तथा वे भी सारे कायोंZ को
पुरा कर सकतें है और यदि तकनिक उपल्बध करा दी जाए तो जहाज भी उड़ा सकतें
है। उनके अनुसार मेहनत ही ईश्वर का दूसरा रूप है तथा मेहनता से किसी भी
तरह की सफलता पाई जा सकती है। दृष्टिहीन युवक रामाषीश अपना भोजन स्वयं
बनातें हैं तथा अपने सारे कार्योंं को भी वे स्वयं निवटातें है। शतरंज और
क्रिकेट से शौकिन दृष्टिहीन युवक रामाषीश दिल्ली की अपनी पढ़ाई आर्थिक
तंगी की वजह से मोमबत्ती बेच कर पुरी की है तथा आज शिक्षक होकर भी इसी
आर्थिक तंगी से जुझ रहें है।
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16 फ़रवरी 2010

सुशासन का खुल रहा पोल, 9 लाख की लूट पुलिस की निष्क्रीयता व्यावसाईयों से भयादोहन कर रूपया बसुलने का पुलिस पर आरोप

शेखपुरा के बरबीघा में दिनदहाड़े हथियार के बल एसबीआई बैंक परिसर से 9
लाख की लूट काण्ड में पुलिस ने अहम सुराग मिलने का दाबा किया है।
घटनास्थल पर लुटेरे की मोटरसाईकिल इस प्रकरण में अपराधियों तक पहूंचने का
मुख्य सुत्र बना और बरामद मोटरसाईकिल मालदह निवासी बबन सिंह के पुत्र
विकास कुमार का निकाल। पुलिस विकास कुमार को इस लूट काण्ड का मुख्य सरगना
मान रही है। पुलिस सुत्रों के अनुसार विकास कुमार के नाम से ही इस
मोटरसाईकिल का ऑनर बुक है तथा इस तथ्य के आधार पर और अन्य सुत्रों से
मिली जानकारी के आधार पर विकास कुमार ही इसका मुख्य सरगना है। हलांकि
सुत्रों के अनुसार इस मामले में विकास कुमार के साथ मेहूस, लोदीपुर तथा
भरदथी के अपराधी भी शामील है। मालदह गांव में पुलिस ने रात में ही
छापेमारी कर चुकी है पर विकास कुमार भागने में सफल रहा है। बताया जाता
है कि विकास कुमार गांव में अवैध शराब बेचने का धंधा करता है जिसको लेकर
ग्रामीणों के द्वारा काफी विरोध भी किया गया पर पुलिस के संरक्षण में
विकास कुमार सरेआम गांव में ही देशी-विदेशी शराब बेचने का धंधा करता है
तथा पुलिस से उसके सम्बंध जग जाहीर है।
उधर बरबीघा में हो रहे लगातार लूट और अपराध की अन्य धटनाओं के देखते हुए
यहां के व्यापारियों एवं अन्य लोगों में पुलिस को लेकर आक्रोश देखा जा
रहा है। लोग इस बात से ज्यादा दुखी नज़र आ रहे है कि लगातार हो रही चोरी
और लूट की धटना में पुलिस आज तक एक भी वास्तविक अपराधी को पकड़ने में सफल
नहीं रही है जबकि पुलिस के द्वारा निर्दोश को पकड़ कर नज़राना बसूला जा
रहा है और इतना ही नहीं ग्रामीणों के द्वारा पकड़ कर पुलिस के हवाले किए
जाने पर चोर को छोड़ दिया जा रहा है। व्यापारियों को पुलिस के द्वारा
पकड़ का भयादोहन किये जाने का मामला ही है कि फैजाबाद निवासी मो. महफुज
नामक किराना व्यापारी को रात में पुलिस यह कह कर जीप पर बैठा थाने ले
जाती है कि आपसे कुछ काम है और थाना जाने के बाद उसे झुठे चोरी के
मुकदमें में फंसाने की धमकी देकर भयादोहन किया जाता है और आधी रात को
10000 रू0 बसुल कर छोड़ दिया जाता है। पुलिस के द्वारा इस तरह नज़राना
बसुली का काम प्रतिदिन किया जाता है।
पुलिस की नाकामी का ही नामुना है कि पोस्ट आफिस के पास से सारे की एक
महिला से डेढ़ लाख ही लूट का आज तक उदभेदन नहीं किया गया है जबकि इस
मामले मे पुलिस के द्वारा निर्दोष दुकानदार लक्ष्मी कुमार एवं बब्लू
कुमार को पकड़ लिया गया जिसके विरोध में बरबीघा बाजार को बन्द कर
व्यापारियों ने हंगाम किया जिसके बाद उसे छोड़ गया। दुसरी बड़ी चोरी की
घटना 31 दिसम्बर की रात में पत्रकार सह अधिवक्ता रामजनम सिंह के घर हुई
जिसमें चोरों ने 7 लाख की संपत्ति चुरा ली पर इस मामले का भी आज तक
उदभेदन नहीं किया गया जबकि पुलिस ने इस मामले का उदभेदन कर लेने का दाबा
मिडिया में किया था। इस एक माह के बाद ही थाना परिसर से सटे बैंक परिसर
में हुए लूट की इस घटना में पुलिस को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
लोगों की माने तो थाना से सटे बैंक के पास हुए इस घटना में अपराधी का
नहीं पकड़ा जाना तथा विलंब से पुलिस का पहूंचना सवाल के धेरे में है।
बताया जाता है कि लूट के बाद एक अपराधी पैदल ही अंचल कार्यालय की ओर भागे
जबकि उसी तरफ सैप के जवानों का अवास भी है।
बरबीघा में बढ़ते अपराध को लेकर यहां के लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है
तथा यह कभी भी आन्दोलन का रूप ले सकता है। इसको लेकर जहां विपक्ष के लोग
सुशासन का सच बता रहे है तो सत्ता पक्ष के लोग सुशासन को बदनाम करने की
साजिश। बात चाहे जो हो पर यदि अपराध पर अंकुश नहीं लगा पर बरबीघावाशियों
का गुस्सा कभी भी फुट सकता है तथा युवा मोर्चा द्वारा इसकी तैयारी की जा
रही है।

