14 मार्च 2026

राजगीर में साहित्य, विचार और ध्यान का अनूठा संगम

राजगीर में साहित्य, विचार और ध्यान का अनूठा संगम

ज्ञान की पुण्य धरा नालंदा, जहाँ इतिहास की स्मृतियाँ आज भी ज्ञान की ज्योति बनकर आलोकित होती हैं। उसी धरा पर स्थित राजगीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में अखिल विश्व साहित्य उत्सव का अद्भुत और अनुपम आयोजन सजा। 

चार दिनों तक चल रहे इस साहित्यिक महोत्सव में देश-दुनिया के मूर्धन्य साहित्यकारों, विचारकों और रचनाकारों ने अपने विचारों से बिहार की माटी को मानो फिर से सिंचित कर दिया। लेखक, पत्रकार, चिंतक, दार्शनिक, कवि, शोधार्थी, इतिहासकार, प्रशासनिक अधिकारी और युवा, सभी की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक जीवंत बौद्धिक संगम का रूप दे दिया।

इस महोत्सव का संयोजन वैशाली जी ने किया। यह जानकर आश्चर्य हुआ कि जिनका नाम वैशाली है, वे बिहार की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की हैं। यह तथ्य अपने आप में इस बात का जयघोष है कि बिहार की सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान आज भी देश और दुनिया के लोगों को आकर्षित करती है।
इसी समारोह में बिहार की माटी की सुगंध को अपने शब्दों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचाने वाले प्रखर कवि और छोटे भाई संजीव मुकेश जी के स्नेहिल आमंत्रण पर, साथी सुधांशु शेखर के साथ वहाँ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह केवल एक आयोजन में सहभागिता भर नहीं थी, बल्कि एक नई ऊर्जा, नए अनुभव और नए विचारों से साक्षात्कार का अवसर भी बनी। वहाँ उपस्थित सृजनधर्मी लोगों के चिंतन और संवाद को आत्मसात करना अपने आप में एक समृद्ध अनुभव रहा। 
महोत्सव का समापन जब ऋषिकेश के बाबा कुटानी के वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों के बीच ध्यान सत्र से हुआ, तो वातावरण मानो आध्यात्मिक शांति से भर उठा। उस क्षण मन अभिभूत था और हृदय में यह अनुभूति गूंज रही थी कि साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाली एक जीवंत साधना है।

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