20 अक्तूबर 2010

मां की आंख के आंसू कोई नहीं देखता.

यह भले ही अतिस्योक्ती लग रही हो पर सच यही है. आज नारी शक्ति के उपासना के ईस महापर्व दुर्गापूजा पर यह सब एक बार फ़िर से देखने को मिला वह भी व्यापक समाजिक स्वीकारिता के साथ. एक तरफ़ हम नारी की पूजा करते हैं तो दूसरी तरफ़ वहीं नारी का अर्धनग्न  नांच भी आयोजित करते है और इसकी समाजिक मान्यता भी है. यह बुराई गांव से लेकर नगर तक सब जगह देखने को मिलता है. धर्म के आड मे यह सबसे बडा अधर्म है मां की पूजा तो हम करते है पर रोती हुई मां की आंख के आंसू कोई नहीं देखता.

एचएम और शिक्षक सरकारी स्कूल में पी रहे थे ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर

सरकारी स्कूल में नशीला पदार्थ आया ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर शेखपुरा बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल है। सरकारी स्कूल में प्रधानाध्...