15 फ़रवरी 2010

थाना से सटे बैंक की शाखा में बेखौफ अपराधियों ने सरे आम 9 लाख लूटा

शेखपुरा-जिले के बरबीघा थाना क्षेत्र के एसबीआई बैंक में रूपया जमा करने
के लिए जा रहे पेट्रोल पम्प व्यावसाई से 9 लाख रू0 अपराधियों ने लूट
लिया। लूट की इस घटना को तीन की संख्या में हथियारबन्द अपाराधियों ने
अंजाम दिया। नए साल के दूसरे माह अपराधियों ने बेखौफ लूट की इस घटना को
अंजाम दिया है। इससे पूर्व एक पत्रकार सह अधिवक्ता के घर से 10 लाख की
लूट की घटना को अंजाम दिया गया था। इस संबध्ंा में पम्प के मैनेजर अशोक
सिंह ने बताया कि वे तथा पम्प के मालिक रामबाबू दोनों मारूती कार से 9
लाख रू0 थैले में रख कर बैंक में जमा करने के लिए जा रहे थे और इसी क्रम
में बैक के मुख्य गेट पर जैसे ही वे लोग मारूती से उतरने लगे तो एक आदमी
उनके थैले में लटक गया तथा एक अपराधी मालीक को हथियार के बल पर कब्जे में
ले लिया। इसी बीच अपराधी थैला छिन कर भागने लगे तथा उनका एक साथी
घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर मोटरसाईकिल चालू रखे हुए थे पर भागने के क्रम
में लोगों के द्वारा खदेरे जाने पर अपारधी लरखड़ा गए और तीनों मोटरसाईकिल
से गिर गए इसके बाद पैदल ही भागने लगे। लोगों के द्वारा जब अपराधी का
पीछा किया गया तो उनके द्वारा कई चक्र गोलियां चलाई। थाने से महज थोड़ी
दूरी पर घटी इस घटना में पुलिस आधे घंटे के बाद घटनास्थल पर पहूंची।
समाचार भेजे जाने तक पुलिस के द्वारा अपराधियों के भागने के दिशा में
खेज-बीन की जा रही है।
शेखपुरा जिले में लगातार हो रहे आपराधिक धटनाओं से एक बार फिर अपराध की
त्रासदी झेल चुके जिले के लोगों को सहमा दिया है। दो दिन पूर्व ही राजद
नेता और पूर्व मुखीया की अपराधियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी तथा इस
मामले में पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है तथा पत्रकार के घर हुई
चोरी के मामले में पुलिस अपराधियों का सुराग लगाने का दबा तो घटना के तीन
दिन बाद ही कर चुकी थी पर आज तक अपराधी को नहीं पकड़ा जा सका है।

अजब प्रेम की गजब कहानी

शेखपुरा-अजब-प्रेम की गजब कहानी, कुछ ऐसा माजरा यहां देखने को मिल रहा
है।. जिला मुख्यालय के गिरहीन्डा मोहल्ले में रहने वालो अभिराम और सरोजनी
की कहानी यही है। अजब गजब। आज से पच्चीस साल पहले दोनों ने प्रेम किया।
एक बस चालक तो एक ग्रामीण महिला। दोना शादीशुदा। पर प्रेम इन चीजों को
कहां मानता है। अजब प्रेम की गजब कहानी यह कि समाज के प्रतिरोध के बाद
दोनों ने शादी किया पर उससे पहले ही प्रेम ने त्याग की मिशाल कायम की।
सरोजनी ने अपने पति पर दबाब डाल कर पहले नसबन्दी करा दी ताकि अभिराम का
पहला परिवार नहीं बिखरे। अभिराम पुर्व से शादीशुदा थे और तीन बच्चों के
पिता भी पर सरोजनी नहीं मानी और जबकि सरोजनी की भी पहले से ंशादी हो चुकी
थी और वह भी एक प्रोफेसर के साथ। सरोजनी ने सुख को त्याग कर एक झोपड़ी
में रहना कबुल किया और इसे निभाया भी। गजब कहानी यह भी कि सरोजनी अपने
प्रेमी के साथ आज भी हमेशा रहना चाहती है। आज भी अभिराम जहां जाते है वह
साथ रहती है यहां तक कि बस से कहीं जाते है तब भी साथ रहती है और यदि
गैराज में बस की मरम्मती हो रही हो तो वहां भी सरोजनी अपने पति के साथ
रहती है। पति का साथ आज भी सरोजनी नहीं छोड़ना चाहती है। इसकी चर्चा जिले
में हर जगह है। और अजब प्रेम की गजब यह कहानी पच्चीस साल से अनवरत चल रहा
है।

