18 जुलाई 2018

हलाला बनाम बलात्कार

हलाला बनाम बलात्कार
(अरुण साथी)

पिता समान ससुर से
सेक्स की बात को
मजहब के आड़ में
हलाला बता
सही ठहराते हो

हो शैतान
और तुम
मुल्ले-मौलवी
कहलाते हो

और
हलाला रूपी बलात्कार
का विरोध करने
वाली एक महिला से
भी डर जाते हो

हद तो यह कि उसे
शरीया का हवाला देकर
सड़े हुए अपने
धर्म से निकालने का
फतवा सुनाते हो

और तो और
इन शैतानों के साथ
देने वाले
खामोश रहकर जो
मुस्कुराते हो
तुम भी क्यों
जरा नहीं लजाते हो..

17 जुलाई 2018

अग्निवेश

#अग्निवेश
(अरुण साथी)







सत्तर साल के बूढ़े
प्रजातंत्र की
पगड़ी छीनी
भगवा कुर्ता फाड़ा
धोती फाड़ी
नंगा किया
और जमीन पे पटक
बूटों तले रौंद दिया

खून से सने
हिटलरी बूट का रंग
भी भगवा ही है
टहटह भगवा..

और उधर
उसी हिटलरी बूट
को पहन कर
कई लोग
अपने अपने घरों से
निकल कर
अट्टहास करने लगे..

हा हा हा...
हा हा हा...




03 जुलाई 2018

आधा दर्जन से अधिक किशोर कैदी शेखपुरा के ऑब्जरवेशन होम से फरार! बिहार का पहला किशोर कैदी गृह है शेखपुरा में..

शेखपुरा।

शेखपुरा के मटोखर दह में बिहार राज्य का एकमात्र और पहला ऑब्जरवेशन होम (पैलेस ऑफ सेफ्टी) से आधा दर्जन से अधिक किशोर  कैदी के फरार होने की सूचना है। इस सूचना के मिलते ही जिला प्रशासन सकते में आ गई है। प्रशासन से जुड़े एसडीपीओ अमित रंजन, अनुमंडलाधिकारी राकेश कुमार, बाल सुधार पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी ऑब्जरवेशन होम पहुंच गए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस ऑब्जरवेशन होम से रात्रि में आधा दर्जन से अधिक बच्चे फरार हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि फरार होने वाले बच्चों की संख्या 9 है परंतु इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी बच्चे किस तरह फरार हो गए इसकी छानबीन कर रहे हैं। इस ऑब्जरवेशन होम में बिहार राज्य के कई जिलों से कोर्ट के द्वारा चिन्हित कर आपराधिक किशोर युवकों को भेजा जाता है।

18 वर्ष से कम के किशोर कैदी को इस ऑब्जरवेशन में रखा जाता है जिनके ऊपर आपराधिक मुकदमे चल रहे होते है। किशोर कैदियों के फरार होने पर जिला प्रशासन काफी सकते में है और हलचल मच गई है। अधिकारी मामले की छानबीन में जुटे हुए हैं अभी तक फरार होने से संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

02 जुलाई 2018

डरना होगा!! जमीन के नीचे पानी नहीं है। आम आदमी, किसान परेशान है..डेंजरस जोन में है हम..


शेखपुरा।

डरना होगा! वाटर लेवल 15 से 30 फीट तक नीचे चला गया है। चापाकल 90% तक फैल हो गया है। खेती के लिए बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा। किसान 10 फीट 20 फीट गड्ढा करके भी मोटर लगा रहे हैं पर बोरिंग से पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा। यह डरावनी तस्वीर बिहार के शेखपुरा जिला की है। इसके आसपास के पूरे इलाके की यही स्थिति है। पिछले चार-छह वर्षों से जम के बारिश नहीं हुई है। एक सप्ताह का झपसा देखना युग होगा।

तालाब भर कर बन गया पार्क

गांव से लेकर नगर तक के तालाब को भरकर कहीं पार्क बना दिया गया है तो कहीं उसे भरकर उसका नामों निशान मिटा दिया गया है। नहरों पर नगर में नाला बना दिया गया है। वृक्षों का नामो निशान मिट गया है। पहाड़ भी ध्वस्त हो गया है। पर्यावरण का असंतुलन सबसे पहले पानी की मार लेकर ही आया है। पानी का जलस्तर बहुत नीचे चला गया है।

