22 दिसंबर 2013

बैंगन बेचबा गांव

जब भी कहीं रिश्तेदारी में गया लोग मेरे गांव (शेरपर) के बारे में यही कहते थे कि मेरा गांव तो बैंगन बेचबा गांव है। इसको लेकर चिढा़ते भी थे। कहते थे कि जब मेरे गांव कुटूम-नाता जाता है तो वहां के लोग बैंगन के खेत में काम करते ही नजर आते है और जब उनसे पूछा जाता है तो वे इस प्रकार जबाब देते है-
‘‘रिश्तेदार-क्या हाल चाल है कुटूम?’’
‘‘किसान-जी बैंगन में बहुत बीमारी लगल है।’’
‘‘रिश्तेदार-और घर-परिवर सब बढ़िया?’’
‘‘किसान-हां जी बैंगन इस साल कनाहा हो गया है।’’
समय बदला, अब मेरे गांव में बैंगन की जगह फूलगोभी की खेती होती है जिससे किसान अच्छी कमाई करते है। फूलगोभी किसानों के लिए वरदान की तरह है। एक बीघा फूलगोभी लगाने वाले किसान तीस से साठ हजार छः माह में कमा रहे है। सोंचता हूं मेरे गांव के पुर्वज बहुत समझदार होगें जो सब्जी की खेती करना बर्षों पहले सीख लिया था...


मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...