18 अप्रैल 2010

``भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां क्रिकेट की फसल लहलहाएगी´´

रेडियो मिर्ची पर आईपीएल का 
विज्ञापन इस तरह से आता है 

``भारत एक कृषि प्रधान देश है
यहां क्रिकेट की फसल लहलहाएगी´´

हां भाई.... 

अब हमलोग बैड-बॉल खाऐगें
स्टेडियम की पीच पर
चीयर्स गर्ल के साथ चौकोें-छक्कों से नहाएगें 
अपने मोदी डायमण्ड का 
टॉयलेट सीट बनाएगें 
तेन्दूलकर-धोनी अब भगवान कहलाएगें
मन्दीरों में ये पूजे जाएगें
बेचारा आम आदमी
आईपीएल महायज्ञ में
गांधी छाप चढ़ावा
दनादन चढ़ाऐगें 
फुटपाथ पे पेट पकड़ 
रामदीन और धनश्याम सो जाएगें



11 अप्रैल 2010

पुरूष की जगह महिला तो महिला की जगह पुरूष की लगायी तस्वीर, मतदाता सूची बनाने वाली संस्था कर रही है जानबुझ कर परेशान, बीएलओ परेशान, गांव में जाने से डर रहे बीएलओ।

बिहार सरकार के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन का पूरा महकमा कई बैठकें आयोजित कर फोटो मतदाता सूची सुधारने को लेकर परिश्रम करते है और बच्चों की शिक्षा वाधित कर इस काम को मुकम्मल करने की कवायद होती है पर लगातार दो तीन सालों में सुधार की इस प्रक्रिया में सुधार होता ही नही। आलम यह कि जिस गलती को सुधारने के लिए सारी कवायद की जाती है और महीनों परिश्रम किया जाता है सुधार के बाद जिला प्रशासन के द्वारा जारी फोटो मतदाता सूची वही गलती रह जाती है और ऐसा किसी तकनीकि गलती की वजह से नहीं रहती बल्कि जिसके द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया जाता है वह जानबूझ का गलती को सुधारना ही नहीं चाहता। ऐसा इसलिए कि निविदा के आधार पर चलने वाले इस काम को यदि सुधार कर ठीक कर दिया जाएगा तो फिर उनका काम बन्द हो जाएगा। निविदा पर काम करने वाले की इस मानसिकता की वजह से ही लगातार तीन बार मतदाता फोटो सूचि सुधारने का काम किया गया है पर नतीजा शिफर ही रहा। निर्वाचन आयोग के द्वारा चलाए जा रहे फोटो युक्त सूची बनानेके इस अभियान को निवाद पर काम करने वालों के द्वारा टांय टांय फिस्स कर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं इसको लेकर ंशुक्रवार को हुए मतदाता सूची सुधारने की बैठक में शिक्षकों ने अपना रोष जताया। सुधार कर जो सूची जिला के द्वारा जारी किया गया उसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। महिला के नाम की जगह पुरूष का तस्वीर तथा पुरूष के नाम की जगह महिला की तस्वीर चस्पा कर दिया गया है। इतना ही नहीं एक ही तस्वीर को 12 नामों के जगह लगा दिया गया। बहरहाल यह कवायद एक बार फिर से चलाया जा रहा है पर बीएलओं को इस आर लोगो के गुस्सों को झेलना पर रहा है पर इसका आसर कुछ नहीं दिखता।






06 अप्रैल 2010

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया।

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना कें बाद जहां गृहमन्त्री मुंहतोड़ जबाब देने की बात कह रहे है वहीं शहीद जवानों की इस तरह हो रही हत्या की जिम्मेवारी लेने वाला कोई नज़र नहीं आता। गृहमन्त्री चिदबरंम मिडिया कें माध्य से हमेशा यह बयान देते रहे है कि नक्सलीयों निवटा जाएगा पर 81 जवानों को सुनियोजित तरीके से घेर कर 74 जिस तरह हत्या कर दी और उनके  हथियार लूट लिए गए लगता है कि गृहमन्त्री महज जुबानी जमा खर्च के सहारे नक्सली से निवटने की बात करते है। यदि ऐसा नहीं तो धंटों चले इस मुटभेड़ में कोई सहायाता नहीं पहूंचना और 1000 हजार नक्सली को गुम हो जाना क्या बताता है।  क्या ऑपरेशन ग्रीनहंट  जवानों को शहीद करने के लिए चलाया गया है। 

05 अप्रैल 2010

दलित टोले के स्कूल भवन को बनने नहीं दे रहे गांव कें ही दबंग.

शेखपुरा-दलितों के विकास को लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बात भले ही कही जाती रही हो पर दूर-दराज के गांवों में आज भी दलितों के हितों की बात सुन कर गांव कें ही सम्पन्न लोग इसका विरोध करने लगते है। ऐसा ही एक बाकया हुआ है जिले के घाटकोसुम्भा प्रखण्ड कें सहरा गांव में। इस गांव में विद्यालय भवन बनाए जाने की स्वीकृत तीन साल पूर्व ही सर्वशिक्षा अभियान के तहत हो गई थी पर तीन साल के बाद आज तक यहां भवन नहीं बन सका वह भी गांव के ही दबंग ग्रामीणों के विरोध की वजह से। मामला इतना  बढ़ गया की हार कर दलितों ने आज समाहरणालय पर विद्यालय भवन बनाने को लेकर प्रदशZन किया तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। 
सहरा गांव दूर दराज टाल ईलाके में बसा हुआ है यहां आज तक विकास की रौशनी नहीं पहूंची है। यह गांव पिछड़ों की बहुलता बाला गांव है और साथ ही कुछ घर दलितों के भी है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत यह विद्यालय भवन बनाए जाने की बात हुई और उसकी स्वीकृति  भी हो गई और ठेकेदार यहां भवन बनाने के लिए भी गया पर पिछड़ी जाति के लोग यह जानकर भड़क गए कि दलितों कें  टोले में विघालय बनेगा और गांव वालों ने मिलकर तीन बार ठेकेदार को खदेर कर भगा दिया और स्कूल भवन दलितों के टोले में नहीं बनने देने की बात पर अड़े हुए है।