नहीं गिर रहा धान का बिचड़ा

किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। धान का बिचड़ा मृगशिरा नक्षत्र में ही गिराया जाता था। आद्रा नक्षत्र खत्म होने वाला है पर अभी तक धान का बिचड़ा किसान गिराने में असमर्थ है। थोड़ी बहुत बारिश हुई है जिससे खेतों में बस नमी मात्र है। बिना बोरिंग से पानी निकले धानका बिचड़ा नहीं गिर सकता। किसान माथा ठोक रहे हैं पर यह गंभीर स्थिति यह आने वाले विकट स्थिति को दर्शा रहा है।

जन चेतना सबसे जरूरी

इसके लिए जन चेतना सबसे जरूरी है। परंतु हम आम आदमी तब तक सतर्क नहीं होते जब तक हमें भय पैदा नहीं होता और भय पैदा करने के लिए सबसे पहले सरकार को आगे आना होगा। कानून का डंडा चलाना होगा। जैसे भी हो इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए कुछ ना कुछ तो करना होगा। यह डरावनी स्थिति बहुत डरावनी है।

बूंद-बूंद पानी बचाने की बात

कुछ लोग पानी बर्बाद नहीं करने की बात करते हैं। बूंद-बूंद पानी बचाने की बात करते हैं परंतु हमारी चेतना इतनी गहरी नहीं है कि हम बूंद-बूंद पानी बचा सके। सरकारी वाटर सप्लाई का पानी हम सड़कों पर खुलेआम बहते हुए देखते हैं। सबसे गहरी बात यह है कि वाटर हारवेस्टिंग अभी तक हमने नहीं सीखी है। वाटर हारवेस्टिंग से ही पानी का जलस्तर बढ़ सकता था परंतु ना तो गांव घर में गड्ढे हैं जहां पानी अटके ना ही शहरों में क्या होगा पता नहीं।

पुरखे ही हमसे ज्यादा आधुनिक, दूरदर्शी और वैज्ञानिक थे।

भले ही हम बात करते हो आज आधुनिक और वैज्ञानिक युग की परंतु हमारे पुरखे ही हमसे ज्यादा आधुनिक, दूरदर्शी और वैज्ञानिक थे। गांव में बड़े बड़े तालाब, खेत खन्धों में बड़े-बड़े अहरे पहले प्राथमिकता में थी अब वे खत्म हो गए। सरकारी अमले इसको गंभीरता से नहीं लेते। जिनका दायित्व है वैसे अधिकारी सूचना मिलने पर भी आंखें मूंद कर रखते हैं। भयावह स्थिति बहुत ही खतरनाक!!

28 जून 2018

हाय दैय्या!! भैयाजी बिहार से रूठ के दिल्ली भाग गए है..


सुशासन बाबू ने कितना दुखी किया है क्या कहें!! अब बोलिए कोई अपना बिहार छोड़कर चला जाएगा और आना ही नहीं चाहेगा तो दुख तो होगा ही! अपने भैया जी को ही देख लीजिए!! बिहार छोड़कर दिल्ली चले गए हैं। अब आने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। कहते हैं कि ड्राइ बिहार में आकर क्या करें। जहां जिंदगी में आनंद नहीं है वैसे क्षेत्र में क्या जीना।

भैया जी कहते हैं कि शास्त्रों के अनुसार जीवन आनंद, उत्साह, उमंग, तरंग में है और बिहार में इस पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह घोर अधार्मिक कार्य है।

भैया जी इससे बहुत दुखी है। वह बिहार आना ही नहीं चाह रहे। बहुत लोग समझा बुझा रहे कि बिहार आ जाओ पर भैया जी आध्यात्मिक ज्ञान देने लगते हैं। भैया जी कहते हैं कि शास्त्रों में भी कहा गया है कि जीवन को आनंद के साथ ही बिताना चाहिए। हंसता, खिलखिलाता जीवन ही सफल जीवन है। अब बिहार में ड्राय बिहार बना दिया गया है। न मय है न मयखाना, तो हंसता-खिलखिलाता, तरंग-उमंग कहां से बिहार में मिलेगा। इसलिए भैया जी बिहार नहीं आना चाहते। अब इनको कौन समझाए।देखिए कब बिहार आते हैं!!

