28 मई 2014

आप आये तो आंखें में नमी क्यूं है..

आपके इंतजार में उदास थी आंखें।
आप आये तो आंखें में नमी क्यूं है।।

मोहब्बत तो खुदा की नेमत है।
फिर आदमी में इसकी कमी क्यूं है।।

गीता और कुरान का पैगाम तो मोहब्बत है।
फिर उन्हीं पन्नों पे धूल सी जमी क्यूं है।।

दिनों-ईमां से बढ़कर कोई मजहब नहीं होता।
फिर मजहबी जलसो में हुजूम क्यूं है।।

अरे साला रिक्शा

अरे साला रिक्शा नगर के जाम में रिक्शा के आगे अपनी बाइक लगा कर जाम लगाने के अपराधबोध से मुक्त युवक ने सीधा सीधा रिक्शा चालक को गाली देनी शुर...