26 अगस्त 2011

अन्ना का आंदोलन लोकतंत्र के लिए खतरा?-राहुल


लो जी, कांग्रेस के तथाकथित युवराज ने आखिर कर मंुह खोल ही दिया पर वही तोंता रटंत? बेचारे को जो सिखाया पढ़ाया गया उसे ठीक से पढ़ कर और याद कर संसद में रखा और कह दिया कि अन्ना का आंदोलन लोकतंत्र के लिए खतरा?

बेचारे को कौन बतलाएगा कि यही आन्दोलन है तो लोकतंत्र जिंदा है वरना उनके दादी ने इसे मारने के लिए कोई कोर कसर उठा नहीं रखी थी।

मुझको तो इस सब में राहुल को प्रोजेक्ट करने की बू आ रही......

पर मीडिया का कैमरा सामने आते ही बेचारे लंगोटी उठा कर भागने लगते है, पता है तोंता रटंत के आलावा भी कुछ बोल न दे...

जय हो, जनाब  को भावी प्रधानमंत्री कहा जाता है.. भगवान भला करे इसे देश का...

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरुण भाई मैं काम्ग्रेस और परिवारवाद का विरोधी हूं , लेकिन बात सही है । अन्ना गांधी नही हैं और उनकी मांग भी गलत है । एक छोटा सा उदाहरण देता हूं , क्या आप चाहेंगे कि पुलिस और जज एक हीं आदमी हो ? यानी जो अपराध की जांच करे वही सजा भी दे ? लोकपाल दुनिया के ५६ देशों में है , पाकिस्तान में भी है । कानून से भ्रष्टाचार नही मिटनेवाला । अमेरिका का साम्राज्यवाद संकट में है । समाजवाद को रोकना उसकी प्राथमिकता है और हमारे व्यवसायिक घराने भी यही चाहते हैं। टूजी घोटाले में अंबानी - टाटा को जेल जाने की संभावना थी , ठीक उसी समय यह आंदोलन शुरु हुआ । एक बार भी उन घरानों के बारे में किसी ने अन्ना के मंच से कुछ भी नही कहा ।

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