वैसे मैंने कहा, भैया जी बिहार में मय तो उपलब्ध ही है। होम डिलीवरी। पर भैया जी कहते हैं कि मय की वजह से आनंद कहां आ पाता है पैसे भी खर्च होते हैं और आजीवन का आनंद ही नहीं आए तो क्या फायदा वैसे बिहार में रहने से।

मैंने कहा भैया जी आप के बगल में बाबा भोला का दर्शन स्थल भी तो आजकल बहुत प्रसिद्ध हो गया है। लोगों की धार्मिक भावना एकदम उमड़ पड़ी है। भोलेनाथ की जय जय लगातार करने के लिए पहुंच जाते हैं। दशकों तक जो कभी नहीं गए वह भी आजकल बाबा की नगरी में सेल्फी लेते देखे जाते हैं। कभी-कभी माता के दरबार में रजरप्पा पहुंच जाते हैं। आप क्यों उदास होते हैं। आ जाइए। व्यवस्था तो हर जगह होती है। भैया जी इतना सुनते ही भड़क गए। 5 घंटा 6 घंटा यात्रा करके पोरे पोरे दर्द करेगा कि आनंद आएगा! तुम भी एक दम मूर्ख के मूर्ख ही रह गए हो। मैंने भी कहा कि हां भैया जी आपकी बात में तो दम है।
ना मय है, ना मयखाना है। बिहार में आया कैसा जमाना है।।

21 जून 2018

योग यात्रा और जीवन

#Selfi on #Yoga #गाँव के #खेत से लाइव

साल, दो साल से #योग #ध्यान छूट गया। जीवन की आपाधापी में जब रोजी-रोटी, घर-परिवार, बाल-बच्चे की चिंता होने लगती है अपनी चिंता चूक ही जाती है। एन्ने देखो, ओनने अंधार, ओनने देखहो एन्ने अंधार। जीवन मे सबकुछ एक साथ कोई साधक ही साध सकता है या फिर सम्पन्नता प्राप्त व्यक्ति।

मुफ़लिसी के यात्री को हमेशा रोटी पहले दिखती है बाकी सब बाद में। खैर!!

योग से बस्ता स्कूल जीवन से ही रहा है। बभनबीघा हाई स्कूल में कामदेव सर करांची की छड़ी लेकर जबरदस्त योग करवाते थे। उस समय का सीखा योग जीवन भर याद है। बहुत दिन किया भी। बाद में आचार्य ओशो की पुस्तकों के सानिध्य से ध्यान का भी महत्व समझा। व्यक्तिगत अनुभव बहुत उत्साहित करने वाला रहा। योग और ध्यान नियमित रूप से कुछ दिन ही करने पे सकारात्मक परिणाम मिलने लगता है। कमर दर्द और सायनस की समस्या को योग से ही ठीक किया है। तनाव मुक्ति का रामबाण है योग।

योग वास्तव में अमृत है। बस हम नियमित करें। हालांकि अब योग राजनीतिक भी हो गया है। हिन्दू और मुसलमान हो गया है। सब राजनीतिक बातें है। योग सबके लिए है। इसे धर्म से बांधना मनुष्यता को कलंकित करना है।

खैर! विश्व योग दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की गौरव और गरिमा में जोड़ा गया एक सितारा है। व्यवसायिक ही सही बाबा रामदेव ने भी जन जन तक पहुंचाया है। सबसे बढ़कर। मेरे पुराने जिले मुंगेर के बिहार योग विद्यालय का योगदान अतुलनीय है। बस इनका योग आम लोगों की पहुंच में नहीं है।

देखते है आज से शुरू किया गया योग कितने दिनों तक नियमित रख पाता हूँ...

हलाला बनाम बलात्कार

हलाला बनाम बलात्कार (अरुण साथी) पिता समान ससुर से सेक्स की बात को मजहब के आड़ में हलाला बता सही ठहराते हो हो शैतान और तुम मुल्ले-मौ...