25 जुलाई 2018

मॉब लिंचिंग

मॉब लिंचिंग
(अरुण साथी)

हत्यारा वही नहीं
जिसने पत्थरों से
कूच कूच कर
मार दिया
आदमी को

हत्यारा वह भी है
जिसने बहते लहू
को चंदन बनाया
माथे पे लाल
टीका लगाया

हत्यारा वह भी है
जिसने रक्त सज्जित
महिषासुर को
फूल-माला पहनाई
गले लगाया

हत्यारा वह भी है
जिसने काफिरों की
हत्या पे मुस्कुरा कर
खामोशी ओढ़ ली
और स्वधर्मी हत्या पे
चीखा-चिल्लाया
आंसू बहाया
मानवता की हत्या बताया

तथाकथित छद्म
सभ्य समाज में
हम सब हत्यारे
मिल जुल कर रहते है
अपने अपने धर्म के
हत्यारे को सही कहते है

आओ आओ
हमसब हत्यारे
मानवता की
हत्या का
जश्न करते है

हम तुम्हारी
तुम हमारी
हत्याओं को
गलत कहते है

एक भूमिहार ब्राह्मण रमेश सिंह भला भूख से कैसे मर सकता है...? सबका यही सवाल..

( मैं हूँ ट्विटर पे @arunsathi ) घटना उद्वेलित भी करती है और उद्विग्न भी। मंगलवार की शाम जब यह खबर मिली की भूख और आर्थिक तंगी की वजह से शे...