08 जून 2014

आदरणीय मोदी जी के नाम एक खुला खत

आज एक बहुत ही गंभीर समस्या की तरह मोदीजी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। यह समस्या से फूड सिक्योरिटी बिल में हुई गड़बड़ी का। चूँकी यह सीधा-सीधा गरीबों से जुड़ा हुआ मामला है इसलिए इसकी तरफ प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है। पूरे देश की बात तो मैं नहीं जानता पर बिहार में इसका व्यापक पैमाने पर दुरूपयोग किया गया है जिसकी वजह से जहां गरीबों को अनाज नहीं मिल रहा है वहीं अमीर और सम्पन्न लोग बोरे में भर कर अनाज ले जा रहे है।
फूड सिक्योरिटी बिल को लेकर गड़बड़ी कहां से हुई यह पक्के तौर पर मैं नहीं कह सकता पर परिणाम भयानक रूप से सामने आए है और इसकी वजह से भूखे मरने वाले को अनाज तो नहीं ही मिलेगा। दरअसल यह पूरा मामला पिछली सरकार के द्वारा हड़बड़ी में उठाए गए कदम का नतीजा भी हो सकता है। 
फूड सिक्योरिटी बिल को लागू करने का आधार 2011 में किए गए जनगणना को बनाया गया है जो की पूरी तरह से निराधार है। शिक्षकों के द्वारा किए गए इस जनगणना की प्रामाणिक संदेहास्पद है।
फूड सिक्योरिटी बिल को लागू करने के लिए बिहार सरकार ने जिस प्राइवेट कंपनी के आर्थिक सामाजिक जनगणना का काम दिया उसने इसे छोटे-छोटे वेंडरों को दे दिया  जिसके द्वारा गैर जिम्मेवारी से काम किया गया और फिर परिणामतः गलत आंकड़े फीड किए गए जिससे गरीबों का राशन कार्ड नहीं आया और सम्पन्न लोगों के नाम से राशन कार्ड बन कर आ गया।
इतना ही नहीं इस योजना को उन सरकारी राशन की दुकानों के माध्यम से लागू किया गया है जो गरीबों के हकमारी के लिए जगजाहिर है, ये तो वही बात हो गई कि बिल्ली को दूध के रखवाली का भार दे दिया गया हो!
आलम यह है कि इस आंकड़े के हिसाब से नौकरी करने वाले अथवा सौ बीधा के जोतदार भी गरीब है और दो सांझ का चुल्हा नहीं जला सकने वाला अमीर, भला यह  अपराध नही ंतो क्या है? 
दरअसल गरीबों की हकमारी की यह एक ताजी वानगी भर है जिससे समझा जा सकता है कि गरीब, गरीब कैसे रह जाते हैं! हलंाकि सवाल महज किसी योजना के बंटरबांट का नहीं है, सवाल हमारे सामाजिक सोंच के पतीत होने का भी है। राशन कार्ड लेकर अमीर लोग जब राशन की दुकान से राशन लेकर आए तो उन्हें तनिक भी लज्जा नहीं आई? यह अनाज भूख से मरते गरीबों को बचाने के लिए था फिर उनके मुँह का निवाला छीनने वालों के माथे उनकी मृत्यु का पाप नहीं आएगा?
और यह पाप उन सभी के माथे आएगा जो परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि इस योजना की गड़बड़ी सुधारने की दिशा में तत्काल पहल करें और इसपर रोक लगा कर इसकी जांच कराए..
साधन्यवाद
अरूण साथी
7870285651

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...