30 नवंबर 2014

भेंड़ियाधसान..


जॉन्सन बेबी के युग में दो शब्द इस बच्चे के लिए आपके पास हो तो कहे जो चिलचिलाती धुप में , धान के खेत में,  धान के पातन पे बैठा है । यह अफ्रीका का नहीं , भारत का ही बेटा है ..जिस धान पे यह बैठा है इतना धान भी मालिक इसे लेने नहीं देता और माँ कहती है की -"बुतरू के दूध पिए ले दे दहो .."

जब मैं फोटो लेने लगा तो इसकी माँ बोली- "काहे ले फोटुआ खींचो हो, कुछ मिल्तै की..."

क्या जबाब देता..इस सोशल मिडिया में  इन गंभीर मुद्दों पे सन्नाटा सा छा जाता है, शायद हम शर्मा जाते है...चलो शर्म तो बाकि है !













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भेंड़ियाधसान
भागमभाग
आपाधापी
गलकट्टी
से बहुत कुछ
पा लिया हमने....

बस गंवा दी
अपनी संवेदनाऐं
अपना शर्म
अपनी हया
अपने आंख का पानी
अपनी आदमियत...

सोशल मीडिया छोड़ो सुख से जियो, एक अनुभव

सोशल मीडिया छोड़ो, सुख से जियो, एक अनुभव अरुण साथी पिछले कुछ महीनों से फेसबुक एडिक्शन (सोशल मीडिया एडिक्शन) से उबरने के लिए संघर्ष करना पड़ा...