04 अक्तूबर 2016

पकिस्तनिया

पकिस्तनिया
(अरुण साथी)
स्थान कस्बे की चाय दुकान है। स्याह कोयले की चूल्हे का सफ़ेद धुंआ के साथ गांजा का धुंआ मिश्रित होकर अजीब सा एहसास दे रहा है। चाय की इस दुकान पे शाम को बड़ी संख्या में लोग जुटते है। शिक्षक, किसान, युवा, व्यपारी, पुलिस सभी। गंजेड़ी की टीम भी शाम को ही जुटती है। गंजेड़ी टीम में तीन-चार पीढ़ी साथ साथ कस लगाते है। सरपंच साहेब सत्तर पार कर चुके है। उनकी टीम का नया सदस्य है फंटूस, सोलह साल का। लोग कहते है छँटल लफुआ है।

खैर, पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध यहाँ भी छिड़ी हुई है। मैं अपने दोस्तों के साथ चुपचाप अध्यक्ष बना हुआ सुन रहा हूँ। बहस जोरदार है। सर्जिकल स्ट्राइक पे सीने फूले हुए थे। परमाणु बम की मारक क्षमता का जिक्र ऐसे हो रहा था जैसे सभी ने परमाणु अनुसन्धान संगठन से डिप्लोमा किया है। तभी सुतिया मूंछ वाला सुखरा गरजा  "परमाणु बम छोड़ना कोई हंसी खेल है, हमारा तो एक-दो स्टेट ख़त्म होगा , पाकिस्तान नक्शा से गायब हो जायेगा।" उसकी हाँ में हाँ सभी ने मिलाया। सरपंच साहेब भी अपनी बुजुर्गियत प्रदर्शित करते हुए कहा " क्या होगा एक करोड़ लोग मारेंगे पर बारबार मरने से एक बार मरना अच्छा है। टीवी पे दिखा रहा था कि हमारे पास बहुत ताकत है, और छपन्न इंच का सीना भी तो है।" बहस गर्म ही थी। चिलम से सुट्टा लग रहा था। सुट्टा लगाने में सरपंच साहेब और सुखरा में कंपीटिशन है। सुट्टा खींच के जब सरपंच साहेब छोड़ते तो चूल्हे से निकलता धुआं भी कभी कभी कम पड़ जाता।

तभी हमेशा की तरह अनवर, इसराइल, आरिफ अपने दोस्तों के साथ वहाँ पहुंचा। वे लोग भी नियमित चाय पीने आते थे। सभी एक दूसरे से वाकिफ थे। उनलोगों के पहुँचते ही जैसे शांति समझौता हो गया। सभी एक बारगी चुप हो गए। तभी बहस को बढ़ाते हुए फंटूस बोल उठा "अरे ई पकिस्तनिया एकरी माय के..।" सरपंच साहेब उसका हाथ दबा के चुप रहने का इशारा किया..। चाय दुकानदार भी इशारे से चुप रहने का निवेदन करते हुए कहा "मेरे लिए सभी ग्राहक सामान है, आप भी वे भी...। अब मैं भी असमंजस में पड़ गया..!!

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