04 दिसंबर 2014

घृणा, उग्रता, जाति-धर्म और हिंसात्मकता दिखती है सोशल मीडिया पर..

सोशल मीडिया वौज्ञानिकता का प्रतीक है पर आज यहां घृणा, जाति-धर्म और हिंसात्मकता ही दिखती है। रामजादे-हरामजादे और मरीच के रूप में घृणा के बोल निकल रहे है और उसके समर्थन में एक बड़ा वर्ग सामने आ रहा है। 

युवाओं के जहर बुझे बोल है, एक कौम विशेष के लिए आग बरस रही है। सेकूलर होने पर गाली दी जा रही है। यह भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हमारा देश और इसका जनमानस सेकूलर है, (छद्म सेकूलर नहीं)  और आम आदमी सभी जाति और धर्म के लोगों के साथ मिलकर रहते है। उसी के साथ उठते-बैठते, हंसते-बोलते है। हां छद्म सेकूलरों ने इस छवि को धुमिल किया है, इससे भी सहमत हूं। 

अब सचमुच में लगने लगा है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनना भले ही विकास की नई रौशन ले कर आने वाली साबित होगी पर उसी रौशनी से कुछ लोग देश के सेकूलर छवि को जला देना चाहते है, आग लगा देना चाहते है। तब सच्चे सेकूलरों को आगे आकर इसका डटकर विरोध करना चाहिए, मैं अपना विरोध दर्ज कराता है। 

आज जब हम आधुनिक युग में जी रहे है वैसे में मानवता, आदमीय, प्रेम और भाईचारा से बढ़ कर कोई धर्म नहीं हो सकता, कोई धर्म नहीं...

एचएम और शिक्षक सरकारी स्कूल में पी रहे थे ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर

सरकारी स्कूल में नशीला पदार्थ आया ताड़ी, शिक्षक ने मिलाया जहर शेखपुरा बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल है। सरकारी स्कूल में प्रधानाध्...