09 दिसंबर 2012

कांग्रेसी राम राज और विदेशी मोदीखाना। (चुटकी)


आज समाजवादी झंडा ढोने वाला ढोलक यादव बहुत प्रसन्न था। नेताजी ने मैडम का पानी उतार दिया। एक दम गरमा-गरम बहस। ई विदेशी मोदीखाना किसान विरोधी है मैडम इसे वापस ले लिजिए।

गौरी बा के दलान पर घूरा (अलाव) तापते हुए पहले ढोलक उदास रहा करता, मंहगाई के मुददे पर जब भी बहस होती तब वह चुप हो जाता। बोलता भी क्या? कल ही नयकी भौजी झगड़ पड़ी थी,
‘मुंहझौंसा परबो-तेउहार में गरम-मशाला रोजी नै है।’’ तब मोदीखाना से उधार लाकर गरम-मशाला दिया था ढोलक ने। मंहगाई की मार से वह लाचार था और उसके नेताजी सरकार के साथ। सोचता ढोलक कि अपन हारल और मौगी के मारल केकरा से कहे।
‘‘कि हो काका, बोलो हलियो ने हमर नेता जी किसान के रखबाला हखिन, देख लेलहो।’’ मंडली में आज सब चुप थे और ढोलक ढकर रहा था। आज ही वह अखबार में नेताजी का भाषण पढ़ा है, लाइन बाई लाइन।
तभी शाम के साढ़े सात बज गया। सुरो बाबू का बाजा चालू हो गया। यह आकाशवाणी है। आज का प्रमुख समाचार, बहनजी और नेताजी की मदद से एफडीआई पास हो गया।
ढोलक अवाक। इ तो गिरगिट की तरह पलट गया। बहिनजी और नेताजी दुनु एक साथ? हे भगवान ई का हो रहा है। घोर कलजुग आ गया कलजुग।
‘‘कलजुग नै ढोलक, राम राज है राम राज। बाघ-भैंसा दुनु एक्के घाट पर। इस सब मैडम के प्रताप है। ’’ बधोरन काका बोल उठे।
तभी बहिनजी के एक समर्थक रमेसर सिंह रविदास ने प्रतिकार किया।
‘‘देखिए यह बस गरीबों के हित का बात होगी तभी बहिनजी ने सरकार का साथ दिया है। आप लोग कुछो कहिए पर बहिनजी जी ने यदि साथ दिया है तो जरूर गरीब का भला होगा, सौ परसेंट गारंटी है।’’
पर ढोलक खामोश वहां से उठ गया। कैसे नेताजी लोहिया जी, समाजवाद आदि समझाते थे। आज ई का हो गया। इ पूंजीवादी समाजवाद है का? ढोलक सोंच रहा था। जब हम चुनाव में सौ दो सौ में वोट खरीद लेते है तब यहां तो बड़का बड़का कंपनी है? कुछो हो सकता है?
फिर ढोलक ने फैसला किया कि वह नेताजी से पूछेगा कि उसे विदेशी मोदीखाना में उधार मिलेगा क्या? परव-तेउहार पर उसके घर गरम-मशाला आएगा की नहीं?
सोंचता हुआ ढोलक घर आया। बधाई हो ढोलक। बेटा होलो, तों बाप बन गेला। ढोलक असमन्जस में पड़ गया। सोंचा था इस बार बेटा होगा तो उसका नाम नेताजी के नाम पर रखेगा पर अब क्या करे!
 आखिर सोंच विचार कर ढोलक ने अपने बेटा का नाम गिरगिट रख दिया और नेताजी के  आने का इंतजार करने लगा।



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