सबका हिसाब होगा...!
"गंभीर चिंता का विषय है। भला ऐसी कोई सरकार होती है। छप्पन इंच का सीना तो मुहावरा निकला। उससे पहले दशमलव लगा हुआ है।"
"बोलिए तो पुलिस को लतियाया, महिला पुलिस को उकसाया, नेता को गरियाया, तब भी चुप्पी है। ऐसे, कैसे लोकतंत्र चलेगा।"
युवा नेता खेलावन काका से अपना दर्द साझा कर रहे थे।
काका ने भी चमचागीरी की। बोले,
"सही कहे बेटा। इतना में तो लाठी पीठ पर चित्रकला का प्रदर्शन होना चाहिए। हाथ, पैर के हड्डी का विभाजन तो स्वाभाविक होता। और आंसू गैस तो छोड़िए, बंदूकें गरजती। पर सब चुप है। यह बड़ी साजिश लगती है।
युवा नेता बोले,
"हां काका। चिंता का विषय है। खैर, मेरी सरकार आने दीजिए, सब याद रखा जाएगा, सबका हिसाब होगा...!"
अरुण साथी (व्यंग्य)
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