28 अगस्त 2017

लोकतंत्र का किसान

#लोकतंत्र का #किसान

अभी धान के खेतों में निकउनी का समय है। किसान और मजदूर सुबह से ही धान की फसल के बीच से  #घास_फूस को चुन कर उसे जड़ से उखाड़ते है और अपने खेतों से बाहर फेंक देते है...ताकि वे धान की फसल को नुकसान न कर सकें... लोकतंत्र में यही घास_फूस धर्म और जाति की आड़ में #फल_फूल रहे है..आज जरूरत ऐसे किसान की जो इस अंतर को समझ सकें। वरना भारत भूमि को लहलहाने के लिए जितने भी उर्वरक दिए जा रहे सभी से घास फूस ही लहरा रहे है...

#मेरा_गांव_मेरा_देश

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