19 मई 2019

भक्तिकाल में महाभक्त

भक्तिकाल में महाभक्त

(अरुण साथी, भक्तों के भय से कांपते हाथों ने बटन दबाया है, इसमें मेरी कोई गलती नहीं, माफ कर दियो बाबा..)
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कसम से भक्त परंपरा में ऐसे महा भक्त की भक्ति को देखकर बाबा केदार भी फूट फूट कर रोने लगे। ध्यान, योग, कैमरा, इंजीनियर, मुस्टंडे गार्ड, और 24 घंटे लाइव प्रसारण! बाबा केदार ने सोचा भी नहीं होगा कि ऐसे अद्भुत, अदम्य भक्त भी उनकी भक्ति करेंगे! ध्यानकक्ष में जब कैमरा गया तो बाबा का अंतःकरण भी अंतर्नाद कर उठा!

बाबा तो औघरदानी हैं उनको यह सब बात समझ कहां आने वाली पर भक्त परंपरा के महाभक्त साहिब ने बाबा के आंख में आंसू भर दिए। क्या गजब की भक्ति थी। 24 घंटे से आम आदमी परेशान हैं कि कोई न्यूज़ चैनल वाले हमारी भी तस्वीर दिखा दे। रोजी रोजगार की बात उठा दे। हाय। अब तो भूखे रामखेलावन को भी भरोसा हो गया कि उसका बेटा जरूर दिन भर ताश खेल के भी बेरोजगार नहीं है। जरूर वह अपनी लुगाई को सब कमाई दे रहा है। भला इस रामराज्य में कोई बेरोजगार हो सकता है क्या।

चिलचिलाती धूप में बनठन के निकाली हसीना तो एकदम से भड़क गई है। क्यों जी, हमे भी भाव दो। हम भी आदमी है। चैनल वाला बेचार क्या करता। देशद्रोही कहके खिसक लिया।

महा भक्त की भक्ति में डूबे भक्त चैनल सीधा भक्ति परंपरा का निर्वाह करते हुए महा भक्त का प्रसारण कर रहे हैं। महा भक्त के अभिनय कला कौशल की क्षमता का वैसे तो पूरी दुनिया ने लोहा मान लिया है पर आज के अभिनय कला, रूपसज्जा और भेषभूषा ने रविश जैसे को भी लोहा मनवा ही दिया। आखिर कर बाबा केदार को ही कहना पड़ा, बस कर पगले, रुलाएगा क्या...😢😢😢
(डिस्क्लेमर: बर्दास्त की भी हद होती है भाई जी)

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (20-05-2019) को "चलो केदार-बदरी" (चर्चा अंक- 3341) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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