10 नवंबर 2013

ख्वाब की तामीर

रोज तुम आती हो आंखों में तसव्वुर बनकर।
ख्वाबों में सही, ख्वाब की तामीर तो होती है।।

लैला- मजनूँ  की तरह न हो मशहूर अपने किस्से।
आंखों में पाक मोहब्बत की तस्वीर तो होती है।।

संगमरमर से तराशा ताजमहल तुमको कैसे कह दूं।
ताज की दीवारों पर भी दर्द की तहरीर होती है।।

मोहब्बत है तो फिर खुदा की आरजू क्यूं हो।
पाक-मोहब्बत में खुदा की तस्वीर होती है।।

जुनून में कभी मोहब्बत को उदास मत करना।
खुश्बू के पांवों में भी कहीं जंजीर होती है।।

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