01 मार्च 2014

प्रेम का ज्वारभाटा..
















जब जिम्मेवारी
सामाजिक प्रतिष्ठा
आत्मिक नैतिकता
चारित्रिक पतन

पतीत माने जाने का डर

सब हो, तब भी
ज्वारभाटे की तरह
आकांक्षाऐं मचल उठती है
ओह.......

गहरे समुद्र में ही तो
उठता है ज्वारभाटा....
और डूब जाती है
प्रतिष्ठा/नैतिकता/पाप/पुण्य
की क़िश्ती
कागज़ की नाव की तरह

शेष रह जाता है
नैसर्गिक सत्य.....

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