14 फ़रवरी 2010

वेलेन्टाइन डे -प्रेमियों का एक संगठन होना ही चाहिए

वेलेन्टाइन डे -प्रेमियों का एक संगठन होना ही चाहिए
बहुत दुख होता है तब, जब कहीं कोई आज भी प्रेमियों के साथ आदिम युग सा
बर्बरता करता है। तब और भी दुख होता है जब कोई इसके लिए आवाज तक उठाने
वाला नहीं होता है। प्रेम एक नैसगिZक सम्बंध है और इसके बारे मे बहुत बार
बहुत कुछ लिखा जा चुका है, मैं इस उपदेश में नहीं जाना चाहता। मैं तो यह
चाहता हूं प्रेमियों के लिए एक संगठन होना ही चाहिए। प्रेमियों के साथ आज
भी पुलिसिया दुव्र्यवहार चरम पर होता है, कानून ताक पर रखे जाते है।
पैसों का खेल होता है। समाज पुलिस से एक कदम आगे रहता है। बहुत कुछ कहा
जा सकता है अभी नहीं, अभी तो बस वेलेन्टाइन डे पर प्रेमियों और प्रेम से
सहानुभूति रखने वालों से एक अपील कि प्रेमियों का एक संगठन बनना चाहिए।
नहीं मेरा उददेश्य चिरकुट प्रेमियों को संरक्षित करना नहीं। मेरा मन्तव्य
यह, कि नैसगिZक प्रेम पर आज कथित आधुनिक समाज में आदिम बर्बरता नहीं होनी
चाहिए। प्रेमियों के लिए कानून में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। प्रेमी
जोड़ों को बलात्कारी और अपहर्ता बनाया जाता है यही है कानून। कहीं समाज
के पण्डित नैतिकता के नाम पर जुल्म करते है और स्वयं सजा सुनाते है।
भाई भिखाड़ियों के लिए अवाज उठाने वाला संगठन है प्रमियों का क्यों
नहीं। वेलेन्टाइन पर आज इसकी पहल होनी चाहिए तरीका और सिद्वान्त चाहे जो
हो पर संगठन बने और वही तय करे...............

13 फ़रवरी 2010

शेखपुरा पहाड़ों के बर्चस्व को लेकर राजद नेता तथा पूर्व मुखीया विजेन्द्र यादव की हत्या

और आखिर कर शेखपुरा पहाड़ों के बर्चस्व को लेकर राजद नेता तथा पूर्व
मुखीया विजेन्द्र यादव की हत्या कर दी गई। सरे आम दिन दहाड़े यह हत्या
विजेन्द्र यादव के गांव बरूई से सटे उनके पत्थर व्यायावसाई के कार्यालय
के पास की गई। विजेन्द्र यादव अपने घर से जैसे ही अपने कार्यालय पहूंचे
ही थे कि पूर्व से ही घात लगाये अपराधियों ने गोली मार दी। तीन की संख्या
में मोटरसाईकिल सवार अपराधियों ने पहले विजेन्द्र यादव को पिछे से पीठ
में गोली मारी उसके बाद गिरने पर माथे मे गोली मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों
ने बताया कि अपराधियों में से एक मोटरसाईकिल पूर्व से चालू रखे हुए था
तथा गोली मारने के बाद मोटरसाईकिल पर सवार होकर भाग गए। मृतक विजेन्द्र
यादव की छवि आपराधिक रही है तथा पचना और बरूई क्षेेत्र के पहाड़ पर उनका
दबदबा चलता था तथा उनकी मर्जी के खिलाफ कोई इस क्षेत्र के पहाड़ पर वैध
रूप से भी खनन का काम नहीं कर सकता था। पहाड़ों पर कब्जे को लेकर कई बाद
विजेन्द्र यादव के द्वारा गोलीबारी की कई और बड़ी बड़ी कंपनियों को भी
खदेड़ दिया गया था। ंशेखपुरा पहाड़ पर बर्चस्व को लेकर पहले भी कई बार
गोलीबारी हो चूकी है पर पुलिस की निष्क्रीयता ने अन्तत: विजेन्द्र यादव
की हत्या की परिणति करा दी।

तहलका ने झकझोर दिया..

तहलका ने झकझोर दिया..
कुछ बात है जो कभी कभी उद्वेलित कर देती हैं, खास यदि कोई मिडिया को लेकर
बात करे तो बात ही क्या है। निराशा के नीरब अंधेरी रात में आज भी कोई है
जो चराग जला रहा है शायद तहलका उसमें एक है। खास कर मिडिया को लेकर आनन्द
प्रधान का आलेख झकझोर गया। खास कर आनन्द प्रधान कि यह बात कि टैबलॉयड
अखबारों और चैनलों के पाठक-दशZक क्वालिटी अखबारों-चैनलों से कई गुन रहे
हैं लेकिन जनमत बनाने का और प्रभाव के मामले में टैबलॉयड, क्वालिटी
अखबारों-चैनलों के आगे कहीं नहीं ठहरते........
आइए आप भी इसे पढ़ईए-
http://www.tehelkahindi.com/stambh/diggajdeergha/forum/501.html

