21 जून 2018

योग यात्रा और जीवन

#Selfi on #Yoga #गाँव के #खेत से लाइव

साल, दो साल से #योग #ध्यान छूट गया। जीवन की आपाधापी में जब रोजी-रोटी, घर-परिवार, बाल-बच्चे की चिंता होने लगती है अपनी चिंता चूक ही जाती है। एन्ने देखो, ओनने अंधार, ओनने देखहो एन्ने अंधार। जीवन मे सबकुछ एक साथ कोई साधक ही साध सकता है या फिर सम्पन्नता प्राप्त व्यक्ति।

मुफ़लिसी के यात्री को हमेशा रोटी पहले दिखती है बाकी सब बाद में। खैर!!

योग से बस्ता स्कूल जीवन से ही रहा है। बभनबीघा हाई स्कूल में कामदेव सर करांची की छड़ी लेकर जबरदस्त योग करवाते थे। उस समय का सीखा योग जीवन भर याद है। बहुत दिन किया भी। बाद में आचार्य ओशो की पुस्तकों के सानिध्य से ध्यान का भी महत्व समझा। व्यक्तिगत अनुभव बहुत उत्साहित करने वाला रहा। योग और ध्यान नियमित रूप से कुछ दिन ही करने पे सकारात्मक परिणाम मिलने लगता है। कमर दर्द और सायनस की समस्या को योग से ही ठीक किया है। तनाव मुक्ति का रामबाण है योग।

योग वास्तव में अमृत है। बस हम नियमित करें। हालांकि अब योग राजनीतिक भी हो गया है। हिन्दू और मुसलमान हो गया है। सब राजनीतिक बातें है। योग सबके लिए है। इसे धर्म से बांधना मनुष्यता को कलंकित करना है।

खैर! विश्व योग दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की गौरव और गरिमा में जोड़ा गया एक सितारा है। व्यवसायिक ही सही बाबा रामदेव ने भी जन जन तक पहुंचाया है। सबसे बढ़कर। मेरे पुराने जिले मुंगेर के बिहार योग विद्यालय का योगदान अतुलनीय है। बस इनका योग आम लोगों की पहुंच में नहीं है।

देखते है आज से शुरू किया गया योग कितने दिनों तक नियमित रख पाता हूँ...

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