28 मई 2010

झमाझम बारिस

सुबह जैसे ही आंख खुली झमाझम बारिस ने मौसम खुशनुमा बना दिया. काले बदलों ने पूरे आकाश को अपने आगोश में ले लिया बिल्कुल अमावस्या की रात की तरह अंधेरा छा गया. प्यासी धरती खुशी से झूम गई. खेतों में पानी भर आया. किसान खेत की जुताई की तैयारी में जुट गये है. मैं भी धान के बिचरे लगाने वाले खेत की जुताई करबाने जा रहा हूं.

हिंसात्मक होते समाज का सच और आंखों देखा हाल..

अरुण साथी सड़क हादसे में मौत के बाद जो मंजर आजकल विभिन्न जगहों पे देखने को मिलती है वह बहुत ही डरावना और भयावह है। किशोर और युवा इसमें बहुसं...