12 फ़रवरी 2010

शाबस मुम्बई, मेंमिया रहे थे तालीबानी

आखिरकर मुम्बई ने दिखा दिया कि यहां हीरो रहते है। शिवसैनिक मेंमिया रहे
थे। पुलिस की लाठी चटक रही थी और सबसे बड़ी बात कि कबीर बेदी सहित अन्य
कलाकार भी सड़कों पर उतर आये। शाबस मुम्बई। खास कर शाहरूख खान के
समर्थकों ने भी सड़क पर उतर कर शिवसैनिकों के गुण्डागदीZ का विरोध किया।
एक और शाबसी की बात कि भारत बचाओं संगठन ने भी शिवसेना मुख्यालय पर
प्रदशZन कर कल ही जता दिया कि अब तालीबानी की नहीं चलेगा. भैया यह भारत
है पाकिस्तान नहीं। और फिर देश को बंटने की बात करने वालों को विरोध इसी
तरह होना चाहिए। मुम्बई सरकार ने भी हिम्मत दिखाई पर यह राज ठाकरे के साथ
भी दिखाओं भैया यहां राजनीति मत करो, देश का बचाओं राजनीति बच जाएगी। देश
रहेगा तभी राजनीति रहेगी।
अब वेेलेन्टाइन डे पर प्रमोद मुतालिकों की मुख पर कालिख पोतने की तैयारी की जाय..।

11 फ़रवरी 2010

वेलेन्टाइन डे पर गुण्डों का कवरेज बन्द करे मिडिया

वेलेन्टाइन डे पर गुण्डागदीZ की तैयारी लाठी की पूजा के साथ ही हो रही
है। वेलेन्टाइन डे प्रेम दिवस के रूप में मनाया जाता है पर आज यह कुछ
लोगों के प्रेम के प्रदशZन का दिवस रह गया है और मैं इससे भी सहमत नहीं,
पर इसके आड़ में कभी बजरंग दल तो कभी श्रीराम सेना अपनी कुंठित राजनीतिक
महत्वाकांझा को चमकाने का जरीया बना लिया है। इन गुण्डागदीZ करने वाले
संगठनों का मकसद वेलेन्टाइन डे का विरोध कम और मिडिया का कवरेज पाने की
मंशा अधिक होती है तथा इनकी इस मंशा को पूरा करने में मिडिया प्रत्यक्ष
आप्रत्यक्ष रूप से उनका साथ देती है। मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता कि
वेलेन्टाइन डे पर प्रेम का प्रदशZन उचित है या अनुचित। क्योंकि यह एक
विवादित विषय बन गया है और मेरा मानना है कि प्रेम प्रदशZन की चीज नहीं
है। सच्चे प्रेम को प्रदशZन की जरूरत भी नहीं होती।
एक बार फिर मिडिया के भाइयों से अपील की कृपा कर आप गुण्डागदीZ को कवर
करना बन्द करें तो गुण्डागदीZ अपने आप बन्द हो जाएगी।

प्रेम

प्रेम

समर्पण का एक अन्तहीन सिलसिला

आशाओं

आकांक्षाओं

और भविष्य के सपनों को तिरोहित कर

पाना एक एहसास

और तलाशना उसी में अपनी जिन्दगी......

07 फ़रवरी 2010

घर में आग लगने से बच्ची की मौत तीन जख्मी

शेखपुरा जिले के शेखोपुरसराय मे आज एक हृदय विदारक घटना सामने आयी जिसमें
एक बच्ची अपने ही घर में बुरी तरह जल कर मर गई। कक्षा दो की छात्रा दस
साल की इन्दी कुमारी की मौत अपने ही घर में लगी आग से हो गई। घटना शनिवार
की रात में उस समय घटी जब सुगीया-दारोगीबीघा में लालों पासवान, ललबतिया
देवी तथा उनके पैत्र 15 साल के सिंकदर कुमार एवं पोती 10 साल की इन्दी
कुमार सोयी हुई थी और घर में केरोसीन से जलने वाला दीया जल रहा था। घर
में दरवाजा नहीं होने की वजह से कुत्ते के द्वारा जलता हुआ दीया गिरा
दिया गया और देखते ही देखते पूरा घर जलने लगा। इस घटना में लालो पासवान
उनकी पत्नी ललवतिया देवी तथा पोता सिंकदर भी बुरी तरह जल गए जबकि पोती की
मौत वहीं जलने की वजह से हो गई।
इस घटना में सिंकदर कुमार ने साहस का परिचय देतेे हुए आग में जलने से
अपने दादा और दादी को बचाया और जब वह अपनी बहन को बचाने के लिए जा रही
रहा था कि पूपी झोपड़ी गिर पड़ी और चाह कर भी वह अपनी बहन को नहीं बचा
सका। सिंकदर कहता है कि जैसे ही उसके शरीर में आग का एहसास हुआ तो वह जग
गया और देखा कि उसके घर में आग लग गई तो वह सबसे पहले अपने दादा को बगल
से जगा कर और लगभग खिंचता हुआ घर से निकाला तथा उसके बाद अपनी दादी को भी
निकाला पर वह अपनी बहन को निकालना चाह ही रहा था कि झोपड़ी गिर गई और वह
विवश हो गया।
घटना के बाद बहुत बिलंब से जहां पुलिस घटना स्थल पर पहूंची वही बुरी तरह
जले लालो पासवान का प्राथमिक उपचार भी घटना के बारह घंटे बीत जाने के
बाद भी नहीं हो सका था। ऐंबुलेंस जहां सुबह 9 बजे आयी वही प्रशासन के लोग
भी 10 बजे पहूंचे। हलांकि प्रशासनीक स्तर पर पिड़ित परिवार को 100 किलो
अनाज तथा 2200 रू0 राहत राशि के रूप में दी गई है, तथा मुखीया के द्वारा
1500 कबीर अन्तेष्ठी की राशि दी गई।
इधर घटना का एक पहलू यह भी कि मृतक के माता पिता बिहार से पलायन कर दुसरे
राज्य में कमाने के लिए गए हुए है तथा यहां बच्चों को पढ़ने के लिए छोड़
गए थे। मृतक इन्दी देवी के साथ उसका किताब भी जल कर राख हो गया।

