28 मई 2010

झमाझम बारिस

सुबह जैसे ही आंख खुली झमाझम बारिस ने मौसम खुशनुमा बना दिया. काले बदलों ने पूरे आकाश को अपने आगोश में ले लिया बिल्कुल अमावस्या की रात की तरह अंधेरा छा गया. प्यासी धरती खुशी से झूम गई. खेतों में पानी भर आया. किसान खेत की जुताई की तैयारी में जुट गये है. मैं भी धान के बिचरे लगाने वाले खेत की जुताई करबाने जा रहा हूं.

एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...