01 जून 2018

आज भी है बंधुआ मजदूर

#बंधुआ_मजदूर #विदेसिया

विदेश गए मजदूर घर लौट रहे है। पलायन की कहानी यह तस्वीर कहती होगी। पढिये इसको को। यह पूरी की पूरी किताब है। कमाने के लिए पंजाब, गुजरात जाने वाले मजदूर विदेश अथवा देश जाना कहते है। सीजन ऑफ हो रहा है और मजदूर लौट रहे है।

आज भी मजदूर बिकते है। इसके कारोबार करने वाले मालामाल है। बोली लगती है। एडवांस देकर खरीद लिया जाता है। ज्यादातर मजदूरों की खरीद बिक्री करने वाले उनके अपने स्वजातीय है। करोड़ो का कारोबार है। मजदूर खून जला के कमाते है और कमीशन के रूप में उनके खून के सने कुछ पैसे इन कारोबारियों को मिलता है। इनको भी ठेकेदार कहते है या मेठ। मजदूर की बस्तियों में ये ठेकेदार अब फॉरच्यूनर गाड़ी से नजर आ जाएंगे..

खैर!
विकास बेटा तो झमाझम बुलेट ट्रेन पे चढ़ के स्मार्ट सिटी घूमिये रहिस है..अपुनका का है, मजे लीजिये हाइवे का। अउ राम राम जपिये..

एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...