03 फ़रवरी 2010

इस्लामी बैंक- देश को तोड़ने का कांग्रेस की साजीश।

देश को तोड़ने की साजीश की एक और कांग्रेसी कोशिश सरकार के द्वारा किया
जा रहा है। वैसे तो मुस्लीम तुष्टीकरण ही आज सेकुलरिज्म है पर यह इस हद
तक बढ़ता जा रहा है कि अब देश को तोड़ने की दिशा में बढ़ रहा है। राज्य
सभा सांसद बलबीर पुंज ने यह मुद्दा उठाया है दैनिक जागरण के माध्यम से
देखें -http://in.jagran.yahoo.com/news/opinion/general/6_3_6147629.html
मैं सोचता हूं कि देश में देशप्रेम की भावना से प्ररित हो कर आज सरकार
काम नहीं करती। खास कर कांग्रेसी सरकार। जबसे मंहगाई के बाद भी सत्ता की
डोर भारत की जनता ने कांग्रेस के हाथ मे थमा दी है तब से कांग्रेस की
सरकार मनमाने ढ़ग से कार्य कर रही है ऐसे जैसे उसे देश की जनता की कोई
परवाह हीं नहीं हो। एक नहीं कई कई उदाहरण है जिसमें अफजल गुरू को फांसी
नहीं दिया जाना, कसाब को मेहमान बना कर जेल मे वीआईपी सुविधा देना, राज
ठाकरे को बढ़ावा देने की साजीश करना, मंहगाई से मुंह मोड़ना आदि। पर
इस्लामी बैंक की परिकल्पना सरकार की वह साजीश है जिससे देश टूटेगा।
इस्लाम के शरीयत कानून में कई चीजों पर पाबन्दी है। यह शरीयत कटरपन्थियों
का कानून है। आज जब हम विकास की बात करते है तो वहां शरीयत का कोई स्थान
नहीं पर वोट बैंक की राजनीतिक लोभ में हम यह करते है।
यह तो वही बात हो गई कि जैसे इस्लामपरस्त लोगों ने अलग देश की मांग की
हमने मान ली, आज नतीजा सामने है। इस्लामी बैंक बना रहें है तब फिर इस्लाम
के लिए सभी जगह अलग स्कूल-कॉलेज की मांग उठेगी। इस्लामी अस्पताल की मांग
उठेगी। इस्लाम रेल और जहाज की मांग उठेगी और शरीयत के भाई इसे उचित
समझेगें तो इस्लामी मयखाने की मांग भी उठाऐगें। क्योंकि मेेरे कई ऐसे
मित्र हैं जो शराब तो पीते है पर नमाज अदा करना नहीं भूलते। शरीयत कानून
को मैं ज्यादा नहीं जानता पर मुझे याद है अरब देश में आज से कुछ साल पहले
भीषण गर्मी से परेशान एक बुकाZनशीं युवती से जब गर्मी बर्दास्त नहीं हुई
तो उसने बुकाZ बीच चौराहे पर थोड़ा सा उघार कर सांस लेने की कोशिश की थी
और इसकी सजा उसे चौराहे पर ही पत्थर से मार मार कर मारने की मिली। हमारे
देश में भी शरीयत का यह कानून लागू की जाएगी क्योंकि आखिर सवाल वोट का है
देश का नहीं। शरीयत के भाईयों के लिए जनाब शायर जाहीद की यह शायरी पेश
है-``जाहीद शराब पीने दे मस्जीद में बैठ कर, या वे जगह बता दे जहां पर
खुदा न हो´´

02 फ़रवरी 2010

एहसास

खिला गुलाब प्रियतम कि तुम हंसी हो,
सुबह की चादर के सिलवटों में तुम बसी हो।
सूरज की लालीमा है कि है तेरे अधरों का अक्श,
निशा की कालिमा है कि है तेरे गेसूओं का नक्श।
अस्ताचलस्त अरूण है कि तेरी निन्द से बोझिल आंखें,
निशा का आगमन है कि तुमने समेट ली अपनी बांहें।
यह हवा की सरगोशी है कि है तुम्हारी हलचल,
तुम्हारी पाजेब खनकी है कि झरनों की है कलकल।
लिपट कर तुम मेरी आगोश में शर्माई
कि मैने लाजवन्ती को छू लिया,
सिमट कर तुम मेरी आगोश में छुपी,
कि चान्द को बादल में छूपा लिया।
महकी जुही कि तेरी गेसुओं की महक है,
बजी सितार की तेरी चुड़ियों की खनक है।

01 फ़रवरी 2010

कांग्रेस के युवराज को साइड नहीं देने पर ट्रक चालक की पिटाई, युवाराज का बिहार में जमकर हुआ विरोध

