06 मार्च 2014

मजदूरनी





















देखना तुम
ये घर मैं बना रही हूँ
इंट-गारे के साथ
अपना पसीना मिला रही हूँ..

बताउंगी किसी अपने को
की ये जो दूर से चमक रहा है
इस घर को मैंने बनाया है...


चाँद सिक्के दे
भले ही तुम भूल जाओ मुझे बाबू
पर मैं हमेशा याद रखूगी इस घर को...

(मित्र के बन रहे मकान पे काम करती इस मजदूरनी को देख मुझे लगा की वह यही कह रही है....)

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