04 सितंबर 2016

जोरू का गुलाम

जोरू का गुलाम
*अरुण साथी*
साथी ने पत्नी जी से पूछा
"बंदरी
जिसे पाकर तुम
अपने जीवन को
बेकार समझती हो,

नाकारा, नल्ला
नासपीटा, कालमुँहा
कहके जिससे
साल भर झगड़ती हो,

उसी मुंहझौंसे के लिए
तुम निर्जला व्रत क्यूँ करती हो..?

बंदरी
खिसियाई,
खिंखियाई
फिर लजाते हुए
फरमाई

"तुम मानों न मानो
पर मैं तुमको बहुत
प्यार करती हूँ,

और
जोरू की गुलामी करते रहो
बस इसीलिए तो व्रत करती हूँ...

एचएम और शिक्षक सरकारी स्कूल में पी रहे थे ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर

सरकारी स्कूल में नशीला पदार्थ आया ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर शेखपुरा बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल है। सरकारी स्कूल में प्रधानाध्...