05 अप्रैल 2010

दलित टोले के स्कूल भवन को बनने नहीं दे रहे गांव कें ही दबंग.

शेखपुरा-दलितों के विकास को लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बात भले ही कही जाती रही हो पर दूर-दराज के गांवों में आज भी दलितों के हितों की बात सुन कर गांव कें ही सम्पन्न लोग इसका विरोध करने लगते है। ऐसा ही एक बाकया हुआ है जिले के घाटकोसुम्भा प्रखण्ड कें सहरा गांव में। इस गांव में विद्यालय भवन बनाए जाने की स्वीकृत तीन साल पूर्व ही सर्वशिक्षा अभियान के तहत हो गई थी पर तीन साल के बाद आज तक यहां भवन नहीं बन सका वह भी गांव के ही दबंग ग्रामीणों के विरोध की वजह से। मामला इतना  बढ़ गया की हार कर दलितों ने आज समाहरणालय पर विद्यालय भवन बनाने को लेकर प्रदशZन किया तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। 
सहरा गांव दूर दराज टाल ईलाके में बसा हुआ है यहां आज तक विकास की रौशनी नहीं पहूंची है। यह गांव पिछड़ों की बहुलता बाला गांव है और साथ ही कुछ घर दलितों के भी है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत यह विद्यालय भवन बनाए जाने की बात हुई और उसकी स्वीकृति  भी हो गई और ठेकेदार यहां भवन बनाने के लिए भी गया पर पिछड़ी जाति के लोग यह जानकर भड़क गए कि दलितों कें  टोले में विघालय बनेगा और गांव वालों ने मिलकर तीन बार ठेकेदार को खदेर कर भगा दिया और स्कूल भवन दलितों के टोले में नहीं बनने देने की बात पर अड़े हुए है।

रंडीबाज

रंडीबाज (लघुकथा, एक कल्पकनिक कथा। इस कहानी से किसी व्यक्ति या संस्था को कोई संबंध नहीं है) चैत के महीने में अमूमन बहुत अधिक गर्मी नहीं होत...