फुटबॉल विश्व कप मैच देखिए
मैच में जीवन का अनुभव मिलेगा। कभी भी कोई फॉल कर देगा। कभी येलो कार्ड दिखा कर जीवन संघर्ष में सतर्क होने की चेतावनी मिलेगी। कभी भी अचानक अपनी गलती अथवा गलती से हुई गलती से रेड कार्ड मिल जाएगा और आप खेल से बाहर।
पर। खिलाड़ी, निराश नहीं होता। गिव–अप नहीं करता। खेल है। जीवन है। जीवन एक खेल है।
और, सब कुछ अच्छा, जरा सी गलती और पेनल्टी...! खेल खत्म होने की संभावना, पर सेकेंड के हजारवें हिस्से से खेल बचा लिया जाएगा..!
और सेकेंड के हजारवें हिस्से से हारी बाजी जीत सकते है। जीती बाजी हार सकते है..!
सब कुछ अनिश्चित..! और महाभारत में अर्जुन ने सिर्फ लक्ष्य (मछली) की आँख देखा, यह पुरानी बात है ! अभी फुटबॉल में खिलाड़ी को सिर्फ लक्ष्य (फ़ुटबॉल) को देखते हुए देखिए..!
और, मैदान में 90 मिनट का खेल केवल 90 मिनट का नहीं होता। 365 दिन 24*7 निरंतर अभ्यास से यह सीखना कि कैसे हार से हारना नहीं चाहिए। जीत का गुमान नहीं करना चाहिए...सबकुछ...!
और टीम भावना से जीत मिलती है, सीखिए...! और खेल के पीछे एक गुरु होता है। कोच..! वही तो गलती बताता है। गलती सुधारता है। गलती पर डांटता है..!
कितना कुछ होता है खेल में। एकदम जीवन की तरह..!
देखिए तो आंसू को। जीत की खुशी का आंसू, हार के दुख का आंसू...!
और, जीत का जश्न... सच्चा आनंद...सबकुछ सर्वोच्च शिखर पर...