12 अक्तूबर 2011

पैदा करने वाली मां ने जिंदा बेटी को कफन देकर फेंका, 9 बेटी की मां नें उसे अपनाया।


शेखपुरा (बिहार)

बरबीघा रेफरल होस्पीटल के पीछे एक नवजात शिशु (बेटी) को लाल रंग का कफन ओढ़ा कर जिंदा ही झाड़ी में फेंक दिया गया और वहां से गुजर रही एक महिला को जब नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी तो उसने उसे उठा लिया। मामला मंगलवार की रात्री आठ बजे के आस पास की है। मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली इस घटना में जहां जन्म देने वाली मां ने बेटी जानकार नवजात शिशु को जन्म देने के बाद लाल रंग के कफन में लपेट कर ढकनीया पोखर के पास झाड़ी में फेंक दिया वहीं मानवता की मिशाल पेश करते हुए नालान्दा जिले के सारे थाना अर्न्तगत हरगांवां निवासी उषा देवी ने उसे गोद ले लिया। उषा देवी को पहले से ही नौ बेटी है और उसके बाद भी उसने फेंकी हुई बेटी को गोद लेकर मिशाल पेश की है। फेंके हुए नवजात को गोद लेने वाली उषा देवी बच्ची के फेंके जाने पर आक्रोश व्यक्त करती हुए कहती है कि बेटा हो या बेटी बच्चे भगवान के सामान है और समाज और दहेज के डर से ऐसा करना सबसे बड़ा पाप है।

कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...