15 मई 2016

रक्तबीज, जो मार देने पर भी नहीं डरता..

रक्तबीज, जो मार देने पर भी नहीं डरता..

(पत्रकारों की हत्या पे एक पत्रकार "अरुण साथी" की आवाज़ और शहीद साथी को विनम्र श्रद्धांजली)
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नश्वर देह से अनासक्त हो
कलम थामी
और लिया संकल्प
निडरता का...
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संकल्प लिया
जनता-जनार्दन की सेवा
और जनतंत्र की
अमरता का...

रे असुर, रुको
रक्तरंजित हाथों को साफ
करने से पहले
देखो तो,
दिखेगें तुम्हें
हजारों, लाखों
राजदेव
इंद्रदेव
निडर
अमर
अजर
और वह बोलेगा-

"तुम मार देना मुझे फिर से
और मैं फिर से
जिन्दा करता रहूँगा
मुर्दा कौमों को..."

और तब
तुम सोंचने लगोगे
आखिर यह कैसा
रक्तबीज है...

जो मार देने पर भी नहीं मरता...
जो मार देने पर भी नहीं डरता....
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(अरुण साथी, बरबीघा, बिहार)

कविवर को नमन

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