05 सितंबर 2025

ओणम : केरल के पारंपरिक त्योहार में सहभागी होने का अनुभव

ओणम : केरल के पारंपरिक त्योहार में सहभागी होने का अनुभव

ओणम : राजा बलि को जब भगवान विष्णु ने वमन का रूप धर कर तीन पग दान में मांगे तो पहले पग में धरती, दूसरे में आकाश और तीसरे पग कुछ नहीं बचा तो राजा बलि में दान से पीछे नहीं हटते हुए अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने उसी समय उनको सदा सर्वदा धरती पर आकर अपनी प्रजा को देखने का वरदान दिया। 
उन्हीं राजा बलि के स्वागत में ओणम का त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन राजा बलि के धरती पर आने की मान्यता है। 

आज केरल के इसी परंपरागत लोक आस्था का पर्व में करीब से सहभागी बना। आयोजन बरबीघा के संत मेरिस इंग्लिश स्कूल में हुआ। जिले के कई आदरणीय उपस्थित हुए।
सनातनी परंपरा की पहली झलक तभी मिली जब छोटी सी बच्ची ने सभी आगंतुक को तिलक लगाया। दरवाजे पर रंगोली सजाई गई थी।

फिर, केरल की शिक्षिकाओं ने केरल की पारंपरिक लोक गीत पर पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें संत मेरिस इंग्लिश स्कूल की निदेशक दीप्ति के.एस. के साथ साथ आर्य,स्वाति जूना इत्यादि भी शामिल थी।
फिर उसके बाद सह भोज का आयोजन हुआ। मेरे लिए पहला अनुभव रहा! अनूठा और अप्रतिम! अहोभाव!
केला के पत्ता पर केरल की शिक्षिकाओं के द्वारा बनाए गए ओणम में पारंपरिक रूप से खाए जाने वाले व्यंजन परोसे गए। एक पर एक, लगातार व्यंजन आते गए। मैं नाम पूछता गया। उसमें नारियल, नींबू, केला, आदि की चटनी। पापड़ इत्यादि। 
फिर चावल आया। मोटा, लाल चावल। पूछने पर पता चल यह ब्राउन रईस जैसा कुछ कुछ केरल का ही है। आज यही बनता है। फिर सांभर। दही से बना कढ़ी। फिर पेय के रूप में सवाई, साथ में तीन चार पेय पदार्थ। 
मन अघा गया। यह एक अच्छा प्रयास रहा। बिहार की धरती पर केरल के लोग, केरल की सभ्यता और संस्कृति से हमे मिला रहे थे।

 बिहार में हजारों केरलवासी अभी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके हैं। उसी में है मित्र प्रिंस पी. जे. । आज उनके द्वारा एक सफल आयोजन रहा।

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