कांग्रेस के कथित युवराज राहुल गांधी के बिहार दौरे में अमानवीय दृश्य
सामने आय। मामला किशनगंज का है। राहुल गांधी का काफील पटना लौट रहा था की
तभी रास्ते में एक ट्रक चालक ने साइड देने में बिंलब कर दिया और इसके बाद
उनके सुरक्षा में चल रहे एसपीजी के जवानों ने ट्रक चालक को बुरी तरह पीट
दिया। चालक के जमकर की गई पीटाई के बाद पुलिस ने चालक को ही गिरफ्तार कर
लिया। इस घटना से गुस्साए लोगों ने किशनगंज राष्ट्रीय उच्च मार्ग 31 को
जाम कर दिया है।
उधर बिहार ने एक बार फिर दिखा दिया कि बिहार के लोग जागरूक है। बिहार
में जहां दरभंगा में राहुल गांधी की सभा में युवाओं ने मंहगाई के सवाल पर
उन्हें घेर लिया वहीं पटना में मुस्लीम समुदाय के लोगों ने काला झण्डा
लगा कर राहुल गांधी का विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस मुस्लमानों के साथ
दोहरा वर्ताव कर रहा है।

ग्रामीण बैंक शेखोपुर में लाखों का घोटाला, बाप किसान और बेटा बटाइदार

बिहार क्षेत्रिये ग्रामीण बैंक शेखोपुरसराय की शाखा वानगी है किस तरह
नज़राने के लिए नियम और कानून को जेब में रख लिया जाता है। इस बैंक के
ंशाखा प्रबंधक के द्वारा भी नियम और कानून को जेब में रख कर मनचाहे लोगों
को ऋण दिया। इसकी एक झलक देखे। मनोज कुमार ग्राम अंबारी का किसान केडिड
कार्ड खाता संख्या 383 में एक तरफ इन्हें किसान का लाभ दिया गया जबकि एक
साल पूर्व मनोज कुमार को खाता संख्या 02/08 के माध्यम से 150000 का लाभ
व्यापारी के रूप में सीसी खाता का दिया जा चूका था। मनोज कुमार से सीसी
करने के नाम पर 45000 का फिक्सड डिपोजिट करने के लिए कहा गया और यह राशि
भी मनोज कुमार के द्वारा दिया गया पर आज तक इस राशि का कोई अता पता नहीं।
जब मनोज कुमार इसकी खोज खबर लेने का प्रयास किया तो शाखा प्रबंधक नाराज
हो गए तथा उनके उपर मुकदमा कर दिया। एक और उदाहरण अरूण कुमार ग्राम
अंबारी। सरकार घोषणाओं के आधार पर लगाए गए शिविर में इनको किसान केडीड
कार्ड खाता संख्या 480/09 31 जनवरी 2009 को यह कह कर दे दिया गया कि उनका
केसीसी ऋण स्वीकृत कर लिया गया। अरूण कुमार को ंशाखा प्रबंधक ने बताया कि
3 ऐकड़ जमीन के आधार पर 38000 का ऋण स्वीकृत किया गया। जब अरूण कुमार
शिविर से लौट कर बैंक में स्वीकृत राशि निकालने के लिए गए तो उन्हें
ंशाखा प्रबंधक से मिलने के लिए कहा गया और वहां उनसे 5000रू0 की मांग की
गई जब वे देने से इंकार कर दिया तो आज तक उनके पासबुक से राशि निकालने
नहीं दी जा रही है। वहीं चन्दन कुमार और सनोज कुमार ग्राम अंबारी को नियम
को ताक पर रख कर एक मुश्त 50000 की राशि एक बार दे दी गई जबकि नियमानुसार
किसान को इतनी बड़ी राशि एक बार खेती के लिए जरूरत नहीं पड़ती है। अरूण
कुमार कहते है कि किसानों की यह योजना अधिकारियों की जेब भरने के लिए है।
उदाहरण तीन ंशेखोपुरसराय बजार के राकेश कुमार एवं विनय कुमार यादव ने
फिक्सड डिपोजिट किया और उन्हें बिना हस्ताक्षर का कागज थमा दिया गया।
उदाहरण चार गीता देवी पति अजूZन सिंह को 50000 की राशि केसीसी ऋण के रूप
में दे दिया गया जबकि उनके द्वारा लैण्ड पोजिशन प्रमाण पत्र जनवरी में
बना कर दिया गया। यानि बिना जमीन के ही किसान बनी गीता देवी। इतना ही
नहीं गीता देवी को किसान होने का लाभ तो दिया ही गया वहीं उनके बहू को
उसी जमीन पर बटाईदार बना कर उसका लाभ देने के लिए ऋण दे दिया गया। यानि
नियम-कानून ताक पर। नियम कानून ताक पर रखे जाने का उदाहरण पांच मनोज
कुमार ग्राम अंबारी का खाता ऋण शिविर में खोला गया केसीसी खाता संख्या
405/09 पास बुक भी जारी कर दिया गया और जब नज़राना नहीं दिया गया तो उसी
पासबुक पर उनका नाम उनके सामने यह कह कर काट दिया गया जाओं जो करना हो कर
लेना तथा दुसरे का वही खाता संख्या और पासबुक जारी कर दिया गया। इस तरह
कई प्रमाण है जिससे प्रबंधक के द्वारा अनियमितता किए जाने की बात सामने
आती है। नियम कानून की अनदेखी करते हुए प्रबंधक ने बाप को किसान केडेडी
कार्ड जारी किया तो बेटा को बटाईदार बना दिया।इस कड़ी में रविन्द्र सिंह,
मुकेश कुमार, युगल सिंह, भूसण सिंह, तथा मु खीया पति झंटू सिंह का नाम
प्रमुख है। इतना ही नहंी प्रबंधक के द्वारा इन्दिरा आवास में दलितों बिना
नज़राना के उसका पास बुक नहीं खेलते तथा इसकी शिकायत तब पंचायत
प्रतिनिधियों से की गई तो पंचायत समिति की 15/11/2009 को हुइ्र बैठक में
प्रस्ताव पारित किया गया कि इस प्रबंधक को हटाया जाय। इससे पूर्व जिला
उपविकास आयुकत के द्वारा 12/8/09 को पत्रांक 2074 के माध्यम से प्रखण्ड
विकास पदाधिकारी को पत्र लिखा गया जिसमें ंशाखा प्रबंधक पर इन्दिरा आवास
मे कमीशन लेने के आरोप मे स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात
कही गई पर अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई है। बैंक प्रबंधक की अनियमितता
की शिकायत ग्रामीणों के द्वारा जब 19/5/09 को उच्चधिकारियों से की गई तो
इसकी जांच की गई तथा जांच में भी सारी बातें सामने आई और फिर भी कोई
कार्यवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने पैक्स अध्यक्ष अविनास सिंह के
नेतृत्व में फिर इसकी शिकायत 4/1/10 को की जिसकी जानकारी मिलने पर
प्रबंधक द्वारा पैक्स अध्यक्ष पर बैंक में आकर धमकाने एवं रंगदारी मांगने
का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

