09 फ़रवरी 2016

ढेंकी

ढेंकी,
यही नाम है इसका। पुराने ज़माने में चावल और चूड़ा इसी से बनाया जाता था। इसके लिए महिलाएं हाड़तोड़ मेहनत करती थी।

मैंने माँ और दादी को इसपे मेहनत करते देखा है और इसपे बने चूड़ा का स्वाद भी लिया है, उसकी मिठास आज मुँह में आज भी बरक़रार है...

आपने देखी है क्या?

गुरुदेव ओशो ने मुझे आदमी बनाया..

गुरुदेव ओशो ने मुझे आदमी बनाया...गुरु पूर्णिमा पे नमन #ओशो (अरुण साथी) किशोरावस्था में गुरुदेव #ओशो आशीर्वाद मुझे "मिट्टी का दीया&quo...