14 फ़रवरी 2013

वेलेन्टाइन और गुलाब



तुम ही कहो प्रिये
क्या वेलेन्टाइन पर
गुलाब देने भर से
समझ जाओगी तुम..
भला कहो तो कैसे...?
शाख से तोड़ कर
एक लाल गुलाब
दे भी दूं तुम्हें
तब भी क्या किसी के शाख
से तोड़ लेने का दर्द
सालता नहीं रहेगा मुझे....

तुम्हारे
नाजुक हाथों में कहीं
चुभ न जाए कांटे
इसका डर भी तो मुझे डराता रहेगा...

तुम्ही कहो प्रिये
जब दिल के धड़कने की सदा
से तुम्हारा दिल न धड़का हो
सांसो की संगीत से
तुम्हारा मन न झुमा हो
तब भला फूल को तोड़कर
किसी को दर्द क्यों दू...
तुम्हीं कहो  प्रिये
आखिर
प्रेम तो प्रेमपुर्ण होता है न...




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(व्यंग्य:अरुण साथी) चच्चा रामखेलावन परेशान होकर पूछने लगे। "आंय हो मर्दे ई वायरल की होबो हई!आझकल बुतरू सब बरोबर बोलो है!" रामख...