06 मई 2018

गजब! टिटहीं रोग हुआ वायरल, दुनिया भर में लोग बीमार..आप भी चेकअप करा लीजिये...

आजकल मेरे जैसे ही कई लोग टिटहीं रोग के शिकार हैं। इस रोग के बारे में नहीं पता, घोर आश्चर्य! चेकअप करवाइए, हो सकता है आप भी इस के मरीज हो! यह बहुत तेजी से वायरल हुआ है और इस को फैलाने में मार्क जोकरबर्ग का सबसे बड़ा योगदान है। हां, एक और व्यक्ति का भारत में सर्वाधिक योगदान है, वह है जियो जिंदाबाद के नारा देने वाले, कर लो दुनिया मुट्ठी में करके जेब भरने वाले अंबा(नी) का। अभी भी नहीं समझे, कौन से रोग की बात हो रही है।

टिटहीं रोग!

यह बहुत ही प्रसिद्ध और पौराणिक रोग है। पहले यह गांव-देहात में दस कोस, बीस कोस पर एक-आध लोगों को होता था। देश और दुनिया भर में कुछ ही लोग पाए जाते थे। वैसे लोग को आगरा अथवा कांके नामक धर्मस्थल पे पूण्य लाभ कराया जाता था। अब भी नहीं समझे तो बड़े बुजुर्गों से पूछ लीजिए। वह बताएंगे।

खुलासा

गांव में एक टिटहीं नामक पंछी पाया जाता है। यह जब सोता है तब दोनों पैर को ऊपर कर लेता है। उसको लगता है कि यदि सोते हुए आसमान गिर गया तब तो सभी दबकर मर जाएंगे। इसलिए वह दोनों पैर को ऊपर कर लेता है। सोंचता है, यदि आसमान गिरेगा तो वह उसे रोक लेगा।

उदाहरण
हम सब फेकबुक और व्हाट्सवक पर यही तो करते हैं। बाकी कम लिखना, ज्यादा समझना, समझदारों की समझदारी है। ढक्कप्लेट टाइप के लोगों के लिए ज्यादा भी लिखना कुछ नहीं समझना है।

वैसे ही जैसे भैंस के आगे बीन बजाए, बैठे भैंस पगुराय। न तो मुझे बीन बजानी आती है और न ही आप भैंस हैं।

अच्छा! नहीं देखे हैं तो मेरे सहित बहुत से लोगों के प्रोफाइल खोल कर देख लीजिए। दिन-रात वे आसमान को रोकने में लगे हुए है। बहुत लोग है। भरे पड़े।

बहुत है जिनके प्रोफ़ाइल देखके आपके आँख में पानी आ जाएगा। गंधी महत्मा, भगथ सिह, बोस बाबा, बाबा साहेब,  सबकी आत्मा खिचड़ी की तरह इनमें समायी हुई दिखेगी।

कोई धर्म बचा रहा है। कोई शरीयत। कोई जाति बचाने को चिंतित है तो कोई धर्म स्थल! कोई गाय! कोई गीत! कोई राष्ट्रवाद! टटका तो और भी गजब है। जिन्ना को बचाने वाले कि प्रोफ़ाइल देख आपका दिल भर आएगा।

जय श्री राम के नारे लगाने वालों से प्रोफ़ाइल अटी पड़ी मिलेगी। जी हाँ! मर्यादापुरुषोत्तम की!

प्रोफ़ाइल देख के लगेगा स्वर्ग तो यहीं है। अलौकिक! अद्भुत! साधुओं से पटी हुई। संतों की दुनिया! दानियों की दुनिया! राम राज।

चेतावनी

चेतावनी है कि फेकबुक की दुनिया में ही रहियेगा, बाहर निकलना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। मर्यादापुरुषोत्तम की मर्यादा तभी बचेगी। भूल से भी गांव-शहर के कोचिंग वाली गली में मत जाईयेगा वरना आपको आत्महत्या करनी पड़ सकती है। एक जैसे चेहरे दिखने के बाद आपके पास उपाय भी कुछ नहीं बचेगा...

डिस्क्लेमर

नालियों में कहीं आपको बजबजाती, बदबूदार सड़ी हुई लाश मिले तो कुछ मत पूछियेगा वरना वह अपना नाम मानवता बता के आपको शर्मसार कर सकता है!

जे टिटहीं, जे हिन.. जे भारत...गन्हि महत्मा की जे..

जनहित में जारी

(यह एक टिटहीं का बकलोल वचन है। मजाक में लिखा गया। इसे सीरियसली लेना मना है। सीरियसली लेने से पूर्व सूचित करें वरना किसी घटना-दुर्घटना की जिम्मेवारी आपकी अपनी होगी।)

कार्टून गूगल देवता से साभार

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