23 सितंबर 2020

जयंती पर विशेष: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की कर्मभूमि है यह धरती। यहां बने पहले प्रधानाध्यापक, मिलता था 41 रूपये वेतन

अरूण साथी

बिहार के शेखपुरा जिले को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का कर्मभूमि कहा जा सकता है। शेखपुरा जिले के बरबीघा उच्च विद्यालय से उन्होंने अपने कर्म यात्रा शुरू की। इस उच्च विद्यालय के संस्थापक प्रधानाध्यापक बने।यहां ₹41 प्रति महीना पर नौकरी किया। यहां से फिर वे शेखपुरा जिला मुख्यालय के कटरा चौक स्थित कार्यालय में रजिस्ट्रार की नौकरी की। 8 सालों तक अपनी सेवा दी। हालांकि दोनों स्थानों पर दिनकर की स्मृतियों को विस्मृत कर दिया गया है। उच्च विद्यालय बरबीघा का नामकरण दिनकर जी के नाम पर करने की मांग सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की गई थी। यह भरोसा और वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। जबकि 8 सालों तक जिस रजिस्ट्री ऑफिस में दिनकर जी ने अपनी सेवा दी उस रजिस्ट्री ऑफिस के पुराने भवन को ध्वस्त कर दिया गया। कटरा चौक पर संचालित सब्जी मंडी बना दिया गया । राष्ट्र की इस धरोहर को इस तरह से ध्वस्त करने की वजह से साहित्यिक खेमे में नाराजगी भी रही परंतु नगर परिषद शेखपुरा के द्वारा इसे ध्वस्त किया गया था। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने हिमालय नामक कविता रचना बरबीघा की धरती पर रह कर ही की थी।



दिनकर जी का जीवन

राष्ट्रकवि दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय के सिमरिया गांव में हुआ था। उनके पिता एक साधारण किसान थे जिनका नाम रवि सिंह था। 2 वर्ष की उम्र में ही दिनकर जी के पिता का देहांत हो गया था। 24 अप्रैल 1974 को दिनकर जी का निधन हो गया।

प्रधानाध्यापक रहे दिनकर जी

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर प्लस टू हाई स्कूल बरबीघा में प्रधानाध्यापक पद पर रहते हुए यहां के बच्चों को पढ़ाया। रामधारी सिंह दिनकर 3 जनवरी 1933 को बरबीघा हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक बने तथा 21 जुलाई 1934 को उन्होंने यह नौकरी छोड़कर शेखपुरा में रजिस्ट्रार की नौकरी कर ली।

बरबीघा में प्रधानाध्यापक पद पर सुशोभित करते हुए उन्होंने अपनी यादों को संजोया है। रामधारी सिंह दिनकर हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर रहते हुए 60 रुपये महीने की नौकरी दी गयी थी तथा अन्य तरह के कटौती करते हुए 41 रुपैया 10 आना और तीन पैसा उनको महीने का दिया जाता था।

रामधारी सिंह दिनकर बरबीघा के रामपुर सिंडाय गांव में 2 किलोमीटर पैदल चलकर बाबू मेदनी सिंह के यहां रहते थे तथा वही कविता लेखन और घर के बच्चों को पढ़ाते भी थे।

शेखपुरा में बने रजिस्ट्रार, स्मारक ध्वस्त

1934 से लेकर 1942 तक रामधारी सिंह दिनकर शेखपुरा में सब रजिस्ट्रार के पद पर कार्य किया तथा वे यहां से जुड़े रहे। हालांकि शेखपुरा कटरा चौक के पास पुराने रजिस्ट्रार ऑफिस को प्रशासन के द्वारा कुछ साल पहले ही ध्वस्त कर दिया गया और अब उनकी यादों को यहां देखने वाला कोई नहीं है।

लाला बाबू एक दधीचि

रामधारी सिंह दिनकर ने अपने संस्मरणों में बरबीघा के बारे में कहा है कि बरबीघा में लाला बाबू एक दधीचि के रूप में हैं और देशभक्ति का बाण इनकी हड्डी में बिछा हुआ है। दिनकर जी ने कहा कि बरबीघा एवं इसके आसपास सामंती मानसिकता के लोगों से भरा पड़ा है। यहां रहने वाला छोटे जमींदार भी नकली जीवन जीने के आदी हैं।

मध्यान भोजन की रखी थी नींव

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने बरबीघा हाई स्कूल में नौकरी करते हुए मध्यान भोजन की आधारशिला रख दी थी जो आज भी लागू है। प्रसंग यह था कि एक छात्र टिफिन के दौरान खाने के लिए घर चला गया और लेट से लौटकर आया तो शिक्षक ने उसकी पिटाई कर दी। इससे मर्माहत होकर रामधारी सिंह दिनकर ने टिफिन के समय स्कूल में ही हल्के नाश्ते की व्यवस्था कर दी। जिसमें चना, चूड़ा, भूंजा इत्यादि शामिल था जो आज तक चल रहा है।

नहीं हुआ दिनकर जी के नाम पे नामकरण

बरबीघा हाई स्कूल में दिनकर जी की आदमकद प्रतिमा का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा सेवा यात्रा के दौरान किया गया था। बरबीघा में उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने लोगों के मांग पर हाई स्कूल का नाम रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर करने का आश्वासन दिया था परंतु अभी तक यह आश्वासन अधूरा है।





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