22 नवंबर 2014

कनकट्टा (मगही व्यंग्य रचना ) दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित

दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित 
(पटना 26/11/14)
जहिना से सोशल मीडिया के जमाना अइलो हें तहिना से भगत और भगवान के मतलबे बदल गेलो हें। अब त सब अप्पन अप्पन भगवान और अप्पन अप्पन भगत गढ़ ले हो। अब त जमाना चैटिंग और डेटिंग के है सेकार से ही भगवानों से सीधे चैटिंग हो जाहो और भगत सब फुलके कुप्पा हो गेलो।



अब सोशल मीडिया के बात करभो त हियां तो चिटिंग करे वला के बड़ाय लुटो हल अ इमान से रहे वला के कोइ नै पूछछो हय। अब कि कहियो, विश्वास नै हो त एगो सुन्दर, सुशील और हाॅट कन्या के नकली प्रोफाइल बना के सोशल मीडिया पर डाल दहो, फेर देखहो...। दस साल सोशल मीडिया के जंगल में जेतना तपस्या कलहो हल सब तुरंतें टूट जइतो। कइगो संत, महात्मा ई मेनका के मोह पास में फंस के अपन्न अपन्न तपस्या भंग कर देताकृताबड़तोड़ फ्रेंड रिक्वेस्ट औ काॅमेंट के भरमार हो जइतो।


अब नामी गिरानी कवि महाराज सब के कविता पर नै एगो लाइक मिलतो औ नै ए गो काॅमेंट अ उहे कविता के इ सुकन्या के प्रोफाइल से डाल के देखहो..त तोड़ा अपप्न मरदाना होबे पर लाज लगतो....। लगतो कहे नै, देखभो कि कैसे सब मर्दाना जिलप्पक नियर एक से एक लच्छेदार बात काॅमेंट लिखे लगतो....।


अब ऐकरे से सोंचहो! जमाना तो कट-पेस्ट के है से हे से कब तोरे लिखल रचना कब तोरे पास दुश्मन, दोस्त के रचना बनके तोरे पास आ जाइतो कहल नै जाहो।


कमाले है कि नै है! औ ऐसने चैंटिंग-चिटिंग के जमाना में भगत सब भगवान के जयकार ऐसे कर रहला है जैसे ग्यारहवां अवतार उहे हका...। भोर से सांझ तक जन्ने देखहो ओन्ने उनकरे जयकारा हो रहलो है। एकदम भेंडि़याधसान हो गेलो है। तीर्थयात्री नियर सब जय जय कर रहल है। वैसने, जैसन कान कटैला पर भगवान मिलतो के फेरा में समूचा गांव कान कटा लेलक......अब सब कनकट्टा हो गेल हैं अब के केकार कनकट्टा कहतै। जय जय जय जय जय... जयकार करहो..... भुखल पेट कत्ते दिन भजन होतई.. देखहो...।

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