घर में ही किसी ने नहीं ली श्रीबाबू की सुध, पुण्य तिथि पर रहे उपेक्षित

``शहीदों की मजारों पर लगेगें हर वरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही
बाकी निशां होगा´´ इन पंक्तियों की सार्थकता श्रीबाबू की इस उपेक्षित
प्रतिमा को देख कर समझी जा सकती है। श्रीबाबू की पुण्यतिथि पर उनके ही
गांव बरबीघा में उनको उपेक्षित रखा गया और श्रीकृष्ण चौक पर स्थापित उनकी
प्रतिमा पर किसी ने एक फूल भी चढ़ाना उचित नहीं समझा। बिहार के प्रथम मुख्यमन्त्री डा. श्रीकृष्ण सिंह को लोग प्यार से श्रीबाबू पुकारते है। बिहार को संवारने में इनका योगदान अपूणीZय रहा है तथा गांधी जी के असयोग आन्दोलन में कूद श्रीबाबू देश के सच्चे सिपाही की तरह स्वतन्त्रता आदोलन की लड़ाई लड़ी।महापुरूषों की इस
उपेक्षा के लिए भले ही लोग एक दुसरे को जिम्मेवार ठहरा देगें पर राजनीति
लाभ के बगैर महापुरूषों को इसी तरह से उपेक्षित किया जाता है। अभी कुछ ही
माह पूर्व श्रीबाबू की जयन्ती के अवसर पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए
गए थे जिसमें कांग्रेस के द्वारा आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल ने
भाग लिया था। इस समारोह के बाद कई तरह क आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला
और जदयू की ओर से भी एक सादे समारोह में श्रीबाबू की प्रतिमा पर
माल्यार्पण किया गया था। पर आज श्रीबाबू की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा की
ओर किसी ने रूख नहीं किया और श्रीबाबू की प्रतिमा उपेक्षित रही।
श्रीबाबू को लेकर हमेशा से राजनीति होती रही है। श्रीबाबू का वास्तविक
उत्तराधिकारी बनने और उनके सहारे राजनीति करने की भी होड़ रहती है पर
अपने घर में ही श्रीबाबू उपेक्षित है। इसको लेकर स्वतन्त्रता सेनानी
वासुदेव वरणवाल कहते है कि महापुरूषों को श्रद्धांजली देने की परंपरा महज
अब राजनीति भर रह गई और किसी के द्वारा देश प्रेम की भावना से प्रेरित
होकर यह नहीं किया जाता है। श्रीबाबू बिहार के निर्माता थे और इसलिए
उन्हें बिहार केसरी कहा जाता है। श्रीबाबू की प्रतिमा की देख रेख की
जिम्मेवारी अभी तक तय नहीं है, न ही किसी संस्थान ने इसकी जिम्मेवारी ली
है इसलिए ही कभी प्रतिमा स्थल पर धूम धाम से मेला लगता है तो कभी विरानी
रहती है। प्रतिमा स्थल नगर पंचायत क्षेत्र में है और नगर पंचायत के
द्वारा इसकी देख भाल की जिम्मेवारी ली जानी चाहिए थी पर राजनीतिक चेतना
के अभाव ही है कि इसकी जिम्मेवारी नगर पंचायत की नहीं है। नगर पंंचायत तो
महज एक वानगी है पर श्रीबाबू की इस उपेक्षा को लेकर हम सभी जिम्मेवार है
और इसके लिए आगे आकर एक संस्था का गठन कर श्रीबाबू की जयन्ती और पुण्य
तिथि पर उन्हें श्रद्धांजली देने की परंपरा बनाये जाने की आज जरूरत है।

