02 अक्तूबर 2016

हे बापू..













हे बापू
(आज ही इस तस्वीर को कैद किया और दो पँक्तियाँ..लिख दी )
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सब कुछ है
तेरे देश में,
गरीबी हटाओ
का नारा है,
नेताओं का
भाषण प्यारा है..
शिक्षा और रोटी का अधिकार है,
गरीब-गुरबों की
सरकार है..


विकास का
डपोरशंख है,
सिंहगर्जन करते
महाराजा; मलंग है..
फिर भी
गू गांजते
सूअर, कुत्ते और
आदमी के बच्चे,
संग संग है...




कविवर को नमन

किसान (कविता) / मैथिलीशरण गुप्त हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है हो जाये अच्छी भी फसल...