15 नवंबर 2016

मोदी डाल-डाल तो कालाधनी पात-पात, देखें कौन किसको देता है मात! "कालाधनी" ने खोजा चोर दरवाजा, आम आदमी को लाइन में लगाया!

मोदी डाल डाल तो कालाधनी पात पात, देखें कौन किसको देता है मात!

"कालाधनी" ने खोजा चोर दरवाजा, आम आदमी को लाइन में लगाया!

"अरुण साथी"

विपक्ष का यह तर्क की कालाधन वाले कहीं लाइन में नहीं है? आम आदमी ही लाइन में है। विपक्ष यही आम आदमी से मिलकर यह बयान देता तो शायद बात उलटी होती। आम आदमी कष्ट के बाद भी खुश है, अपवाद छोड़कर। ऐसा है क्यों..?

बैंक के लाइन में लगे गरीब-गुरबा लोग गुस्सा दिखाते है पर अंत के यह कहके खुश हो जाते है कि कालाधन वापस आएगा..तो देश मजबूत होगा! हालांकि आम आदमी मेरी ही तरह अर्थशास्त्री नहीं है पर उनको लगता है इससे कालाधन निकलेगा..। और उसी लाइन में वह वे दिहाड़ी मजदूर भी है जिनको कालाधनी लोग दिहाड़ी देकर नोट बदलने के लिए लाइन में लगा दी है। बैंकों में कोलाहल हल्का हुआ..! लोग स्वीकार कर चुके है।

खैर
कालाधन के बड़े बड़े मगरमच्छ कालाधन को खपाने का चोर दरवाजा खोज लिया गया है। हो सकता है इसी बहाने कालाधन सफ़ेद हो जाये। बड़े बड़े मगरमच्छ टैक्स सलाहकार से चोरी का उपाय पूछ रहे है। इसी उपाय के तहत अब बड़े बड़े कंपनी, कारखानों के मालिक अब अपने मजदूरों को एक साल या छः माह की सैलरी कैश में दे रहे है। बिहार के कई मजदूरों के परिजन गांव में खुश है। कुछ "कालाधनी" मजदूरों को दिहाड़ी देकर पैसे को बदलने के लिए भेज रहे है।

बृद्धाश्रम छोड़ आए माँ का आदर बढ़ गया और उनके खाते में नोट जमा हो गए, यह आश्चर्य नहीं तो क्या है?

बड़े बड़े कालाधनी नेता-मंत्री भी चोर दरवाजे से कालाधन खपा रहे है। रिश्तेदार, व्यवसायी, और विश्वसनीय कार्यकर्ताओं को पैसे का बंडल थमाया जा रहा! इसका अर्थशास्त्र पर क्या असर होगा और कालाधन वापस आयेगा या सफ़ेद होगा, मेरा माथा काम नहीं करता।

मेरे यहाँ भी कालाधनी नेता कालाधन खपाने के लिए निरीह जनता को मोहरा बना लिया है। उनको दिनभर की मजदूरी दी जाती है और बेचारा आम आदमी लाइन में लगकर 4000 का कालाधन सफ़ेद कर आ जाता है। कुछ अपने खाते में लाख भी जमा कर रहा है, बाद में निकाल कर देने के भरोसे..।

आम आदमी को इससे क्या फर्क पड़ता है कि यह पैसा उनके ही चूसे खून का है, सो श्री मान बड़े बड़े नेता जी जिस भीड़ का आप हवाला दे रहे है वह आपका ही लगाया हुआ भीड़ है। जो आम आदमी भीड़ में दिख रहा है वह आपने भी जमा किये है..!

कुछ मगरमच्छ खुलेआम 20 से 40 प्रतिशत पे कालाधन खपाने में जुट कर मोटी कमाई कर रहे है। उधर एक विश्वस्त व्यपारी की माने तो चना दाल की कीमत पर लगाम लगाने के लिए जब मोदी जी विदेश से दाल निर्यात किया तो भाव तो गिरे पर कालाबाजारी फिर उस दाल को कालाधन से कालाबाजार में जमा कर लिया, मोदी जी को उसी समय कालेधन की माया समझ में आ गयी।

फिर भी, कालाधन का यह अर्थशास्त्र आम आदमी नहीं समझ पा रहा। आम आदमी ने मोदी जी की बात पे भरोसा किया है। यह भरोसा टूटेगा या रहेगा, भविष्य की गर्त में है।

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर

वोट बैंक में बदला धर्म लोकतंत्र का जहर अरुण साथी ताजिया को अपने कंधे पर उठाए मेरे ग्रामीण युवक बबलू मांझी रात भर जागकर नगर में घूमता रहा। ...