ग्रामीण बैंक शेखोपुर में लाखों का घोटाला, बाप किसान और बेटा बटाइदार

बिहार क्षेत्रिये ग्रामीण बैंक शेखोपुरसराय की शाखा वानगी है किस तरह
नज़राने के लिए नियम और कानून को जेब में रख लिया जाता है। इस बैंक के
ंशाखा प्रबंधक के द्वारा भी नियम और कानून को जेब में रख कर मनचाहे लोगों
को ऋण दिया। इसकी एक झलक देखे। मनोज कुमार ग्राम अंबारी का किसान केडिड
कार्ड खाता संख्या 383 में एक तरफ इन्हें किसान का लाभ दिया गया जबकि एक
साल पूर्व मनोज कुमार को खाता संख्या 02/08 के माध्यम से 150000 का लाभ
व्यापारी के रूप में सीसी खाता का दिया जा चूका था। मनोज कुमार से सीसी
करने के नाम पर 45000 का फिक्सड डिपोजिट करने के लिए कहा गया और यह राशि
भी मनोज कुमार के द्वारा दिया गया पर आज तक इस राशि का कोई अता पता नहीं।
जब मनोज कुमार इसकी खोज खबर लेने का प्रयास किया तो शाखा प्रबंधक नाराज
हो गए तथा उनके उपर मुकदमा कर दिया। एक और उदाहरण अरूण कुमार ग्राम
अंबारी। सरकार घोषणाओं के आधार पर लगाए गए शिविर में इनको किसान केडीड
कार्ड खाता संख्या 480/09 31 जनवरी 2009 को यह कह कर दे दिया गया कि उनका
केसीसी ऋण स्वीकृत कर लिया गया। अरूण कुमार को ंशाखा प्रबंधक ने बताया कि
3 ऐकड़ जमीन के आधार पर 38000 का ऋण स्वीकृत किया गया। जब अरूण कुमार
शिविर से लौट कर बैंक में स्वीकृत राशि निकालने के लिए गए तो उन्हें
ंशाखा प्रबंधक से मिलने के लिए कहा गया और वहां उनसे 5000रू0 की मांग की
गई जब वे देने से इंकार कर दिया तो आज तक उनके पासबुक से राशि निकालने
नहीं दी जा रही है। वहीं चन्दन कुमार और सनोज कुमार ग्राम अंबारी को नियम
को ताक पर रख कर एक मुश्त 50000 की राशि एक बार दे दी गई जबकि नियमानुसार
किसान को इतनी बड़ी राशि एक बार खेती के लिए जरूरत नहीं पड़ती है। अरूण
कुमार कहते है कि किसानों की यह योजना अधिकारियों की जेब भरने के लिए है।
उदाहरण तीन ंशेखोपुरसराय बजार के राकेश कुमार एवं विनय कुमार यादव ने
फिक्सड डिपोजिट किया और उन्हें बिना हस्ताक्षर का कागज थमा दिया गया।
उदाहरण चार गीता देवी पति अजूZन सिंह को 50000 की राशि केसीसी ऋण के रूप
में दे दिया गया जबकि उनके द्वारा लैण्ड पोजिशन प्रमाण पत्र जनवरी में
बना कर दिया गया। यानि बिना जमीन के ही किसान बनी गीता देवी। इतना ही
नहीं गीता देवी को किसान होने का लाभ तो दिया ही गया वहीं उनके बहू को
उसी जमीन पर बटाईदार बना कर उसका लाभ देने के लिए ऋण दे दिया गया। यानि
नियम-कानून ताक पर। नियम कानून ताक पर रखे जाने का उदाहरण पांच मनोज
कुमार ग्राम अंबारी का खाता ऋण शिविर में खोला गया केसीसी खाता संख्या
405/09 पास बुक भी जारी कर दिया गया और जब नज़राना नहीं दिया गया तो उसी
पासबुक पर उनका नाम उनके सामने यह कह कर काट दिया गया जाओं जो करना हो कर
लेना तथा दुसरे का वही खाता संख्या और पासबुक जारी कर दिया गया। इस तरह
कई प्रमाण है जिससे प्रबंधक के द्वारा अनियमितता किए जाने की बात सामने
आती है। नियम कानून की अनदेखी करते हुए प्रबंधक ने बाप को किसान केडेडी
कार्ड जारी किया तो बेटा को बटाईदार बना दिया।इस कड़ी में रविन्द्र सिंह,
मुकेश कुमार, युगल सिंह, भूसण सिंह, तथा मु खीया पति झंटू सिंह का नाम
प्रमुख है। इतना ही नहंी प्रबंधक के द्वारा इन्दिरा आवास में दलितों बिना
नज़राना के उसका पास बुक नहीं खेलते तथा इसकी शिकायत तब पंचायत
प्रतिनिधियों से की गई तो पंचायत समिति की 15/11/2009 को हुइ्र बैठक में
प्रस्ताव पारित किया गया कि इस प्रबंधक को हटाया जाय। इससे पूर्व जिला
उपविकास आयुकत के द्वारा 12/8/09 को पत्रांक 2074 के माध्यम से प्रखण्ड
विकास पदाधिकारी को पत्र लिखा गया जिसमें ंशाखा प्रबंधक पर इन्दिरा आवास
मे कमीशन लेने के आरोप मे स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात
कही गई पर अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई है। बैंक प्रबंधक की अनियमितता
की शिकायत ग्रामीणों के द्वारा जब 19/5/09 को उच्चधिकारियों से की गई तो
इसकी जांच की गई तथा जांच में भी सारी बातें सामने आई और फिर भी कोई
कार्यवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने पैक्स अध्यक्ष अविनास सिंह के
नेतृत्व में फिर इसकी शिकायत 4/1/10 को की जिसकी जानकारी मिलने पर
प्रबंधक द्वारा पैक्स अध्यक्ष पर बैंक में आकर धमकाने एवं रंगदारी मांगने
का मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

रंडीबाज

रंडीबाज (लघुकथा, एक कल्पकनिक कथा। इस कहानी से किसी व्यक्ति या संस्था को कोई संबंध नहीं है) चैत के महीने में अमूमन बहुत अधिक गर्मी नहीं होत...