17 सितंबर 2014

तुम आदमी क्यों नहीं हो….

उस दिन
जब मार दिया जायेगा
वह आखरी आदमी भी
जो कर रहा है संघर्ष
गांव/मोहल्लों
गली/कूंचों
में रहकर,
अपने आदमी होने का….

तुम बैठ कर सोंचना?
आखिर
आदमी की तरह
दिखने पर भी
तुम आदमी क्यों नहीं हो….

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जो लोग अपने मां—बाप को प्रेम दे पाते हैं, उन्हें ही मैं मनुष्य कहता हूं..

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