28 मई 2010

जाति आधारित जनगनणा देश को तोडनें की साजिश है कांग्रेस इसका सुत्रधार.

जाति आधारित जनगनणा देश को तोडनें की साजिश है कांग्रेस इसका सुत्रधार. एक बात तो साफ़ है कि कांग्रेस की मुखिया सोनीया गांधी को इस देस से वैसा ही प्रेम है जैसा इस्ट इंडीया कंपनी को भारत से था. और फ़िर अपने देश में जयचंद तो हमेशा से रहे है.

जहां एक तरफ आज देश को जोड़ने की आवश्यकता है वहीं बांटने की यह राजनीति चाल चल कर कांग्रेस ने अंग्रेजो की पॉलिसी फूट डालों और शासन करो की पॉलिसी को ही आगे बढ़ाने का काम किया है। जाति आधारित जनगणना अंग्रेजो ने 1871 तब कराया था जब उसे लगा  कि भारतवासी एक हो रहे हैं और इसे बांटना जरूरी है और इसी का परिणाम रहा की आज पाकिस्तान का जन्म लाखों भाईयों की लाश पर हुआ पर भला किसी का न हो सका। यह बांटने की राजनीति नही न्तो और क्या हे कि कांग्रेस अफजल गुरू सरीखे संसद पर हमला करने वाले को फांसी की सजा होने के बाद फंसी इसलिए नहीं देती की देश के मुस्लमान नराज हो जाएगें। भला हो वैसे मुस्लमानों का जिन्हें एक बार भारत माता को बांटकर सन्तोष  नहीं हुआ। मुझे तो आज तक एक बात समझ में नहीं आती की कांग्रेस को वोट कौन लोग देते है। क्या कांग्रेस को वोट करने वाले भी उतने ही गुनहगार नहीं जितना की कांग्रेस। आज मंहगाई, आतंकवाद और नक्सलबाद की समस्या खड़ी और भारत के प्रधानमन्त्री राहुल के लिए अपनी गददी छोड़ने की बात कहते है जैसे प्रधानमन्त्री की कुर्सी न हुई कांग्रेसी की बपौती जददी हो। अब तो बेशर्मी की हद हो गई जब अफजल गुरू ने कह दिया की मुझे जल्दी से फांसी दो या बाहर करो। भैया उसे बाहर करने की बात पर ही विचार हो रहा होगा और इसके लिए  प्लेन हाइजेक करने से लेकर अन्य योजनाऐं भी बनाई जा रही होगी बस इन्तजार करिए सामने आने की। कांग्रेस की विदेश नीति कैसी है कि कनाडा जैसा देश आंख दिखाता है और पदाधिकारियों को बीजा देने से इंकार करते हुए कहता है कि यहां की सैनिक बर्बर है।
पर अब तो इस देश में चुल्लू भर पानी भी नहीं बची की डूब मरने की बात हो अब तो इटाईन धुन पर हम सभी नाचते रहेगे और हमारे देश का मुखीया कथक करेगा।

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर अरुण साथी ताजिया को अपने कंधे पर उठाए मेरे ग्रामीण युवक बबलू मांझी रात भर जागकर नगर में घूमता रहा। ...