02 अप्रैल 2010

सानीया और शोएब की शादी टुटने में कितना वक्त लगेगा?


सानीया मिर्जा ने जब से शोएब मिल्लक से शादी की बात कही है हंगामा मच गया। नौजावानों को तो खैर हक है हंगामा करने का पर अस्सी के दद्दू भी हंगामा कर रहें है। करना भी चाहिए, आखीर सानीया ने एक बार भी नहीं सोंच की पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है और भारत की सेलिब्रेटी होकर भी उसने पाकिस्तानी से शादी करने की सोच ली। पर बात इतनी नहीं है। सानीया चाहे पाकिस्तानी से शादी करती या भारतीय से लोगों को क्या मिलना था। पर जनाब लोग तो दिवानें होते है और वे किसी के भी फटे में टांग अड़ाना खुब जानते है। लोगों को पता है अब सानीया की तस्वीर कम्प्यूटर के स्क्रीन से लेकर मोबाइल तक पर लगाने में उनको मजा नहीं आएगी। सानीया का बॉलपेपर अभी नंबर एक पर है। सानीया टेनीस में भले ही नंबर एक पर न पहूंच सकी पर बॉलपेपर के मामले में वह एक नंबर में है। सानीया को मिडिया में सनसनी कहा जाता है और इसे वह सच्चा भी साबित कर रही है तभी तो पहले उसने अपने बचपन के प्रेमी से अपनी सगाई तोड़ कर सनसनी मचाई और उसके बाद पाकिस्तानी से ंशादी की बात कह कर सनसनी मचा दी। हलांकि सानीया की सनसनी युवतियों में भी खुब है अरे उसकी नथ सनसनी से कम है क्या युवतियां इसकी दिवानी हो गए और युवक तो दिवने होते ही है।
सारी बात समझ में आती है, नैजवानों का हंगामा करना, नथ की सनसनी पर एक बात जो मेरे समझ में नहीं आती वह यह कि भैया नेता लोग इसपर हंगामा क्यों कर रहें है। अपने ठाकरे साहब इस उर्म में सानीया को लेकर हंगामा कर रहें है। कह रहें है भारत में नैजवान नहीं है क्या जो पाकिस्तान चली गई। दद्दू भारत में नौजबान होते तो आप क्यों हंगामा करते नैजावानों को करने दिजिए न।  और भैया सरहद की बात तो सियासतदां ही जाने दो दिलों के बीच यह कभी दिवार नहीं बनी है और सरहद पार दिल लगी तो आप इसे दिल्लगी मान रहें है। एक पते ही बात बता रहा हूं, जब बचपन के साथी से सगाई तोड़ने में वक्त नहीं  लगा तो पाकिस्तानी से शादी तोड़ने में कितना वक्त लगेगा। इसलिए दिल थाम कर बैठिए और शोएब को अराम से बॉलीबॉल का आनन्द लेने दिजिए।
सानीया कहां शादी करे कहां घर बसाए और कहां से टेनीस खेले उसको सोचने दो न, सब उंगली करने में क्यों तुल गए हो। सानीया पाकिस्तान ही में बस जाए तो हमारा क्या जाएगा। छोड़ दो भैय्या छोड़ दो.........



01 अप्रैल 2010

रजाई ओढ़ कर घी पीती भाजपा...

बिहार में भाजपा के  द्वारा दोहरी राजनीति की जा रही है। एक तरफ तो इसके मन्त्री मन्त्रिमण्डल में फैसले पर मुहर लगाते है और दूसरी तरफ इसके नेता सड़कों पर उतर कर विरोध करते है। भाजपा की यह दोहरी राजनीति नहीं तो क्या है कि अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का शाखा किशनगंज में खोले जाने के बिहार सरकार के फैसले का विरोध करते हुए भाजपा के नेताओं के ईशरे पर विद्यार्थी परिषद के द्वारा  आज बिहार बन्द के दौरान हंंगामा और तोड़ फोड़ किया गया। विद्यार्थी परिषद के लड़कों को क्या यह नहीं मालूम की उसके ही पार्टी के मन्त्री और विधायकों ने यह काम मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के तहत की है और अब जनता को भ्रमाने के लिए सड़कों पर तोड़ फोड़ कर जनता का ही नुकसान कर रही है। बुरा हो ऐसे राजनीतिज्ञों का जो इस तरह का दोहरा चरित्र तो रखतें है और सोचते है कि किसी को पता भी न चले। जनाब भाजपाईयों दम है तो सरकार को गिराने की बात कर बिल को रोबाओं या रजाई ओढ़ कर घी पीते रहना है। पर भैया सावधान पब्लिक है सब जानती है.............