27 अक्तूबर 2010

स्वच्छ राजनीति और जेपी की विरासत की बात बरबीघा में. ................नीतीश कुमार जब जार्ज फर्नाडीस के नहीं हुए तो शिवकुमार की क्या होते

स्वच्छ राजनीति और जेपी की विरासत की बात बरबीघा में दिखने लगी है। एक तरफ जहां बाहुबल और धनबल के सहारे राजनीति दिशा तय करने की बात हो रही है तों वहीं दूसरी तरफ दिनकर जी के पुत्र और प्रख्यात साहित्कार डा. केदार सिंह, प्रख्यात साहित्यकार रविन्द्र भारती, और प्रख्यात समाजवादी एवं मध्य प्रदेश विधायक दल के नेता सह सपा के राष्ट्रवादी महामन्त्री, किसान नेता डा. सुनीलम बरबीघा की घरती पर वोट मांग रहें है। उक्त लोगों कें द्वारा समाजवादी नेता शिवकुमार के पक्ष में लोगों से वोट की अपील की जा रही है। इस अवसर पर डा. सुनीलम ने कहा कि सरकार एक मदमस्त हाथी की तरह होती है और उसपर अंकुश लगाने का काम विपक्ष रूपी महावत ही करता है और शिवकुमार एक सशक्त महावत है जो बिहार की किसी भी सरकार पर अंकुश रखेगा। 
सुनीलम ने कहा कि नीतीश कुमार जब जार्ज फर्नाडीस के नहीं हुए तो शिवकुमार की क्या होते।
लोगों से शिवकुमार को जिताने की अपील करते हुए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पुत्र डा. केदार सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने समाज को बंाटने की राजनीति कर रहें है और शिवकुमार समाज को साथ करने की राजनीति कर रहें है। सभा को संबोधित करते हुए रविन्द्र भारती ने कहा कि नीतीश कुमार से मिलने के लिए मन्त्री को पन्द्रह दिन इन्तजार करना पड़ता है और कुसहा बांध के टुटने के पहले मन्त्री ने नीतीश कुमार से मुलाकत करनी चाही पर समय नहीं मिला और कोशी के जलप्रलय में लाखों लोग मरे। शिवकुमार ने कहा कि कमाने वाले मजदूर को मजदूरी मिलती है या नहीं। मैंने 35 साल तक जनता की सेवा की है और आज कहीं खुनी पंजा हाथ वढ़ा रहा है और जिले को एक बार फिर अपराध की आगोश में ले जाना चाहता है तो कहीं झुमने बाला बरबीघा को कलंकित करने लाया गया है। कोई मुखीया बन कब्रीस्तान की जमीन कब्जा कर तीन मंजीला मकान बनाया तो कोई फिर बरबीघा की हकमारी करने आया। बताते चले की नीतीश कुमार के साथ राजनीति करने वाले शिवकुमार की टिकट नीतीश कुमार के द्वारा काट लिया गया और आज वे निर्दलीय चुनाव प्रचार में है और उनके चुनाव प्रचार का तरीका समाजबादी है जिससे जनता प्रभावित हो रही है।

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