17 अक्तूबर 2014

बधिया किया हुआ आदमी...

कामाग्नी को दमित करने
लेकर हंसुली-लहरनी
निकाल लिया जाता है
उसका अण्डकोश
कर दिया जाता है
जानवरों का
बधिया...



जाति-धर्म
गोत्र-गोतिया
शुद्र-ब्राह्मण
काला-गोरा
शिया-सुन्नी
ईसाई-यहूदी

नामक कई औजारों से
निकाल लिया जाता है
आदमी के दिमाग से
उसका
स्वबोध.....

और कर दिया जाता है आदमी का बधिया...

कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...