08 फ़रवरी 2016

एक और कबीर इस दुनिया को अलविदा कह गए..... निदा फाजली को श्रद्धाजंलि

एक और कबीर इस दुनिया को अलविदा कह गए..... निदा फाजली को श्रद्धाजंलि
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मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये
अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना
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संयोग कहिए कि आज जगजीत सिंह की जयंती के दिन ही निदा फाजली ने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। एक संयोग यह कि भी आज सुबह दस बजे से जगजीत सिंह पे लिखी पोस्ट को फेसबुक पे पोस्ट करना चाह रहा था और फोटो अपलोड नहीं हो रही थी। अंततः जब पोस्ट किया तो उसी के साथ ही निदा फाजली के जाने की खबर मिली। गमगीन खबर। आज के समय में शायद ही उनके जैसे दिलो दिमाग पे चोट करने वाले शायर और कवि फिर कोई मिले...बिल्कुल कबीर की तरह मन की गहराई पे चोट करते थे.....कितने ही गजल गायकों को इनकी लिखी गजल ने बुलंदी तक पहूंचाया...श्रद्धाजंलि स्वरूप उनकी एक रचना...

जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना

यूँ उजालों से वास्ता रखना
शम्मा के पास ही हवा रखना

घर की तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने की जगह रखना

मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये
अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना

मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना

मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...