22 दिसंबर 2017

ॐ घोटालाय नमो नमः.. अथ श्री घोटाला मंत्र

घोटाला एक काल्पनिक, सार्वभौमिक और राजनीतिक शब्द है..

घोटाला एक काल्पनिक, सार्वभौमिक और राजनीतिक शब्द है। इसका आविष्कार वैसे तो बहुत पहले ही हो गया था परंतु यह प्रचलन में बोफोर्स घोटाले से अधिक तब आया जब इस शब्द का प्रयोग राजनीतिक उपयोग के लिए किया जाने लगा। हालांकि चारा घोटाले के बाद यह सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ पर चारा घोटाले को समर्थक घोटाला नहीं मानते और विरोधी मानते है।


घोटाला मंत्र 

ॐ घोटालाय "नमो नमः" स्वाहा! ॐ हुयम ट्यूम "नमो नमः "टूजी स्वाहा! ॐ "नमो नमः" दामाद जी धरती हँसोताय "नमो नमः" स्वाहा!! ॐ सुखराम बाबाय अपना बनाय स्वाहा!! 

घोटाला का प्रभाव

घोटाला का प्रभाव बहुत प्रभावशाली होता है। खासकर तब, जब कि इसका उपयोग करनेवाला राजनीतिज्ञ बहुत ही प्रभावशाली हो तथा अपनी बुद्धि और विवेक इस्तेमाल कर वह घोटाले के बाद उतपन्न प्रभाव का लाभ उठाने की कला में परांगत हो।

घोटाले का इस्तेमाल

घोटाला का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल राजनीतिज्ञ करना जानते हैं। सबसे पहले यह पता लगाना होता है कि किसने घोटाला किया है। फिर उस घोटाले के तिल को ताड़ बनाना पड़ता है। साथ-साथ आपको राई का पहाड़ ही बनाना पड़ेगा। और जब राई का पहाड़ बन जाएगा तब आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

घोटाले का कुप्रभाव

घोटाले का सबसे अधिक कुप्रभाव आम आदमी पर पड़ता है। इसका इस्तेमाल करने वाले जानते हैं कि आम आदमी इमोशनल होता है और वह इमोशनल अत्याचार करने में माहिर खिलाड़ी। कभी-कभी घोटाले को वास्तविक बनाने के लिए कुछ नेताओं को जेल भी जाना पड़ता है। हालांकि उन्हें जेल में स्वर्गीय सुख भी उपलब्ध करा दिया जाता है।

घोटाले का दुष्परिणाम

घोटाले का दुष्परिणाम बहुत ही व्यापक और गंभीर होता है और यह उसी दीमक की तरह है जो दीमक बड़े बड़े दरख़्त को भी धीरे खोखला कर मिट्टी में मिला देता है। इसीका दुष्परिणाम है के आम आदमी वहीं के वहीं है और देश की अस्सी प्रतिशत धन कुछ लोगों के पास चला गया है।

घोटाले का सुप्रभाव

इसका सुप्रभाव आप अपने आसपास भी देख सकते हैं। कुछ लोग चंद दिनों में वहां पहुंच जाते हैं जहां वह आम आदमी के साथ उठने-बैठने, बोलने-बतियाने में कतराने लगते हैं। उनसे मिलने के बाद एरोप्लेन, अमेरिका, इंग्लैंड इत्यादि की बात करते है। उनसे मुलाकात करना उतना ही कठिन हो जाता है जितना कठिन मंदिर में भगवान से मुलाकात करना। बड़ी बड़ी गाड़ियों से चलते हुए ऐसे लोगों को देख मेहनत-मजदूरी करने वाला आदमी अपने अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर लेता है। और हाँ ऐसे लोग या तो राजनीति करते है या करने के लिए छटपटाहट में पाए जाते है।

घोटाले का संरक्षक

घोटाला एक सार्वभौमिक, काल्पनिक और राजनीतिक शब्द भले ही है परंतु इसकी पैठ सभी जगह है क्योंकि यह सार्वभौमिक और सर्वमान्य है। इसलिए हम किसी एक पर इसको स्थापित नहीं कर सकते। इसी की वजह से हम कह सकते हैं कि घोटाले का संरक्षक हम सभी बन जाते हैं। भले ही इसका एहसास हमें बाद में हो अथवा नहीं भी हो। इसके सबसे बड़े संरक्षक राजनीतिज्ञ होते हैं क्योंकि वे पटल पर आकर इसका संरक्षण करते हैं। राजनीतिज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में घोटाला एक सर्वमान्य, सार्वभौमिक शब्द है और इसकी अवहेलना अथवा अवमानना कर हम लोकतंत्र की चुनावी व्यवस्था में नहीं चल सकते जहां आम वोटर भी इसी घोटाले के प्रतिफल से उत्पन्न हरे-हरे अथवा अब गुलाबी या गेरुआ गाँधीजी प्राप्त कर सुख का अनुभव करते हैं।

घोटाले का निष्कर्ष

घोटाले का निष्कर्ष मघ्घड़ चाचा से सुनिये।
" सब मिले हुए हैं जी! ॐ घोटालाय नमो नमः.. अथ श्री घोटाला मंत्र का जाप और अपना तिजौरी भरो! देखे नहीं जमीन घोटाला वाला दामाद जी जेल गया! केजरू भैये ने शिला जी को जेल भेज दिया! सुखराम आज राम राम करने लगा! टूजी वाले के पीछे काहे पड़े है सब! जब घोटाला काल्पनिक है तो आप सब भी कल्पना कर लीजिए...का का पिलान बना होगा.. चुनाव हे जी...उनके राज में....कल्पना करिए..मस्त रहिये..बाकी राम राम जपना, पराया माल अपना...।"

#अरुण_साथी/22/12/17

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