14 अक्तूबर 2013

रावण जिंदा रह गया!

पुतले तो जल गए, रावण जिंदा रह गया।
देख कर हाल आदमी का, राम शर्मिंदा रह गया।।

सब कुछ सफेद देख, धोखा मत खाना साथी।
बाहर से चकाचक, अंदर से गंदा रह गया।।

फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा ना कर साथी।
अब तो भंरूये भी दुआ मांगते, धंधा मंदा रह गया।

जो दिखता है सो बिकता है, पूजा, पंडाल, यज्ञ, हवन।
बेलज्जों की कमाई का साथी धंधा, चंदा रह गया।

दीन, धर्म, ईमान का चोखा है व्यापार।
सौदागरों के हाथों का साथी, औजार निंदा रह गया।।

नया दौर का नया चलन है, देखो आंख उघार।
रावण ही पुतला जला कर कहता, अब तो यह धंधा रह गया।।

गुरुदेव ओशो ने मुझे आदमी बनाया..

गुरुदेव ओशो ने मुझे आदमी बनाया...गुरु पूर्णिमा पे नमन #ओशो (अरुण साथी) किशोरावस्था में गुरुदेव #ओशो आशीर्वाद मुझे "मिट्टी का दीया&quo...