09 मार्च 2011

और वह मां बन गई।---- (महिला दिवस पर समर्पित )






कनतिया आज बहुत खुश है
उसकी शादी होने वाली है

वह भी पहनेगी 
लाल लाल साड़ी

माथे पर लगाएगी
लाल लाल 
सिंदूर
टिकुली

कानों में पहनेगी 
मलकीनी जैसी 
झुमका

और नाकों में होगी 
नथुनी

तेरह साल की कनतीया आज मां है
न खुशी
न गम

उसका संपूर्ण अस्तित्व आज भावशुन्य है

सोंच रही है कि वह उस दिन खुश क्यों थी।


7 टिप्‍पणियां:

  1. दिल को छू लेने वाली कविता है! सोच रही हूँ, कनतिया के माँ बाप जेल में क्यों नहीं है!

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  2. बेहतरीन अरुणजी.... बहुत ही सशक्त और प्रभावी पंक्तियाँ रची हैं......

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  3. वाह!महिला दिवस पर एक अनुपम रचना.

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  4. kalam roopi hatiyar se samaj mein faili "Bal vivah" jaisi kuritiyan par jabardast prahar.

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