16 दिसंबर 2017

गौरी, एक प्रेम कहानी

गैरी

#अरुण साथी

गौरी के लव मैरिज का पांचवां साल हुआ है। तीन बच्चों को वह आज अकेले चौका-बर्तन कर संभाल रही है। पति ने छोड़ दिया है। उसी पति ने छोड़ दिया जिसके लिए गौरी लोक-लाज छोड़ा, माय-बाप छोड़ा, गांव-समाज छोड़ा। उसी पति को पाने के लिए आजकल वह थाना-पुलिस, कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रही है। इसी चक्कर में उसे आज फिर वकील साहब डांट रहे है।
"जब भतरा मानबे नै करो हउ त काहे ले ओकरा जेल से छोड़ाबे में लगल हीं।"

गौरी के पास जबाब था पर वह सिर्फ बेबस आंखों से वकील साहब को देखने लगी। गौरी की इसी बेबसी को देख हर कोई सहम जाता है। जाने गौरी की आंखों में ऐसा क्या है? पर कुछ तो है गौरी आंखों में। या कहें सबकुछ है। गौरी की बड़ी-बड़ी आँखों में समुंद्र हो जैसे। उसी समुंद्र में ज्वार-भाटे उठ रहे हो जैसे। गौरी की आंखों में प्रेम की एक गहराई भी हो जैसे। गहराई समुंद्र जितनी, जिसका थाह कोई ना ले सका। उसी गहराई में कहीं कोई ज्वालामुखी बसा हो और जो अचानक से, बिना किसी को बताए भयानक आवाज के साथ गड़गड़ाहट कर फट पड़ी हो। लावा चारों तरफ बिखर बिखर गया हो और उसी लावे में समाज, देश, धर्म, जाति सभी भष्म हो गए हों!

वकालतखाने में गौरी के साथ ही उसके तीनों बच्चे सहमे से चिपके हुए थे। गौरी का मन नहीं मानता है। बस यही तो जबाब है। गौरी पुलिस से आरजू मिन्नत कर पति को जेल तो भेजवा दिया पर पति को पुलिस गिरफ्त में देख उसका करेजा कांप गया। उसके आंख से आँसू झरने लगे। वह पति के सामने गयी तो पति भड़क गया। गंदी गंदी गालियां देने लगा।

"केतनो कर पर अब तोरा नै अपनइबउ। जेतना मजा लेबे के हलउ उ ले लेलिऔ। अब हमरो पत्नी हइ, बच्चा हइ। समाज हइ। हम्म बाभन तों शुदरनी। दुन्नु के मेल नै होतै!"

बस इसी बात पे तो गौरी का खून खौलने लगता है। लगता है जैसे कोई उसे ईंट के खलखल करते भठ्ठी में आधा गाड़ दिया हो या ज्वालामुखी का सारा लावा किसी ने उसे पिला दिया हो। उसका देह आग सा धधकने लगता है। वह हुंकार करने लगती है। दर्द भरी हुंकार। जैसे किसी ने उसे नहीं उसके प्रेम को चुनौती दी हो। वह गरजने लगी...

"जखने मजा ले हलहिं तखने शुदरनी नै हलिये। साथ सुत्ते में बाभन नै हलहिं। बियाह करे में मन लगलौ। तीन तीन गो ढेनमा- ढेनिया जन्माबे मन लगलौ। तखने तो कहो हलहिं कि तोर देह चन्दन नियर धमको हउ। अखने गमको हियौ। कोढ़िया! कैफट्टा! भंगलहबा!"

गौरी का गुस्सा फिर सातवें आसमान पे पहुंच गया। वह कांपने लगी।

( नोट- सच्ची घटना पे आधारित एक कहानी।)

शेष अगले क़िस्त में, इंतजार करिये..

चित्र गूगल देवता से साभार

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